टीएमसी में फूट गहराई: ममता के आवास पर बैठक में पहुंचे सिर्फ 8 विधायक और 6 सांसद, संगठन में बड़े फेरबदल

ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास पर हुई टीएमसी की अहम बैठक में सिर्फ आठ विधायक और छह सांसद ही पहुंचे, जहां संगठन में कई बदलावों का ऐलान किया गया। बागी नेताओं के 58 विधायकों के समर्थन के दावे ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त सरगर्मी बढ़ गई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास पर पार्टी की एक अहम बैठक बुलाई गई। हैरानी की बात यह रही कि इस बैठक में पार्टी के महज आठ विधायक और छह सांसद ही पहुंचे। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पार्टी के अंदर बढ़ती गुटबाजी और बागी नेताओं के दावों ने नेतृत्व की बेचैनी बढ़ा दी है।

बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद

बैठक में हिस्सा लेने वाले प्रमुख विधायकों में बीना मंडल, असीमा पात्रा, मदन मित्रा, कुनाल घोष, फिरहाद हकीम, शोभनदेब चट्टोपाध्याय, बिमान बनर्जी और अशोक कुमार देब शामिल रहे। वहीं सांसदों की ओर से डोला सेन, माला रॉय, कल्याण बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ ब्रायन और सुदीप बंद्योपाध्याय की मौजूदगी दर्ज की गई।

एलओपी की नियुक्ति को बताया अवैध

बैठक के बाद टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) के तौर पर ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति को 'अवैध' करार दिया। उन्होंने कहा कि इस फैसले को चुनौती देने के लिए पार्टी सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करेगी। उनका कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा की गई यह नियुक्ति नियमों के मुताबिक नहीं है।

बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप

कल्याण बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर भी तीखे आरोप मढ़े। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता खुलेआम टीएमसी कार्यकर्ताओं की हत्या कर रहे हैं और पार्टी नेताओं के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि टीएमसी इस मसले पर सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ेगी।

संगठन में हुए कई बदलाव

बैठक में संगठनात्मक स्तर पर भी कई अहम फैसले लिए गए। कल्याण बनर्जी ने बताया कि डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन अब पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को संगठन के कामकाज में मदद करेंगे। इसके साथ ही राज्य स्तर के नेताओं से राय लेकर नई समितियों का गठन किया जाएगा।

संगठन में हुए बदलावों के तहत चंद्रिमा भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल प्रदेश तृणमूल कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि सजदा अहमद, ममता ठाकुर, नयना बंद्योपाध्याय और स्वाति खांडेकर को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं सांसद सयानी घोष को पार्टी का युवा अध्यक्ष बनाया गया है।

बागी गुट का 58 विधायकों के समर्थन का दावा

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पार्टी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा समेत बागी विधायकों के एक समूह ने दावा किया है कि उन्हें विधानसभा में 58 विधायकों का समर्थन हासिल है। बागी खेमे ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के फैसले को भी सिरे से खारिज कर दिया है।

ऋतब्रत बनर्जी का दावा है कि उनकी अगुवाई वाले गुट को पश्चिम बंगाल विधानसभा में 'मुख्य विपक्ष' के रूप में स्वीकार कर लिया गया है और विधानसभा अध्यक्ष ने उनके दावे को मान्यता भी दे दी है। उन्होंने कहा कि दो-तिहाई से ज्यादा टीएमसी विधायक उनके साथ हैं और वे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह इच्छा भी जताई कि ममता बनर्जी उनके लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं।

आगे क्या

टीएमसी के भीतर बढ़ते इस राजनीतिक टकराव ने पश्चिम बंगाल की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि अदालत और विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर इस विवाद का क्या नतीजा निकलता है और राज्य की राजनीति पर इसका कितना असर पड़ता है।

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