बांकीपुर उपचुनाव परिणाम: प्रशांत किशोर ने बनाई मजबूत बढ़त, क्या नोटा ने बिगाड़ दिया 19 उम्मीदवारों का समीकरण?

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने बड़ी बढ़त हासिल कर ली है, जबकि नोटा ने भी हैरान करते हुए कई प्रत्याशियों से ज्यादा वोट बटोरे हैं।

बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की बड़ी बढ़त

बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बनी बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में मतगणना के रुझान स्पष्ट रूप से एक नया संकेत दे रहे हैं। जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार प्रशांत किशोर इस चुनावी मुकाबले में बेहद मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 31 राउंड की मतगणना होनी थी, जिसमें से 15 राउंड पूरे होने तक प्रशांत किशोर ने 29,752 वोट हासिल कर लिए थे। उनकी यह बढ़त उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी के नीरज कुमार के मुकाबले काफी निर्णायक मानी जा रही है। नीरज कुमार इस समय 21,550 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर बने हुए हैं। दोनों प्रत्याशियों के बीच वोटों का अंतर फिलहाल 8,202 मतों का है, जो चुनाव के नतीजे की दिशा को स्पष्ट रूप से प्रशांत किशोर के पक्ष में झुकाता दिख रहा है।

राष्ट्रीय जनता दल की स्थिति और मुकाबले का गणित

इस उपचुनाव में मुख्य विपक्षी दल के रूप में देखी जाने वाली राष्ट्रीय जनता दल की प्रत्याशी रेखा कुमारी का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है। शुरुआती 15 राउंड की गिनती के बाद रेखा कुमारी को मात्र 6,755 वोट मिले हैं, जो उन्हें तीसरे स्थान पर धकेलने के लिए पर्याप्त हैं। प्रशांत किशोर और आरजेडी उम्मीदवार के बीच मतों का अंतर 22,997 तक पहुंच गया है। मतगणना के अभी 16 राउंड और बाकी हैं, इसलिए आधिकारिक तौर पर जीत की घोषणा तो अंतिम परिणामों के बाद ही होगी, लेकिन अभी तक के रुझान आरजेडी के लिए एक बड़े राजनीतिक संकट की ओर इशारा कर रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या आरजेडी के शहरी वोट बैंक में सेंधमारी हुई है या पार्टी का स्थानीय संगठन मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में पूरी तरह विफल रहा है।

नोटा का चौंकाने वाला प्रदर्शन

बांकीपुर उपचुनाव में न केवल मुख्य उम्मीदवारों के प्रदर्शन पर नजरें टिकी थीं, बल्कि 'नोटा' यानी इनमें से कोई नहीं के विकल्प ने भी एक अलग चर्चा छेड़ दी है। मतगणना के 15 राउंड तक नोटा को कुल 304 वोट प्राप्त हुए थे। यह संख्या अपने आप में एक बड़ा संदेश है कि बांकीपुर के मतदाताओं का एक वर्ग ऐसा भी है जो मैदान में खड़े किसी भी उम्मीदवार को अपना प्रतिनिधि मानने को तैयार नहीं है। और तो और, नोटा का आंकड़ा उन 19 उम्मीदवारों से अधिक रहा है जिन्होंने इस चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई थी। यह स्थिति उन छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए एक आईना है जो चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के उद्देश्य से उतरे थे लेकिन नोटा से भी पीछे रह गए।

नोटा से पीछे रह गए कौन-कौन से उम्मीदवार

आयोग के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है कि बांकीपुर में केवल छह उम्मीदवार ही ऐसे थे जो नोटा के 304 वोटों के आंकड़े को पार कर सके। बाकी के सभी 19 उम्मीदवार नोटा से भी कम वोट पाने में कामयाब हुए। नोटा से अधिक वोट प्राप्त करने वाले प्रमुख उम्मीदवार इस प्रकार रहे:

  • प्रशांत किशोर, जन सुराज पार्टी: 29,752 वोट
  • नीरज कुमार, भारतीय जनता पार्टी: 21,550 वोट
  • रेखा कुमारी, राष्ट्रीय जनता दल: 6,755 वोट
  • तनवीर आलम, राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी: 494 वोट
  • मनोरंजन कुमार श्रीवास्तव, प्रगतिशील जनता पार्टी: 420 वोट
  • प्रदीप कुमार, भारतीय आम आवाम पार्टी: 362 वोट

