PoK में पाकिस्तानी सेना का कहर जारी, 109 लोगों की मौत और लाशों के साथ बर्बरता का खौफनाक दौर

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पिछले 50 दिनों से जारी जनआंदोलन को कुचलने के लिए सेना ने हदें पार कर दी हैं। अब तक 109 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सैनिक मृतकों के शवों का भी अनादर कर रहे हैं।

PoK बना मौत का अखाड़ा

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में पिछले 50 दिनों से जारी जनआंदोलन ने अब एक अत्यंत भीषण और हिंसक रूप ले लिया है। पाकिस्तानी सेना की बर्बरता इस कदर बढ़ गई है कि रावलाकोट, मीरपुर और मुजफ्फराबाद जैसे इलाकों में हालात किसी युद्ध क्षेत्र से भी बदतर हो गए हैं। आधिकारिक और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों की अंधाधुंध गोलीबारी में मरने वालों की संख्या अब 109 के आंकड़े को पार कर गई है। इस नरसंहार के बीच मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटनाएं सामने आ रही हैं, जहां स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सैनिक हैवानियत पर उतारू हो गए हैं।

जल्लादों के निशाने पर मासूमों की लाशें

चश्मदीदों और पीड़ित परिवारों ने अत्यंत गंभीर आरोप लगाए हैं कि पाकिस्तानी सैनिक केवल जीवित लोगों की जान ही नहीं ले रहे, बल्कि मरने के बाद भी शवों के साथ अमानवीय व्यवहार कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इन सैनिकों ने मानवाधिकारों की सारी मर्यादाएं लांघ दी हैं। PoK की गलियों में बिखरा हुआ खून इस बर्बरता की गवाही दे रहा है। लोगों का कहना है कि जिन्हें इन नागरिकों की रक्षा करनी चाहिए थी, वे ही अब उनके लिए काल बन गए हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पाकिस्तानी सेना का मुख्य उद्देश्य लोगों के मन में ऐसा खौफ पैदा करना है कि वे अपने हक के लिए आवाज उठाना ही बंद कर दें।

अंतिम संस्कार के अधिकार से भी वंचित

सबसे भयावह स्थिति यह है कि अपनों को खोने वाले परिवारों को मातम मनाने या उनका अंतिम संस्कार करने का हक तक नहीं दिया जा रहा है। PoK से आ रही तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सुरक्षा बल पहले लोगों को मौत के घाट उतारते हैं और फिर उनके शवों को परिवारों से छीन लेते हैं। कई मामलों में तो रिश्तेदारों की सहमति के बिना ही, रात के अंधेरे का फायदा उठाकर शवों को मनमाने ढंग से दफनाया जा रहा है। पीड़ित परिवारों का दावा है कि उनके अपनों के शवों को जानवरों की तरह घसीटकर सेना की गाड़ियों में लादा गया। एक पिता अपने मृत बेटे का अंतिम चेहरा देखने को तरस रहा है, तो कोई मां अपने बच्चे की विदाई की रस्में भी पूरी नहीं कर पा रही है।

आसिम मुनीर के इशारे पर दमन

PoK में जारी इस संघर्ष की जड़ें वहां के लोगों की बुनियादी मांगों में छिपी हैं। स्थानीय जनता लंबे समय से बिजली और पानी पर सब्सिडी, बढ़ती महंगाई और अपने ही प्राकृतिक संसाधनों पर मालिकाना हक की मांग कर रही थी। लेकिन इस्लामाबाद की सरकार और रावलपिंडी में बैठे आसिम मुनीर को अपने नागरिकों की ये शांतिपूर्ण और जायज मांगें भी बगावत के रूप में दिखाई दीं। आंदोलन की शुरुआत में लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किए थे, लेकिन जब यह जनआंदोलन आठ हफ्तों तक खिंच गया, तो पाकिस्तानी प्रशासन ने इसे दबाने के लिए ताकत का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

रावलाकोट और मीरपुर में अघोषित कर्फ्यू

पिछले तीन दिनों से रावलाकोट और मीरपुर में स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर है। पाकिस्तानी सेना ने पूरे इलाके की कड़ी नाकेबंदी कर रखी है। बाहरी दुनिया तक कोई भी सूचना न पहुंचे, इसके लिए इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह ठप्प कर दिया गया है। इसके बावजूद, कुछ स्थानीय लोग छिपकर इस बर्बरता के वीडियो रिकॉर्ड करने और उन्हें बाहर भेजने का जोखिम उठा रहे हैं। रिकॉर्ड किए गए वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान बताते हैं कि निहत्थे लोग केवल अपने अधिकारों के लिए नारे लगा रहे थे, लेकिन पुलिस और पैरामिलिट्री बलों ने बिना किसी चेतावनी के सीधे उनके सिर और सीने को निशाना बनाकर गोलियां चलाईं। कई इलाकों में सुरक्षा बलों ने घरों में घुसकर तोड़फोड़ की और युवाओं को जबरन उठा लिया। जो कोई भी इस अत्याचार का विरोध करने सामने आया, उसे तुरंत गोली मार दी गई। आज स्थिति यह है कि PoK का आम नागरिक अपने ही घर में सुरक्षित नहीं बचा है और कफन तक नसीब होना मुश्किल हो गया है।

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