झारखंड को मिली बड़ी वित्तीय सहायता
पर्यावरण संरक्षण और वनीकरण के क्षेत्र में झारखंड को केंद्र सरकार से महत्वपूर्ण वित्तीय सहयोग मिला है। राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी द्वारा संसद में उठाए गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि नेशनल कैम्पा यानी राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण के माध्यम से झारखंड को पिछले 5 वर्षों में कुल 3,310.45 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है।
नगर वन योजना और वन भूमि का सुधार
केवल बड़े वनीकरण प्रोजेक्ट्स ही नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के लिए भी धन आवंटित किया गया है। केंद्र सरकार की ओर से नगर वन योजना के तहत राज्य को 22.3 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त हुई है। पिछले 5 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो झारखंड में कुल 78,423.96 हेक्टेयर खराब हो चुकी वन भूमि का जिर्णोद्धार सफलतापूर्वक किया गया है। मंत्रालय इन कार्यों को हरित भारत मिशन और नेशनल कैम्पा जैसी विभिन्न योजनाओं के जरिए गति दे रहा है।
वनीकरण के लिए अपनाई जा रही तकनीकें
मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकारों को तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण चरणों के माध्यम से वन पुनर्स्थापन का काम सौंपा गया है। इन गतिविधियों में शामिल प्रमुख उपाय इस प्रकार हैं:
- सहायता प्राप्त प्राकृतिक पुनर्जनन की प्रक्रिया।
- वृक्षारोपण के लिए कृत्रिम पुनर्जनन का उपयोग।
- क्षतिपूर्ति वनीकरण की व्यवस्था।
- भूमि की गुणवत्ता सुधारने हेतु मृदा और नमी संरक्षण के उपाय।
- स्थानीय और स्वदेशी प्रजातियों के पौधों का विशेष रोपण ताकि पर्यावरण अनुकूलन बना रहे।
जलवायु परिवर्तन और एनएएफसीसी परियोजना
सरकार ने जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए वर्ष 2015 में जलवायु परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय अनुकूलन कोष (NAFCC) की स्थापना की थी। इसका मुख्य उद्देश्य संवेदनशील राज्यों को वित्तीय सहायता देना है। इस कोष के माध्यम से देशभर में 30 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं। झारखंड के संदर्भ में, राज्य में वनों और उन पर निर्भर रहने वाले समुदायों को जलवायु जोखिमों से बचाने के लिए एक विशेष परियोजना स्वीकृत की गई थी, जिसके लिए 24.73 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।
झारखंड की संवेदनशीलता और वैज्ञानिक अध्ययन
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने एक राष्ट्रीय स्तर का व्यापक अध्ययन किया है जिसका शीर्षक है 'क्लाइमेट वल्नाराबिलिटी एससमेंट फॉर अडप्टेशन प्लानिंग इन इंडिया यूजिंग ए कॉमन फ्रेमवर्क'। इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान जलवायु जोखिमों के आधार पर राज्यों और जिलों की संवेदनशीलता का आकलन किया गया है। दुर्भाग्य से, इस आकलन में झारखंड को अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।
इस रिपोर्ट के माध्यम से राज्यों को यह समझने में मदद मिलती है कि उनकी जलवायु स्थिति के पीछे मुख्य कारण क्या हैं। इसके अलावा, डीएसटी यानी विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग राज्य जलवायु परिवर्तन प्रकोष्ठों के माध्यम से मानव क्षमता निर्माण, जन जागरूकता अभियानों और संस्थागत ढांचे को मजबूत करने के लिए झारखंड को लगातार तकनीकी और वित्तीय सहयोग प्रदान कर रहा है, ताकि भविष्य की चुनौतियों का सामना किया जा सके।
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