बांकीपुर में बीजेपी का 30 साल पुराना अभेद्य किला कैसे ढहा, प्रशांत किशोर की रणनीति ने बदली बिहार की सियासत

बिहार की बांकीपुर और मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर बीजेपी की हार ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है, जहां प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने एक बड़ी जीत दर्ज की है।

बांकीपुर का सियासी गणित

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए नतीजों ने सभी को चौंका दिया है। यहाँ पिछले करीब 30 सालों से भारतीय जनता पार्टी का वर्चस्व था, जिसे जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने तोड़ दिया है। प्रशांत किशोर ने इस सीट पर 19 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की है, जिसे एक ऐतिहासिक राजनीतिक उलटफेर के तौर पर देखा जा रहा है।

बीजेपी की हार और नई बहस

बांकीपुर के अलावा मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर भी भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है, जहाँ कांग्रेस ने बाजी पलटी है। हालांकि, गुजरात की मांजलपुर सीट पर पार्टी ने अपनी पकड़ बरकरार रखते हुए बड़ी जीत दर्ज की है। इन नतीजों ने देश भर में चर्चा छेड़ दी है कि क्या सवर्ण मतदाता अब बीजेपी से दूर हो रहे हैं या फिर स्थानीय स्तर पर कोई बड़ा असंतोष पनप रहा है। राजनीतिक विश्लेषक अब इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि आखिर वे कौन से समीकरण थे, जिन्होंने बीजेपी के इतने पुराने गढ़ को हिलाकर रख दिया।

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