दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की E20 पेट्रोल नीति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को जब केजरीवाल अपने समर्थकों के साथ प्रधानमंत्री आवास की ओर शांतिपूर्ण मार्च के लिए निकले, तो पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अपने सहयोगियों के साथ सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। इस दौरान सड़क पर भारी गहमा-गहमी देखने को मिली।
फ़िरोज़शाह कोटला रोड पर पुलिस ने रोका काफिला
अरविंद केजरीवाल का यह विरोध मार्च मंगलवार दोपहर को ठीक 12:00 बजे आम आदमी पार्टी के कार्यालय से शुरू हुआ था। कार्यकर्ताओं का हुजूम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास की तरफ बढ़ रहा था, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें फ़िरोज़शाह कोटला रोड पर रोक लिया। पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री के साथ मौजूद लगभग 100 लोगों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी, जिसके विरोध में सभी नेता और कार्यकर्ता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
मनीष सिसोदिया और संजय सिंह भी धरने में शामिल
सड़क पर चल रहे इस प्रदर्शन में अरविंद केजरीवाल अकेले नहीं थे। उनके साथ आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और सांसद संजय सिंह सहित पार्टी के कई अन्य प्रमुख नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे। सभी नेता सड़क पर बैठकर E20 पेट्रोल नीति को जबरन थोपे जाने के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए स्पष्ट किया कि यह विरोध प्रदर्शन जनता पर बिना उनकी मर्जी के E20 पेट्रोल नीति थोपने के खिलाफ आयोजित किया गया था।
प्रधानमंत्री को सौंपने थे 2 लाख पत्र
मार्च की शुरुआत करने से पहले अरविंद केजरीवाल ने मीडिया और जनता को संबोधित किया था। उन्होंने कहा कि वह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2 लाख से अधिक आम नागरिकों के हस्ताक्षर वाले पत्र सौंपने जा रहे हैं। केजरीवाल का आरोप है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर उसे जबरन जनता को बेचा जा रहा है, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
टाउन हॉल में रखी थीं तीन प्रमुख मांगें
इस मार्च से ठीक एक दिन पहले, यानी सोमवार को अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के बाहर एक राष्ट्रीय टाउन हॉल कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में उन्होंने देश भर में लागू की जा रही E20 पॉलिसी का कड़ा विरोध किया और केंद्र सरकार के सामने तीन बड़ी मांगें रखी थीं:
- देश के सभी पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को E20 पेट्रोल और शुद्ध पेट्रोल, दोनों का विकल्प मिलना चाहिए ताकि लोग अपनी पसंद का ईंधन चुन सकें।
- इथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल की कीमत शुद्ध पेट्रोल की तुलना में काफी कम होनी चाहिए।
- देश में पेट्रोल की सामान्य कीमत को घटाकर 84 रुपये प्रति लीटर से कम किया जाना चाहिए।
इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के कारण लोगों के वाहनों के इंजन खराब हो रहे हैं और गाड़ियों का माइलेज भी तेजी से गिर रहा है, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
सरकार ने दी नीति पर सफाई
दूसरी तरफ, सरकार ने भी E20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों पर पहले ही अपनी स्थिति साफ कर दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने इस संबंध में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को अचानक नहीं, बल्कि एक बेहद व्यवस्थित, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और गहन विचार-विमर्श की प्रक्रिया के बाद चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है।
सरकार के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में नीति आयोग, विभिन्न ऑटोमोबाइल निर्माता, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) और देश के कई अन्य प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान शामिल रहे हैं। सरकार का मानना है कि यह नीति वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित है और इसे सोच-समझकर ही लागू किया गया है।
https://www.indiatv.in/delhi/arvind-kejriwal-march-pm-house-protest-against-e20-protest-on-road-2026-08-04-1235198