सिबिल स्कोर बढ़ाने के नाम पर 600 लोगों से 10 करोड़ की ठगी, दुर्ग में बड़े स्कैम का खुलासा

छत्तीसगढ़ के दुर्ग में कॉलेज छात्रों और बेरोजगार युवाओं को सिबिल स्कोर सुधारने का लालच देकर 10 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने वाला गिरोह पकड़ा गया है। आरोपी पीड़ितों के नाम पर लोन लेकर महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदते थे और बाद में EMI भरना बंद कर देते थे।

कैसे शुरू हुआ यह बड़ा फर्जीवाड़ा

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सैकड़ों लोगों को झांसा देकर 10 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई है। इस ठगी के शिकार मुख्य रूप से कॉलेज के छात्र, प्रोफेसर और बेरोजगार युवा बने हैं। आरोपियों ने इन लोगों को अपना सिबिल स्कोर सुधारने और हर फाइनेंस पर 2000 से 3000 रुपये तक का नकद कमीशन देने का प्रलोभन दिया था। साथ ही, आरोपियों ने वादा किया था कि वे समय पर खुद EMI का भुगतान करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब तक पुलिस ने दर्जनों छात्रों की शिकायत पर लगभग 34 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। पीड़ितों के अनुसार, इस पूरे गिरोह का शिकार रायपुर, भिलाई, दुर्ग, बिलासपुर और बालोद के करीब 600 से ज्यादा लोग हुए हैं।

शंकराचार्य कॉलेज के छात्र से खुला राज

इस पूरे घोटाले का भंडाफोड़ शंकराचार्य कॉलेज में बीकॉम थर्ड ईयर के छात्र हिमांशु देवांगन की शिकायत के बाद हुआ। हिमांशु ने बताया कि आरोपी अनिरुद्ध ने उसे विश्वास दिलाया था कि यदि वह अपने दस्तावेजों पर पर्सनल लोन और इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस करवाता है, तो उसका सिबिल स्कोर बेहतर हो जाएगा। आरोपी की बातों में आकर हिमांशु और उसके कई साथियों ने अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज उन्हें सौंप दिए। आरोपियों ने छात्रों के दस्तावेजों का दुरुपयोग करते हुए क्रोमा, इंस्पायर इलेक्ट्रॉनिक्स, रिलायंस डिजिटल और जैन इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी नामी दुकानों से आईफोन, सैमसंग LED टीवी, कैरियर और डेकिन के एसी जैसे महंगे सामान फाइनेंस करवाए। इसके अलावा, बजाज फाइनेंस से 92000 रुपये का पर्सनल लोन भी लिया गया, जिसे आरोपी ऋषभ शर्मा के QR कोड पर ट्रांसफर कर लिया गया।

EMI न भरने पर हुआ खुलासा

पीड़ितों ने बताया कि शुरुआत के तीन महीनों तक आरोपियों ने तय समय पर EMI का भुगतान किया, जिससे सभी को उन पर भरोसा हो गया। हालांकि, अप्रैल 2026 के बाद से उन्होंने EMI जमा करना पूरी तरह बंद कर दिया। जब फाइनेंस कंपनियों के रिकवरी एजेंटों ने छात्रों के घरों पर दस्तक दी, तब जाकर उन्हें अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ऋषभ शर्मा के बैंक खातों में लगभग 1.84 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन हुए हैं। उसके पास से 4 से 5 बैंक खाते होने की जानकारी मिली है। जांच का दायरा अब उन फाइनेंसरों और दुकानों के कर्मचारियों तक भी पहुंच गया है, जिनकी मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम देना मुमकिन नहीं था।

पुलिस की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया

पद्मनाभपुर थाना पुलिस ने इस मामले में ऋषभ शर्मा, अनिरुद्ध सिंह और दीपेश जोशी समेत अन्य के खिलाफ BNS की धारा 318(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है। मुख्य आरोपी ऋषभ शर्मा को गिरफ्तार कर पहले तीन दिन की रिमांड पर लिया गया था, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया है। वहीं, मामले में शामिल अन्य आरोपियों, दीपेश और अनिरुद्ध को फिलहाल नोटिस देकर छोड़ दिया गया है। जैसे-जैसे FIR की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, नए पीड़ित लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे इस स्कैम का कुल आंकड़ा 10 करोड़ रुपये के पार जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है। पुलिस अभी भी मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि सभी आरोपियों को पकड़ा जा सके और पीड़ितों को न्याय दिलाया जा सके।

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