चीन से ईरान को मिलने वाली हैं घातक मिसाइलें, अमेरिका ने चीन और पाकिस्तान को घेरा

चीन द्वारा ईरान को एयर डिफेंस मिसाइलें देने की खबरों के बाद वैश्विक राजनीति में तनाव बढ़ गया है, जिसके जवाब में अमेरिका ने चीनी कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं और पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।

चीन और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य साझेदारी पर अमेरिका का कड़ा रुख

दुनियाभर में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चीन की ओर से ईरान को 300 से 400 की संख्या में MANPADS यानी कंधे पर रखकर दागी जाने वाली एयर डिफेंस मिसाइलें दी जा सकती हैं। यह खबर उस समय सामने आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि मई माह में बीजिंग यात्रा के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से आश्वासन दिया था कि चीन ईरान को किसी भी प्रकार के हथियार की आपूर्ति नहीं करेगा। इस घटनाक्रम ने अमेरिका और चीन के बीच एक नया और गंभीर विवाद पैदा कर दिया है।

प्रतिबंधों के घेरे में चीन और हॉन्ग कॉन्ग की कंपनियां

जैसे ही ईरान को मिसाइलें मिलने की खबरें सार्वजनिक हुईं, अमेरिका ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए चीन और हॉन्ग कॉन्ग की 8 शिपिंग कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया। अमेरिकी विदेश विभाग ने इन कंपनियों पर आरोप लगाया है कि ये 'शैडो फ्लीट' का हिस्सा बनकर ईरान के कच्चे तेल को चीन और संयुक्त अरब अमीरात तक पहुंचाने का काम कर रही थीं। अमेरिका के अनुसार, इन प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य ईरान की आर्थिक स्थिति पर दबाव बनाना है ताकि उसकी नौसैनिक नाकेबंदी को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी और भरोसे का संकट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे मामले पर अपनी गहरी निराशा व्यक्त की है। उनका स्पष्ट मानना है कि शी जिनपिंग ने उनसे वादा किया था कि चीन ईरान को सैन्य सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया में शामिल नहीं होगा। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने शी जिनपिंग के इस आश्वासन पर भरोसा किया था, लेकिन यदि ये मिसाइलें ईरान तक पहुंचती हैं, तो यह सीधे तौर पर किए गए वादे का उल्लंघन होगा। रक्षा क्षेत्र में इस सौदे की कुल कीमत 6 से 7 करोड़ डॉलर के बीच आंकी गई है, जो इसे एक महत्वपूर्ण सैन्य सौदा बनाती है।

पाकिस्तान का नाम आने से मचा हड़कंप

इस पूरे मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि मिसाइलों की खेप को ईरान तक पहुंचाने के लिए पाकिस्तान के रास्ते का उपयोग करने की योजना सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती चरण में मिसाइलों को चीन के उरुमची से पाकिस्तान के जरिए ईरान भेजने की रणनीति बनाई गई थी। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस परिवहन के लिए सड़क मार्ग का उपयोग किया जाना था या हवाई रास्ते का। पाकिस्तान की सेना की मीडिया शाखा ISPR ने इस दावे को पूरी तरह से नकार दिया है। ISPR ने इन आरोपों को 'मनगढ़ंत और झूठा' करार देते हुए कहा है कि पाकिस्तान इस तरह की किसी भी हथियार आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा नहीं है।

क्या है इन मिसाइलों की ताकत?

जानकारी के अनुसार, ईरान को मिलने वाली इन खेपों में चीन की प्रसिद्ध QW-12 और FN-16 एयर डिफेंस प्रणालियां शामिल हो सकती हैं। ये दोनों ही मिसाइलें इन्फ्रारेड तकनीक पर आधारित हैं और इन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना अत्यंत सरल है। रक्षा जानकारों का कहना है कि ये मिसाइलें विशेष रूप से कम ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले ड्रोन, हेलीकॉप्टर और लड़ाकू विमानों को निशाना बनाने के लिए बनाई गई हैं। भले ही QW-12 मिसाइलें चीन के आधुनिकतम सिस्टम जैसे QW-18 या QW-19 जितनी उन्नत न हों, लेकिन ड्रोन हमलों के खिलाफ इनकी प्रभावशीलता को नकारा नहीं जा सकता है। इनकी सबसे बड़ी विशेषता इनकी गतिशीलता है, जिसके कारण छोटी टीमें इन्हें कहीं भी तैनात कर सकती हैं और दुश्मन के लिए इन्हें ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

https://hindi.news18.com/world/china-china-manpads-missile-deal-with-iran-pakistan-route-us-sanctions-xi-jinping-donald-trump-relations-10702051.html