सड़क हादसों में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की बड़ी पहल
बिहार में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान घायलों को समय पर उपचार दिलाने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब राज्य में किसी भी सड़क हादसे का शिकार होने वाले व्यक्ति को इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। पीड़ित व्यक्ति या उनके मददगार को बस 112 नंबर पर एक कॉल करना होगा। इस इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम यानी ERSS के जरिए बिहार पुलिस घायल को सबसे नजदीकी अस्पताल पहुंचाने और एंबुलेंस की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करने में पूरी मदद करेगी।
डेढ़ लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस विशेष योजना का लाभ सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले हर व्यक्ति को मिलेगा। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत पीड़ित को 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त उपचार प्रदान किया जाएगा। इस सुविधा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इलाज शुरू करने के लिए मरीज या उनके परिजनों को किसी भी प्रकार की अग्रिम राशि जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। अस्पताल में पहुंचते ही पीड़ित की चिकित्सा प्रक्रिया तुरंत प्रभाव से शुरू कर दी जाएगी।
गोल्डन आवर पर है विशेष जोर
बिहार पुलिस के एडीजी सुधांशु कुमार का कहना है कि किसी भी दुर्घटना के बाद का शुरुआती एक घंटा, जिसे गोल्डन आवर कहा जाता है, जीवन बचाने के लिए सबसे निर्णायक होता है। यदि इस समय सीमा के भीतर घायल को सही चिकित्सा सहायता मिल जाए, तो मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस प्रणाली को नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के डिजिटल सिस्टम के साथ एकीकृत किया गया है, ताकि इलाज में लगने वाला समय न्यूनतम हो सके।
13 फरवरी 2026 से प्रभावी है योजना
एडीजी सुधांशु कुमार के मुताबिक, यह योजना आधिकारिक तौर पर 13 फरवरी 2026 से राज्य में लागू की जा चुकी है। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि अभी तक केवल 82 लोगों ने ही इस सेवा का लाभ उठाया है। प्रशासन का मानना है कि इस योजना के बारे में आम लोगों में अभी पर्याप्त जानकारी का अभाव है। जब कोई नागरिक 112 पर सूचना देता है, तो सिस्टम स्वतः ही नजदीकी एंबुलेंस और अस्पताल को अलर्ट भेज देता है, और जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालती है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ट्रैक की जाती है।
योजना का लाभ और सुरक्षा का भरोसा
इस योजना के दायरे में पैदल चलने वाले यात्रियों से लेकर साइकिल, बाइक, कार और अन्य सभी प्रकार के सड़क उपयोगकर्ता शामिल हैं। यह मुफ्त इलाज की सुविधा न केवल सरकारी अस्पतालों में, बल्कि आयुष्मान भारत योजना से सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी प्राप्त की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि सड़क हादसे की स्थिति में घबराएं नहीं। जो व्यक्ति घायल की मदद के लिए आगे आएगा, उसे किसी भी तरह की कानूनी कार्यवाही या पुलिस पूछताछ का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने मददगारों की सुरक्षा के लिए ठोस प्रावधान किए हैं।
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