PoK में शाहबाज की पार्टी की बड़ी जीत
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में चल रहे विधानसभा चुनावों के दूसरे चरण के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। इन परिणामों में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने अपना जलवा बरकरार रखते हुए 18 में से 14 सीटों पर शानदार जीत हासिल की है। इस जीत के साथ ही नवाज शरीफ की पार्टी ने न केवल अपनी स्थिति को मजबूत कर लिया है, बल्कि सरकार गठन के लिए आवश्यक बहुमत का आंकड़ा भी पार कर लिया है। दूसरी ओर, बिलावल भुट्टो जरदारी की अगुवाई वाली पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के लिए ये नतीजे काफी निराशाजनक रहे हैं, क्योंकि उन्हें महज 4 सीटों पर ही जीत नसीब हो सकी है।
बहुमत की ओर PML-N का सफर
PoK विधानसभा की कुल 45 सीटों के लिए तीन चरणों में मतदान की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। अगर हम अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो चुनाव के पहले चरण में भी PML-N का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा था, जहां उन्होंने 13 में से 9 सीटों पर कब्जा जमाया था। इस प्रकार, पहले दो चरणों को मिलाकर पार्टी के पास अब कुल 23 सीटें हो गई हैं, जो बहुमत साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। हालांकि, अभी चुनाव का तीसरा और अंतिम चरण बाकी है, जो 10 अगस्त को आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने विश्वास जताते हुए कहा है कि उनकी पार्टी बहुत आराम से सत्ता में आएगी और उन्होंने विपक्षी दल से परिणामों को स्वीकार करने की अपील की है।
हिंसा और तनाव का साया
मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण नहीं रही। रविवार को संपन्न हुए मतदान के दौरान कई इलाकों में हिंसक झड़पें देखने को मिलीं। इन घटनाओं में एक व्यक्ति की जान चली गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अतिरिक्त, खराब मौसम और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक बाधाओं के कारण तीन सीटों पर मतदान रोकना पड़ा। प्रशासन के अनुसार, इन बाधित सीटों पर अब मंगलवार को दोबारा वोट डाले जाएंगे।
PPP ने लगाए धांधली के आरोप
चुनाव परिणामों के बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता राजा परवेज अशरफ ने नतीजों को पूरी तरह से नकारते हुए आरोप लगाया है कि यह सब पूर्व-नियोजित था। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी का वहां भारी विरोध देखा जा रहा है, वह इतनी आसानी से चुनाव कैसे जीत सकती है। पीपीपी का आरोप है कि उन्हें जानबूझकर हराकर PML-N को सरकार बनाने का रास्ता साफ करके दिया गया है। पार्टी का कहना है कि उन्होंने चुनाव आयोग को धांधली के ठोस सबूत सौंपे थे, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब पीपीपी तीसरे चरण के चुनाव का बहिष्कार करने की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रही है, हालांकि PML-N ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने पहले ही इस चुनाव का पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया था, जिसके चलते मुख्य मुकाबला केवल PML-N और PPP के बीच ही सिमट गया था।
भारत का कड़ा रुख
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अटूट हिस्से हैं। पाकिस्तान ने इन क्षेत्रों के एक बड़े हिस्से पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। उन्होंने पीओके में हो रहे इन चुनावों को महज एक दिखावा करार दिया और कहा कि यह पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन और अवैध कब्जे से दुनिया का ध्यान हटाने की एक सोची-समझी कोशिश है।
जनता का आक्रोश और मानवाधिकार का मुद्दा
इन चुनावों के ठीक पहले पीओके में करीब दो महीने तक उग्र विरोध प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शनकारी जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में सड़कों पर उतरे थे और उनकी मुख्य मांग विधानसभा की 12 शरणार्थी सीटों को पूरी तरह से खत्म करने की थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां इन विशिष्ट सीटों के जरिए अपनी मनपसंद सरकार थोपती हैं। जून के महीने में सरकार ने इस समिति (JAAC) पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके बाद सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई आम नागरिकों की मौत और लोगों के घायल होने की खबरें सामने आई थीं। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान जैसी संस्थाओं ने भी इस हिंसा पर गहरा दुख जताया है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने इन दावों को नकारते हुए उल्टे प्रदर्शनकारियों पर प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े होने का आरोप मढ़ा है और सख्त कार्रवाई जारी रखने की बात कही है। फिलहाल, अब सभी की निगाहें 10 अगस्त के अंतिम दौर पर टिकी हैं।
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