झारखंड में परीक्षा विवाद पर गहराया संकट
झारखंड में कथित तौर पर JPSC और JSSC-CGL परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के मुद्दे ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि सरकार इन परीक्षाओं में हुई धांधली की जांच को प्रभावित कर रही है, जिससे राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। बीजेपी ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से जांच कराने की मांग रखी है। इसके साथ ही पार्टी ने इस मुद्दे पर राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन चलाने का भी ऐलान कर दिया है।
सीबीआई जांच की मांग और सरकार पर गंभीर आरोप
बीजेपी नेताओं का स्पष्ट तौर पर मानना है कि झारखंड की मौजूदा सरकार पूरे मामले को दबाने और अपनी जांच एजेंसियों के जरिए लीपापोती करने में जुटी है। पार्टी का आरोप है कि राज्य की सीआईडी जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि सरकार इसे अपने नियंत्रण में रखकर दिशाहीन कर रही है। बीजेपी का कहना है कि युवा लंबे समय से सड़कों पर उतरकर अपनी मांगों को बुलंद कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी आवाज सुनने के बजाय उदासीन रवैया अपना रही है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार सीबीआई जांच की सिफारिश नहीं करती, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
नीट मामले से की गई तुलना
इस पूरे प्रकरण को बीजेपी ने नीट पेपर लीक मामले के समानांतर खड़ा किया है। पार्टी ने उदाहरण देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने नीट मामले में न केवल तत्परता दिखाई, बल्कि सख्त कदम उठाते हुए पेपर लीक को रोकने के लिए कड़े कानून भी बनाए। बीजेपी ने तर्क दिया है कि झारखंड सरकार के पास ऐसे किसी भी कड़े कदम या प्रभावी कार्रवाई का अभाव है। पार्टी ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं का हक मारने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए, जो केवल एक केंद्रीय जांच एजेंसी की निष्पक्ष जांच से ही संभव है।
जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल
विवाद के केंद्र में JPSC की संरचना को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बीजेपी ने दावा किया है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा यानी JMM के एक नेता की पत्नी JPSC की सदस्य हैं। पार्टी का आरोप है कि इस प्रकार के जुड़ाव से जांच की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पूरी तरह खत्म हो जाती है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र तौर पर पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इससे राजनीति गरमा गई है। बीजेपी ने मांग की है कि JPSC और JSSC-CGL से संबंधित तमाम विवादित परीक्षाओं को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और दोषियों पर कानूनी शिकंजा कसा जाए।
मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग और आंदोलन की रणनीति
आंदोलन को धार देते हुए बीजेपी ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से त्यागपत्र देने की मांग की है। साथ ही, कांग्रेस पार्टी से यह अपील भी की है कि वह झारखंड की सरकार से अपना समर्थन वापस ले ले। बीजेपी ने घोषणा की है कि उनका आंदोलन तब तक नहीं रुकेगा जब तक सीबीआई जांच का औपचारिक आदेश नहीं मिल जाता। इस आंदोलन के तहत राज्यभर में मशाल जुलूस निकाले जाएंगे, धरना-प्रदर्शन किए जाएंगे और विरोध के अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
युवाओं के भविष्य पर सियासी घमासान
बीजेपी का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक बहस नहीं है, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के करियर और उनके उज्ज्वल भविष्य का संवेदनशील मुद्दा है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वे इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों का क्या जवाब आता है और मुख्यमंत्री इस बढ़ते सियासी दबाव को देखते हुए क्या कदम उठाते हैं। निश्चित रूप से, परीक्षा गड़बड़ी का यह मामला आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति का केंद्र बिंदु बना रहेगा और इसमें और अधिक सियासी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
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