बिहार में वाहन जांच के बदले नियम
बिहार में सड़क पर वाहन चेकिंग और चालान काटने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब राज्य में किसी भी वाहन को सड़क पर रोकने, उसकी जांच करने या चालान काटने का अधिकार केवल दारोगा रैंक के अधिकारी या उनसे ऊपर के अधिकारियों के पास ही होगा। जमादार या सिपाही रैंक के पुलिसकर्मी अब सड़क पर वाहनों को रोकने या उनके खिलाफ किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए अधिकृत नहीं होंगे। यह निर्देश पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी किए गए हैं।
एडीजी यातायात ने दी जानकारी
इस निर्णय की जानकारी अपर पुलिस महानिदेशक (यातायात) सुधांशु कुमार ने शुक्रवार को पटना स्थित सरदार पटेल भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यातायात नियमों के पालन को और अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि अब वाहन चालकों को भौतिक दस्तावेजों के साथ रखने की अनिवार्यता में राहत दी गई है। यदि कोई चालक डिजिलॉकर या किसी अन्य अधिकृत ऑनलाइन माध्यम से अपने वाहन के दस्तावेज दिखाता है, तो उसे पूरी तरह से वैध और मान्य माना जाएगा, बशर्ते वे दस्तावेज असली और सत्यापित हों।
बॉडी-वॉर्न कैमरा और निगरानी
यातायात प्रबंधन को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए नई तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। अब यातायात ड्यूटी पर तैनात सभी पुलिसकर्मियों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरा पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। एडीजी ने सख्त लहजे में कहा कि यदि कोई पुलिसकर्मी बिना कैमरा चालू किए वाहन की जांच या चालान काटने जैसी कार्रवाई करता है, तो उसे अनुचित माना जाएगा। इसके अलावा, पटना के गांधी मैदान में स्थित एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) के जरिए शहर के प्रमुख स्थानों पर यातायात व्यवस्था की लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी। किसी भी प्रकार का जाम या बाधा उत्पन्न होने पर वहां तैनात पुलिस बल या क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) को तुरंत सक्रिय किया जाएगा ताकि स्थिति को सामान्य किया जा सके।
सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए योजना
प्रेस वार्ता के दौरान सुधांशु कुमार ने प्रधानमंत्री राहत योजना को लेकर जन जागरूकता की कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि इस महत्वपूर्ण योजना के तहत सड़क हादसे में घायल होने वाले व्यक्ति का चिन्हित अस्पतालों में 1,50,000 रुपये तक का कैशलेस इलाज किया जाता है। हालांकि, सही जानकारी न होने के कारण अब तक बिहार में केवल 82 लोगों ने ही इस सुविधा का लाभ उठाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सहायता के लिए दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर स्थानीय थाने या कॉल सेंटर को सूचित करना आवश्यक है। साथ ही, उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए सभी जिलों में मोटर वाहन दावा अधिकरण (एमएसीटी) का गठन किया गया है, जिसके माध्यम से अब तक 3,339 मामलों में से 1,972 लोगों को मुआवजा दिलाया गया है। अंत में, उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने और पटना जैसे प्रमुख शहरों में ऑटो चालकों को अनुशासित करने के लिए नगर निगम के साथ मिलकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
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