वंदे भारत फ्रेट ईएमयू का सफल इमरजेंसी ब्रेकिंग परीक्षण, देश की पहली सुपरफास्ट पार्सल ट्रेन के लिए बड़ी उपलब्धि

भारत की पहली वंदे भारत आधारित फ्रेट ईएमयू ने लबान-गुड़ला रेलखंड पर इमरजेंसी ब्रेकिंग टेस्ट पास कर लिया है, जबकि एक अन्य फैसले में अदालत ने बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए मैंग्रोव काटने की अनुमति दी है।

वंदे भारत फ्रेट ईएमयू की तकनीकी परीक्षा

भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी योजना देश की पहली वंदे भारत प्लेटफॉर्म आधारित फ्रेट ईएमयू, जिसे सुपरफास्ट पार्सल रेक के रूप में विकसित किया गया है, ने अपने तकनीकी परीक्षणों में एक अहम पड़ाव पार कर लिया है। इस ट्रेन का इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस यानी ईबीडी परीक्षण पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल के अंतर्गत आने वाले लबान-गुड़ला रेलखंड पर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस विशेष परीक्षण के दौरान ट्रेन की ब्रेकिंग क्षमता को गीली और सूखी दोनों तरह की पटरियों पर परखा गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी ट्रेन सुरक्षित तरीके से रुक सकती है।

चार चरणों में हुई ब्रेकिंग सिस्टम की पड़ताल

कोटा मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक एवं जनसंपर्क अधिकारी सौरभ जैन ने इस परीक्षण के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की। उनके अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया कुल चार फेरों में पूरी की गई। इस दौरान रेक में मौजूद तीनों मुख्य इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम, जिनमें लोको ब्रेक, ट्रेन ब्रेक और पुश बटन ब्रेक शामिल हैं, की कार्यकुशलता की गहन जांच की गई। परीक्षण का मुख्य उद्देश्य उस सटीक दूरी का मापन करना था, जिसे तय करने के बाद ट्रेन पूरी तरह रुक जाती है। इन आंकड़ों के जरिए ब्रेकिंग प्रणाली की विश्वसनीयता और उसकी परिचालन क्षमताओं का सटीक मूल्यांकन किया जा सकेगा।

आरडीएसओ और आईसीएफ विशेषज्ञों की निगरानी

इस महत्वपूर्ण परीक्षण का संचालन अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन यानी आरडीएसओ के निर्देशन में किया गया। परीक्षण के दौरान आरडीएसओ के निदेशक (टेस्टिंग) अनन्जय मिश्रा, आईसीएफ चेन्नई के सहायक मंडल विद्युत इंजीनियर सुधांशु कुमार, मुख्य लोको निरीक्षक रामनिवास मीना और यातायात निरीक्षक महेंद्र सिंह मीणा जैसे तकनीकी विशेषज्ञ मौके पर मौजूद रहे। इसके अलावा आईसीएफ की टीम और लोको क्रू के सदस्य भी इस दौरान पूरी सक्रियता के साथ तैनात थे। ज्ञात हो कि कोटा मंडल में 29 जुलाई 2026 से इस फ्रेट ईएमयू के विभिन्न तकनीकी परीक्षण चल रहे हैं, और ईबीडी टेस्ट का सफल होना इसके अंतिम परिचालन की दिशा में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए मैंग्रोव काटने की अनुमति

एक अन्य बड़े घटनाक्रम में, बंबई हाई कोर्ट ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने परियोजना के लिए 13 किलोमीटर लंबी विद्युत लाइन बिछाने के उद्देश्य से मैंग्रोव के पेड़ों को काटने की मंजूरी दे दी है। न्यायालय ने इस निर्णय के पीछे 'राष्ट्रीय महत्व' का तर्क दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की पीठ ने स्पष्ट किया कि पालघर जिले के दहानू से अंबरसेराई के बीच बिजली लाइन ले जाने हेतु मैंग्रोव क्षेत्र के उपयोग और पेड़ों की कटाई के प्रस्ताव को सभी सक्षम अधिकारियों ने पहले ही जांच परख लिया था।

अदालत ने महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड की याचिका पर यह आदेश जारी किया। कंपनी को दहानू सब-स्टेशन से अंबरसेराई ट्रैक्शन सब-स्टेशन तक 132 किलोवाट की लाइन बिछानी है। अदालत ने हालांकि यह भी जोड़ा कि केवल सोलापुर में प्रतिपूरक वनीकरण करने से स्थानीय पारिस्थितिकी का नुकसान पूरा नहीं होता, जो महज एक कागजी औपचारिकता बनकर रह जाती है। यह 13 किलोमीटर लंबी लाइन मैंग्रोव और निजी वन क्षेत्रों से गुजरेगी, जिससे भविष्य में हाई-स्पीड रेल प्रणाली को निर्बाध बिजली मिलना सुनिश्चित हो सकेगा।

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