सीमा व्यापार की नई शुरुआत
भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। छह साल के लंबे अंतराल के बाद, दोनों देशों ने सिक्किम और हिमाचल प्रदेश के दुर्गम दर्रों के जरिए अपने व्यापारिक रिश्तों को फिर से बहाल कर दिया है। यह व्यापारिक गतिविधियां समुद्र तल से 14,000 फीट से भी अधिक ऊंचाई पर स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों पर शुरू की गई हैं। यह फैसला उन व्यापारियों के लिए एक बड़ी राहत है, जो इन क्षेत्रों पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर रहते हैं।
कोविड के बाद बंद हुआ था रास्ता
उल्लेखनीय है कि साल 2020 में कोविड-19 महामारी के प्रसार और उसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर बढ़ते तनाव के चलते इस व्यापारिक मार्ग को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। अब एक लंबे इंतजार के बाद, सिक्किम के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की सचिव कर्मा डी. युत्सो ने आधिकारिक तौर पर सीमा व्यापार के फिर से शुरू होने की पुष्टि की है। यह व्यापार मुख्य रूप से नाथू ला दर्रा और हिमाचल प्रदेश के शिपकी ला दर्रे के माध्यम से संचालित हो रहा है।
नाथू ला दर्रे पर औपचारिक शुरुआत
पूर्वी सिक्किम में स्थित नाथू ला दर्रे पर एक औपचारिक उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। अब मौजूदा द्विपक्षीय समझौते के तहत, यह मौसमी व्यापार हर सप्ताह सोमवार से लेकर बृहस्पतिवार तक संचालित होगा, जबकि बाकी दिनों में इसे बंद रखा जाएगा। यह व्यापारिक सिलसिला नवंबर महीने तक जारी रहने की उम्मीद है। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस यानी ITBP को मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP के तहत तैनात किया गया है। खास बात यह है कि इस बार पहली बार नाथू ला क्षेत्र में महिला ITBP प्लाटून को सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
व्यापारियों के लिए परमिट और नियम
प्रशासन ने इस बार कुल 38 पंजीकृत व्यापारियों को व्यापार के लिए विशेष पास जारी किए हैं। इस व्यापारिक मार्ग पर सरकार द्वारा अधिसूचित कुल 36 प्रकार की वस्तुओं का ही आदान-प्रदान किया जाएगा। इन वस्तुओं में मुख्य रूप से हथकरघा उत्पाद, हस्तशिल्प, पारंपरिक धार्मिक सामग्री, विभिन्न प्रकार के रेडीमेड कपड़े और अन्य सरकारी तौर पर स्वीकृत वस्तुएं शामिल हैं।
इतिहास और शिपकी ला का महत्व
नाथू ला दर्रे का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। साल 1962 में भारत-चीन के बीच हुए युद्ध के बाद इसे लंबे समय के लिए बंद कर दिया गया था। करीब चार दशकों के बाद, साल 2006 में इसे फिर से सीमा व्यापार के लिए खोला गया था। अब एक बार फिर से इसे सक्रिय किया जाना दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर, हिमाचल प्रदेश के प्राचीन सिल्क रूट के तौर पर पहचाने जाने वाले शिपकी ला दर्रे से भी व्यापार की शुरुआत हो गई है। राज्य के राजस्व और बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने स्वयं 16 व्यापारियों को उनके घोड़ों के साथ तिब्बत के शिपकी गांव की ओर रवाना किया।
वस्तु विनिमय प्रणाली और ट्रेड मार्ट
शिपकी ला दर्रे पर होने वाला यह व्यापार बार्टर यानी वस्तु विनिमय प्रणाली पर आधारित होगा। नियमों के अनुसार, व्यापारियों को तिब्बत के भीतर 72 घंटे तक व्यापारिक गतिविधियों में भाग लेने के बाद वापस लौटना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, सीमा व्यापार को और अधिक सुगम बनाने के लिए, नामग्या ग्राम पंचायत के शिपकी ला क्षेत्र में 1.70 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक छुप्पन ट्रेड मार्ट का निर्माण किया गया है, जिसका उद्घाटन भी मंत्री द्वारा किया गया है। यह केंद्र व्यापारियों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करेगा और व्यापार के दौरान होने वाली असुविधाओं को कम करने में मदद करेगा।
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