जेलेंस्की से आमने-सामने की बातचीत को पुतिन का दो टूक इनकार, ब्रिक्स पर बोले- 'जी-7 को पीछे छोड़ दिया'

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के आमने-सामने की बैठक के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। दूसरी ओर उन्होंने ब्रिक्स की जमकर सराहना करते हुए कहा कि इस समूह ने जी-7 देशों को पीछे छोड़ दिया है।

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को 4 साल से भी ज्यादा का समय बीत चुका है। दोनों ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों का सिलसिला लगातार जारी है, जिनमें रोज़ाना लोगों की जान जा रही है। इसके बावजूद इस संघर्ष के थमने के कोई आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे। इसी बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एक मेज़ पर बैठकर बातचीत करने का न्योता दिया था। हालांकि एपी की रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन ने जेलेंस्की के साथ आमने-सामने की बैठक के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

जेलेंस्की ने आखिर क्या प्रस्ताव रखा था?

दरअसल, इससे पहले जेलेंस्की ने पुतिन के नाम एक खुला पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने लिखा- "जब आप (पुतिन) 26 साल से भी पहले रूस में सत्ता में आए थे, तब यूक्रेन के कई लोग आपको सकारात्मक नज़रिए से देखते थे। यह सच था। लेकिन अब वह बात पुरानी पड़ चुकी है। आज यूक्रेन के अधिकतर लोग इसे सकारात्मक रूप से देखते हैं कि हमारे लंबी दूरी के ड्रोन ने सेंट पीटर्सबर्ग में आपके मंच के उद्घाटन के दौरान 1,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की। आप भली-भांति जानते हैं कि यह दूरी हमारी ताकत की कोई आखिरी सीमा नहीं है। यूक्रेन सभी युद्धबंदियों के आदान-प्रदान के लिए तैयार है, और यह जंग को समाप्त करने की दिशा में एक अच्छा कदम साबित हो सकता है। युद्ध के दौरान ले जाए गए नागरिकों और बच्चों की वापसी के लिए भी गंभीर प्रयास होने चाहिए।"

जेलेंस्की ने आगे लिखा- "हमें यह तय करना होगा कि हमारे बाद आने वाली यूक्रेनी और रूसी पीढ़ियों का भविष्य कैसा होगा। यदि आप व्यक्तिगत रूप से इस नतीजे पर नहीं पहुंचते कि इस युद्ध को खत्म करने का समय आ गया है, तो यूक्रेन अपने अस्तित्व के लिए लड़ता रहेगा। हमारे साथ वे लोग खड़े होंगे जो हमारा समर्थन करेंगे। लेकिन आपको भी अपने अस्तित्व के लिए और कहीं अधिक संघर्ष करना पड़ेगा- रूस के लिए नहीं, बल्कि अपने लिए। और यह कोई धमकी नहीं है, न तो मेरी ओर से और न ही यूक्रेन की ओर से। यह रूसी इतिहास का एक तथ्य है जिसे आप अच्छी तरह जानते हैं: जब रूस थक जाता है, तब बदलाव आता है। हम उस थकान की दिशा में काम कर सकते हैं। आप अपना युद्ध रोक सकते हैं।"

'आपके संसाधन तेजी से घट रहे हैं'

जेलेंस्की ने लिखा- "आप अब भी रूस के लोगों को इस तरह जीने के लिए मजबूर कर सकते हैं। लेकिन आपके संसाधन काफी कम होते जा रहे हैं। आपके पास रूस के लोगों की वफादारी उस तरह खरीदने के लिए पर्याप्त धन या राजनीतिक पूंजी नहीं बचेगी, जैसा आप पिछले 26 वर्षों से करते आए हैं। और हम यह सुनिश्चित करने की हरसंभव कोशिश करेंगे कि दुनिया उस वक्त को करीब लाने में मदद करे।"

उन्होंने आगे कहा- "जैसा कि आप खुद कहना पसंद करते हैं, 'हमें आंकड़ों की जांच करनी होगी।' कल मुझे मई के दौरान यूक्रेन मोर्चे पर आपकी सेना के नुकसान की एक रिपोर्ट मिली। एक बार फिर मारे गए और गंभीर रूप से घायल रूसी सैनिकों की संख्या 30,000 से अधिक हो गई है। हम महीने दर महीने इसी स्तर को बनाए हुए हैं, और हमारे पास आपके हर नुकसान का वीडियो प्रमाण है- ये बेबुनियाद दावे नहीं हैं। हम जानते हैं कि आपके युद्धक्षेत्र में होने वाली क्षति में से 63 प्रतिशत सैनिक मारे जाते हैं, जबकि केवल 37 प्रतिशत घायल होते हैं। 21वीं सदी में कोई भी सेना इस अनुपात को बर्दाश्त नहीं कर सकती, और मृतकों का अनुपात लगातार बढ़ता ही रहेगा। ऐसा नहीं है कि यूक्रेन रूसी सैनिकों के भाग्य को लेकर चिंतित है, लेकिन मुझे यूक्रेन के लोगों की परवाह है।"

ब्रिक्स पर पुतिन की राय

दूसरी ओर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को ब्रिक्स संगठन की जमकर सराहना की। पुतिन ने कहा- "अगर आप बीते 5 वर्षों की वैश्विक जीडीपी के रुझान पर नज़र डालें, तो पाएंगे कि इसकी सालाना वृद्धि का करीब आधा हिस्सा, यानी 49%, ब्रिक्स देशों की वजह से है। जबकि तथाकथित 'सात देशों के समूह' का योगदान अनुमानित 18% है। पर्चेजिंग पावर पैरिटी के आधार पर वैश्विक जीडीपी में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी 40% है, जबकि जी7 देशों की हिस्सेदारी 29% से भी कम है। यानी ब्रिक्स ने जी7 देशों को पीछे छोड़ दिया है, और यह उपलब्धि उसने 2020 में ही हासिल कर ली थी, लेकिन यह अंतर लगातार बढ़ रहा है। ब्रिक्स के पक्ष में इस अंतर के और बढ़ने की उम्मीद है।"

भारत को लेकर क्या बोले पुतिन?

इस दौरान पुतिन ने भारत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा- "हमारा एक और अहम साझेदार भारत है, जो आईटी उद्योग में सबसे आगे चल रहे देशों में से एक है। वैश्विक सॉफ्टवेयर बाज़ार में इसकी काफी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है।" बता दें कि भारत साल 2026 में ब्रिक्स देशों के वार्षिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए व्लादिमीर पुतिन 12 और 13 सितंबर को भारत की यात्रा पर आने वाले हैं।

https://www.indiatv.in/world/europe/russia-vladimir-putin-rejects-ukrainian-president-volodymyr-zelenskyys-call-for-face-to-face-meeting-also-praised-brics-group-2026-06-05-1223290