इसके ठीक बाद नोटा का स्थान आता है, जिसने बाकी उम्मीदवारों को पीछे छोड़ दिया है।

नोटा से कम वोट पाने वाले उम्मीदवारों की सूची

जिन 19 उम्मीदवारों ने नोटा से भी कम मत प्राप्त किए, उनकी सूची इस प्रकार है:

  • बैजनाथ प्रसाद, भारतीय जवान किसान पार्टी: 142 वोट
  • सिकंदर कुमार, निर्दलीय: 131 वोट
  • अनिल दास, निर्दलीय: 116 वोट
  • रामबाबू प्रसाद, राष्ट्रीय गरीब दल: 110 वोट
  • सूरज कुमार यादव, पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक): 107 वोट
  • अभय चौधरी, निर्दलीय: 105 वोट
  • प्रेम शंकर प्रसाद, प्राउटिस्ट ब्लॉक, इंडिया: 103 वोट
  • जितेंद्र दुबे, अखिल भारतीय जनसंघ: 99 वोट
  • मनीषा शर्मा, राष्ट्रीय अपना दल: 99 वोट
  • मृत्युंजय कुमार, राष्ट्रीय समाजहित दल: 96 वोट
  • बागीश नंदन, निर्दलीय: 88 वोट
  • निरंजन कुमार आचार्य, राइट टू रिकॉल पार्टी: 87 वोट
  • उपेंद्र सहनी, राष्ट्रीय जनसंभावना पार्टी: 73 वोट
  • शुकेश कुमार, निर्दलीय: 73 वोट
  • अशोक कुमार, समता पार्टी: 66 वोट
  • नीतीश कुमार, निर्दलीय: 65 वोट
  • बिनोद राय, बिहार जस्टिस पार्टी: 56 वोट
  • लालू प्रसाद यादव, निर्दलीय: 43 वोट
  • ब्रजेश पटेल, निर्दलीय: 2 वोट

क्या नोटा ने बिगाड़ा आरजेडी का खेल?

राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या नोटा के कारण आरजेडी को नुकसान हुआ? यदि हम गणितीय आधार पर विश्लेषण करें, तो इसका उत्तर 'नहीं' है। आरजेडी उम्मीदवार को 6,755 वोट मिले हैं, जबकि नोटा को मात्र 304 वोट मिले। यदि इन सभी 304 वोटों को भी आरजेडी के खाते में जोड़ दिया जाए, तब भी उनका कुल आंकड़ा 7,059 तक ही पहुंचता, जो बीजेपी के 21,550 वोटों के मुकाबले काफी कम है। इसलिए, आरजेडी की हार या पिछड़ने के पीछे नोटा का कोई बड़ा हाथ नजर नहीं आता। समस्या आरजेडी के वोट बैंक के बिखराव और शायद उन अन्य प्रमुख दलों के उभार में है जिन्होंने आरजेडी के पारंपरिक मतदाताओं को प्रभावित किया होगा।

भविष्य के संकेत

बांकीपुर में जन सुराज की एंट्री ने यह साबित कर दिया है कि बिहार की शहरी सीटों पर मतदाताओं की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। आरजेडी का तीसरे नंबर पर रहना पार्टी के लिए एक गंभीर चिंतन का विषय है। क्या प्रशांत किशोर की रणनीति ने विपक्षी वोटों को अपनी ओर खींच लिया है, या फिर यह बदलाव किसी बड़े राजनीतिक समीकरण के बदलने की आहट है? इसका जवाब तो भविष्य में ही मिलेगा, लेकिन वर्तमान आंकड़े यह स्पष्ट कर रहे हैं कि प्रशांत किशोर ने बांकीपुर की जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में सफलता हासिल की है। अंतिम परिणामों का इंतजार अभी बना हुआ है, लेकिन रुझान एक बड़े उलटफेर की गवाही दे रहे हैं।

https://hindi.news18.com/news/bihar/patna-bankipur-assembly-constituency-result-latest-update-prashant-kishor-extends-lead-know-bjp-rjd-and-nota-upchunav-natiza-update-ws-l-10714459.html