वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व में सनसनी
बिहार के पश्चिमी चंपारण स्थित वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। गुरुवार की दोपहर को वन क्षेत्र में एक 65 वर्षीय बुजुर्ग पर बाघ के हमले की खबर ने इलाके में दहशत फैला दी थी, लेकिन मामले ने तब और भी गंभीर मोड़ ले लिया जब वन कर्मियों को घटनास्थल के समीप ही बाघ का शव बरामद हुआ। यह घटना वाल्मीकिनगर रेंज के वन कक्ष संख्या T-36 के अंतर्गत हाथी मलखनता के पास हुई है।
बुजुर्ग पर हमला और बाघ की खोज
बताया जा रहा है कि बिसाहा गांव के निवासी अकलू यादव गुरुवार को अपने मवेशी चराने के लिए जंगल की तरफ गए थे। इसी दौरान एक बाघ ने उन पर अचानक हमला कर दिया। स्थानीय निवासियों ने तत्परता दिखाते हुए घायल बुजुर्ग को अस्पताल पहुँचाया। इस घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम हरकत में आ गई और बाघ को जंगल की गहराई में खदेड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। इसी खोजबीन के दौरान वन कर्मियों की नजर झाड़ियों में पड़े एक मृत बाघ पर पड़ी, जिसे देखकर पूरी टीम स्तब्ध रह गई।
बीमारी या उम्र का असर
वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व के निदेशक सह वन संरक्षक गौरव ओझा के अनुसार, प्राथमिक तौर पर बाघ का शरीर बेहद कमजोर दिखाई दे रहा है, जो उम्रदराज होने का संकेत है। उन्होंने संभावना जताई है कि भूख और किसी पुरानी बीमारी के चलते बाघ की जान गई होगी। हालांकि, मौत की असली वजह अभी भी एक रहस्य बनी हुई है। फिलहाल विभाग ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा विशेष वैज्ञानिक जांच के नतीजे आने का इंतजार किया जा रहा है, जिससे स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी।
शरीर पर मिले पुराने निशान
बाघ के शव की शुरुआती जांच में उसके शरीर पर कई पुराने घावों के निशान पाए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह बाघ नेपाल के चितवन क्षेत्र से भटककर भारतीय सीमा में प्रवेश कर गया हो सकता है। चूंकि, इस विशेष इलाके में इस बाघ की मौजूदगी के कोई नियमित प्रमाण पहले नहीं मिले थे, इसलिए अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी। विभाग इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि क्या यह वही बाघ है जिसने बुजुर्ग पर हमला किया था, या फिर किसी अन्य कारण से वह उस स्थान पर मृत मिला।
विसरा रिपोर्ट से खुलेगा राज
वन विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि बाघ के शव को कोतराहा वन परिसर स्थित कौशल विकास केंद्र ले जाया गया है। वहां पशु चिकित्सक डॉ. संजीव रंजन की निगरानी में शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा। बाघ के विसरा के नमूनों को आगे की विस्तृत जांच के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून और भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली भेजा जाएगा। इन संस्थानों से रिपोर्ट आने के बाद ही वैज्ञानिक पुष्टि होगी कि बाघ की मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई है या कोई अन्य साजिश शामिल है। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुसार मृत बाघ का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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