शहडोल: बंगवार भूमिगत कोयला खदान में छत धंसी, 2 मजदूरों की मौत, 6 से ज्यादा घायल

शहडोल के सोहागपुर एरिया स्थित बंगवार भूमिगत कोयला खदान में छत धंसने से दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई और छह से अधिक श्रमिक घायल हो गए। बिना सुरक्षा उपकरणों के काम कराने और पुलिस को देरी से सूचना देने के आरोप लगे हैं।

शहडोल जिले के सोहागपुर एरिया में स्थित बंगवार भूमिगत कोयला खदान में बड़ा हादसा हो गया। खदान की छत अचानक धंस जाने से दो मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, वहीं छह से अधिक श्रमिक घायल हुए हैं। घायलों में से चार मजदूरों की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है और उन्हें शहडोल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

कैसे हुआ हादसा

यह हादसा दूसरी पाली के दौरान दोपहर करीब साढ़े तीन बजे हुआ। उस वक्त खदान के भीतर मजदूर ‘स्टापिंग वॉल’ बनाने का काम कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अचानक छत की कमजोर मिट्टी और चट्टानी हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा। वहां काम कर रहे श्रमिकों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और कई लोग सीधे मलबे की चपेट में आ गए। खदान में मौजूद अन्य कर्मचारियों ने तुरंत अधिकारियों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद बचाव अभियान शुरू किया गया।

प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप

हादसे की सूचना के बाद सोहागपुर एरिया की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची, हालांकि आरोप है कि टीम काफी देर से पहुंची। रेस्क्यू टीम ने मलबे से छह मजदूरों को बाहर निकाला और शाम करीब पांच बजे तक चार घायल श्रमिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया।

इस घटना में प्रबंधन की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। यह खदान धनपुरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आती है, फिर भी हादसे के एक घंटे बाद तक स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना नहीं दी गई। स्थानीय कोल माइंस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लग रहा है कि वे श्रमिकों से बिना किसी सुरक्षा उपकरण के जानलेवा काम करा रहे थे और इसी लापरवाही के चलते दो मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

चार मजदूर रेफर

घायलों को तत्काल एंबुलेंस के जरिए केंद्रीय चिकित्सालय बुढ़ार और जिला अस्पताल शहडोल भेजा गया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, मजदूरों के सिर, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। कुछ घायलों की हालत स्थिर है, जबकि गंभीर रूप से घायल चार मजदूरों को बुढ़ार से निजी अस्पताल रेफर किया गया है।

छत गिरने की जांच शुरू

हादसे के बाद खदान प्रबंधन ने प्रभावित क्षेत्र को सील कर दिया है। अधिकारियों ने छत धंसने के कारणों की तकनीकी जांच आरंभ कर दी है। शुरुआती तौर पर माना जा रहा है कि निर्माण के दौरान ऊपरी परत कमजोर हो जाने से यह हादसा हुआ। फिलहाल खदान की सुरक्षा व्यवस्था, वेंटिलेशन सिस्टम और संरचनात्मक स्थिति की जांच की जा रही है। प्रशासन और SECL प्रबंधन ने मामले की विस्तृत जांच के बाद कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है।

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