झारखंड के सिमडेगा जिले की रहने वाली एक युवती के लिए विदेश में जाकर मोटी कमाई करने का सपना एक बेहद भयानक और दर्दनाक अनुभव में बदल गया। बेहतर भविष्य और सुनहरे अवसरों की तलाश में सात समंदर पार ओमान गई प्रीति कुजूर वहां मानव तस्करी के खतरनाक जाल में फंस गईं। एजेंटों द्वारा बड़े-बड़े वादे करके उन्हें विदेश भेजा गया था, लेकिन वहां पहुँचते ही उनके साथ अमानवीय व्यवहार शुरू हो गया। आखिरकार, कई दिनों तक गंभीर मानसिक तनाव और प्रताड़ना झेलने के बाद अब वह सुरक्षित तरीके से अपने गृह राज्य झारखंड लौट आई हैं। इस राहत भरी वापसी के बाद प्रीति ने अपनी जो आपबीती सुनाई है, वह किसी को भी झकझोर कर रख देने वाली है।
ओमान पहुंचते ही छीना मोबाइल और पासपोर्ट
वतन वापसी के बाद प्रीति कुजूर ने अपने साथ विदेश में हुई बर्बरता की पूरी कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि जैसे ही वह ओमान की धरती पर उतरीं, वहां मौजूद एजेंटों ने सबसे पहले उनका मोबाइल फोन और पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया। बाहरी दुनिया और अपने परिवार से उनका संपर्क पूरी तरह काटने के बाद उन्हें एक बंद कमरे में कैद कर दिया गया। प्रीति को करीब 15 दिनों तक एक ही कमरे में बंधक बनाकर रखा गया, जहां वे अत्यंत दयनीय स्थिति में दिन गुजारने को मजबूर थीं। इसके बाद उन्हें जबरन काम पर भेज दिया गया, जहां उन्हें शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
वेतन आधा और वतन वापसी के नाम पर वसूले 1.20 लाख रुपये
भारत में सक्रिय एजेंटों ने प्रीति को ओमान भेजने से पहले हर महीने 50,000 रुपये की आकर्षक तनख्वाह दिलाने का बड़ा लालच दिया था। लेकिन जब उन्हें काम पर लगाया गया, तो उन्हें तय समझौते के विपरीत केवल 25,000 रुपये ही दिए जा रहे थे। इस धोखाधड़ी और लगातार हो रहे अत्याचारों से तंग आकर जब प्रीति ने वापस भारत लौटने की इच्छा जताई, तो एजेंटों ने अपना असली रूप दिखा दिया। एजेंटों ने उनकी वापसी कराने के बदले भारी-भरकम राशि मांगनी शुरू कर दी। प्रीति ने बताया कि वापस भारत भेजने का झांसा देकर एजेंट ने उनसे 1.20 लाख रुपये भी ले लिए, लेकिन इसके बावजूद न तो उनके पैसे लौटाए गए और न ही उनकी वापसी की कोई व्यवस्था की गई।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और माइग्रेंट लेबर सेल की बड़ी पहल
जब ओमान में फंसी प्रीति के लिए सारे रास्ते बंद नजर आ रहे थे, तब उन्होंने किसी तरह झारखंड माइग्रेंट लेबर सेल से संपर्क साधा। इस पूरे संवेदनशील मामले को लेकर माइग्रेंट लेबर सेल की प्रभारी शिखा ने बताया कि 19 जून को प्रीति की इस विकट परिस्थिति का मामला पहली बार उनके संज्ञान में आया था। इसके तुरंत बाद यह गंभीर मुद्दा सोशल मीडिया के माध्यम से चारों तरफ फैल गया, जिस पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद राज्य सरकार पूरी तरह सक्रिय हो गई। ओमान में मौजूद भारतीय दूतावास और स्थानीय प्रशासन के साथ निरंतर संपर्क स्थापित किया गया और लगातार किए गए गंभीर प्रयासों के बाद प्रीति की सुरक्षित और सकुशल भारत वापसी सुनिश्चित कराई जा सकी।
एजेंटों पर मुकदमा दर्ज, पुलिस जांच में जुटी
सिमडेगा की इस बेटी के साथ हुए इस अमानवीय कृत्य को लेकर स्थानीय प्रशासन अब बेहद सख्त रुख अपना रहा है। प्रीति को झूठा झांसा देकर विदेश भेजने वाले और वहां बंधक बनाने वाले जालसाज एजेंटों के खिलाफ सिमडेगा पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पूरे मानव तस्करी नेटवर्क की गहराई से जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर उन अवैध एजेंटों के गिरोह का पर्दाफाश किया है जो मासूमों को रोजगार के बहाने विदेशों में बेच देते हैं।
प्रशासन की युवाओं से विशेष अपील
इस दिल दहला देने वाले मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और झारखंड सरकार ने राज्य के युवाओं और नौकरी चाहने वाले नागरिकों से एक महत्वपूर्ण अपील की है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को विदेश में नौकरी के लुभावने प्रस्तावों पर तुरंत और बिना सोचे-समझे विश्वास नहीं करना चाहिए। किसी भी देश में जाने से पहले वहां की नौकरी की शर्तों, वीज़ा की प्रामाणिकता और संबंधित नियोक्ता की पूरी जांच-पड़ताल की जानी आवश्यक है। इसके अलावा, केवल सरकार द्वारा अधिकृत और प्रमाणित एजेंसियों के माध्यम से ही विदेश जाने की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।
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