पेशावर में आईईडी विस्फोट से हड़कंप
पाकिस्तान के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत का पेशावर शहर एक बार फिर भीषण धमाके की गूंज से थर्रा उठा है। रविवार दोपहर को हुए इस आतंकी हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, इस्लामाबाद और पेशावर को जोड़ने वाले मोटरवे के टोल प्लाजा के निकट पीर जकोरी पुल के पास सड़क किनारे एक आईईडी यानी इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस छिपाकर रखा गया था।
यह विस्फोटक उस समय सक्रिय किया गया जब पुलिस की एक वैन वहां से गुजर रही थी। धमाका इतना जोरदार था कि पुलिस वैन का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस हमले में वाहन चालक और एक कांस्टेबल गंभीर रूप से घायल हो गए। हालांकि, राहत की बात यह है कि प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को खतरे से बाहर और स्थिर बताया है।
घटनास्थल की घेराबंदी और जांच
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल और बम निरोधक दस्ता (बीडीडीएस) तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गया। अधिकारियों ने पूरे इलाके को अपने घेरे में ले लिया है और सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया है। पेशावर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक फरहान खान के मुताबिक, हमलावरों ने विस्फोटक को सड़क किनारे स्थित ग्रीन बेल्ट में छिपाकर रखा था, ताकि पुलिस वाहन को निशाना बनाया जा सके। बम निरोधक टीम आसपास की झाड़ियों और संदिग्ध ठिकानों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं और भी विस्फोटक तो नहीं छिपे हैं।
लगातार बढ़ते आतंकी हमले
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में आतंकी वारदातों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। हाल के दिनों की घटनाओं पर नजर डालें तो सुरक्षा बल लगातार आतंकियों के निशाने पर हैं। कुछ दिन पहले ही हंगू जिले में एक पुलिस चौकी पर आतंकियों ने भीषण हमला बोला था, जिसमें एक डीएसपी समेत 9 पुलिसकर्मियों की जान चली गई थी और 28 अन्य लोग घायल हुए थे।
इसके अलावा, 29 जुलाई को स्वात जिले में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए एक संयुक्त ऑपरेशन के दौरान 1 पुलिसकर्मी और गांव रक्षा समिति के 4 सदस्य शहीद हो गए थे। हालांकि, जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने 6 आतंकियों को भी मौत के घाट उतार दिया था।
जुलाई का महीना रहा सबसे घातक
पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 सुरक्षा बलों के लिए बेहद दुखद और घातक साबित हुआ है। आंकड़ों पर गौर करें तो:
- जुलाई 2026 में कुल 112 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई।
- यह आंकड़ा जनवरी 2023 के बाद से किसी भी एक महीने में होने वाली मौतों का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
- पिछले एक दशक में इसे सुरक्षा बलों के लिए दूसरा सबसे बड़ा मासिक नुकसान माना गया है।
- सिर्फ खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की बात करें तो जुलाई में हिंसा के कारण 154 लोगों की मौत हुई है।
- इसकी तुलना में जून के महीने में मौतों की संख्या 75 थी, जो यह दर्शाता है कि एक महीने के भीतर मौतों का आंकड़ा दोगुने से भी ज्यादा हो गया है।
अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि क्षेत्र की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा इंतजामों को और अधिक सख्त और चाक-चौबंद किया जा रहा है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियां बढ़ते इन हमलों को रोकने के लिए रणनीति में बदलाव कर रही हैं ताकि भविष्य में इस तरह की जानलेवा घटनाओं को टाला जा सके।
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