106 साल की उम्र में भी रोज 5 किमी पैदल चलते हैं मोतीलाल, सालभर खाए 100 किलो चना, घी-दूध पिया पानी की तरह

राजस्थान के करौली में रहने वाले 106 वर्षीय मोतीलाल सैनी आज भी रोजाना 4 से 5 किलोमीटर पैदल चलते हैं और खेतों में काम करते हैं। वे अपनी लंबी उम्र का राज देसी खानपान, भीगे चने, भरपूर घी-दूध और नशे से दूरी को मानते हैं।

राजस्थान के करौली जिले के रहने वाले मोतीलाल सैनी इन दिनों अपनी असाधारण फुर्ती और सक्रिय दिनचर्या को लेकर चर्चा का विषय बने हुए हैं। 106 वर्ष की उम्र में भी वे ऐसी ऊर्जा के साथ जीवन जी रहे हैं, जो कई युवाओं में भी मुश्किल से देखने को मिलती है। उनकी जीवनशैली आज लोगों के लिए हैरानी और प्रेरणा दोनों का कारण बन चुकी है।

इस उम्र में भी पूरी तरह सक्रिय

मोतीलाल आज भी हर दिन 4 से 5 किलोमीटर तक पैदल चलते हैं। वे खेतों में जाकर काम करते हैं और अपने ज्यादातर रोजमर्रा के काम खुद ही निपटाते हैं। इस उम्र में किसी पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भर बने रहना ही उनकी पहचान बन गया है।

लंबी उम्र का राज देसी खानपान

मोतीलाल अपनी इतनी लंबी उम्र का श्रेय बचपन से मिले पौष्टिक और देसी भोजन को देते हैं। उनके आहार में भरपूर मात्रा में घी और दूध रहा है, साथ ही वे भीगे हुए चने नियमित रूप से खाते आए हैं। उनके अनुसार प्राकृतिक और शुद्ध भोजन ने उनके शरीर को मजबूत बनाए रखा है।

मेहनत और नशे से दूरी

नियमित शारीरिक श्रम को वे अपने स्वस्थ जीवन का अहम हिस्सा मानते हैं। इसके साथ ही वे जीवनभर हर तरह के नशे से पूरी तरह दूर रहे हैं। उनका कहना है कि अनुशासित दिनचर्या, प्राकृतिक भोजन और लगातार सक्रिय बने रहना ही स्वस्थ और लंबे जीवन का सबसे बड़ा रहस्य है।

युवाओं के लिए मिसाल

मोतीलाल सैनी का जीवन इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि सादगी भरा खानपान और मेहनत भरी दिनचर्या किस तरह सेहत को सालों तक बनाए रख सकती है। उनकी यह प्रेरणादायक जीवनशैली आज नई पीढ़ी के लिए एक बड़ी सीख बन गई है।

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