दिल्ली की मामूली नौकरी छोड़ गांव लौटे सुनील कुमार, डेयरी व्यवसाय से सालाना कर रहे 10 लाख की कमाई

बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले सुनील कुमार ने दिल्ली में 13000 रुपये की वेतन वाली नौकरी छोड़कर अपने गांव में डेयरी फार्मिंग शुरू की। आज वे 40 पशुओं के साथ आत्मनिर्भर बनकर हर साल 8 से 10 लाख रुपये कमा रहे हैं।

दिल्ली के संघर्ष से गांव की आत्मनिर्भरता तक

बिहार के सीतामढ़ी जिले के सोनबरसा प्रखंड के परछइयां गांव के निवासी सुनील कुमार की जीवन यात्रा आज उन युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है जो बड़े शहरों में कम वेतन पर संघर्ष कर रहे हैं। सुनील कभी देश की राजधानी दिल्ली में एक निजी कंपनी में कार्यरत थे। वहां कड़ी मेहनत और शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी के बावजूद उन्हें महीने के अंत में केवल 13000 रुपये ही वेतन मिल पाता था। आर्थिक तंगी और सीमित आय से तंग आकर सुनील ने दिल्ली की चकाचौंध को पीछे छोड़ अपने गांव लौटने का साहसी निर्णय लिया। उनका लक्ष्य किसी और के लिए काम करने के बजाय अपने खुद के संसाधनों पर आधारित व्यवसाय शुरू करना था।

पशुपालन में देखी सफलता की राह

गांव लौटने के बाद सुनील कुमार ने पिछले 4 वर्षों से पशुपालन और डेयरी के क्षेत्र में खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया। शुरुआत में उन्हें कई प्रकार की चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपने दृढ़ निश्चय और कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने आज इसे एक सफल व्यवसाय में तब्दील कर दिया है। आज सुनील किसी दूसरे पर आश्रित होने के बजाय अपने डेयरी फार्म के मालिक हैं। उनकी यह यात्रा साबित करती है कि यदि सही प्रबंधन और लगन हो, तो गांव में रहकर भी सम्मानजनक और मुनाफा देने वाला रोजगार खड़ा किया जा सकता है।

40 मवेशियों से खड़ा किया डेयरी साम्राज्य

सुनील के डेयरी फार्म में आज छोटी और बड़ी मिलाकर कुल 40 गाय और भैंसें हैं। उन्होंने अपने मवेशियों के खान-पान और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा है, जिसका सीधा असर उनके दूध के उत्पादन और गुणवत्ता पर पड़ता है। सुनील बताते हैं कि वर्तमान में उनके पास 18 गायें दूध देने वाली हैं, जिनसे उन्हें प्रतिदिन लगभग 100 से 120 लीटर दूध मिलता है। अपने क्षेत्र में शुद्ध और ताजे दूध की मांग के चलते वे आसानी से पूरा दूध बेच लेते हैं, जिससे उन्हें रोजाना एक निश्चित और अच्छी आमदनी प्राप्त होती है।

मुनाफे का गणित और भविष्य की राह

डेयरी व्यवसाय के विस्तार और उत्पादन को लेकर सुनील का कहना है कि जब मौसम अनुकूल होता है और खटाल में दूध देने वाली गायों की संख्या 25 से 30 तक पहुंच जाती है, तब दूध की बिक्री रोजाना 150 से 170 लीटर तक बढ़ जाती है। इस व्यवस्थित व्यापार के माध्यम से सुनील आज सालाना 8 से 10 लाख रुपये के आसपास कमाई कर रहे हैं। दिल्ली की मामूली नौकरी को छोड़कर अपने गांव में पशुपालन शुरू करने का उनका यह फैसला न केवल उनके परिवार के लिए आर्थिक रूप से बेहद लाभदायक साबित हुआ है, बल्कि यह उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है जो गांव में रहकर ही आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनना चाहते हैं।

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