PoK में हुई हिंसा पर राजनीतिक प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुए हिंसक बल प्रयोग और वहां आम नागरिकों की दुखद मौतों ने जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। घाटी के कई प्रमुख राजनेताओं और पार्टियों ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती समेत कई अन्य नेताओं ने साफ शब्दों में कहा है कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे लोगों पर जानलेवा बल का उपयोग करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, PoK में जारी इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में 30 लोगों की जान जा चुकी है।
महबूबा मुफ्ती ने की बातचीत की अपील
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने PoK के मौजूदा हालात पर गहरा दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि सीमा के उस पार से जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे दिल को दहला देने वाली हैं। मुफ्ती ने इस पर अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले नागरिकों के खिलाफ इस तरह की बर्बरता अत्यंत दुखद है। उन्होंने पाकिस्तान सरकार से अपील की है कि वे बल प्रयोग करने के बजाय अधिक मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं और बातचीत के जरिए समाधान निकालने का रास्ता चुनें।
केंद्र की चुप्पी पर फारूक अब्दुल्ला ने उठाए सवाल
नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने PoK में मारे गए नागरिकों के मुद्दे पर केंद्र सरकार की कथित चुप्पी को लेकर तीखी आलोचना की है। उन्होंने इस बात पर आश्चर्य जताया कि PoK में आम लोगों की जान जाने के बावजूद केंद्र सरकार इस पर पूरी तरह से चुप क्यों है। फारूक अब्दुल्ला ने इस गंभीर मामले पर जल्द से जल्द केंद्र सरकार से रुख स्पष्ट करने और इस पर बात करने की अपील की है।
उमर अब्दुल्ला की चिंता और पाक सरकार को नसीहत
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस घटनाक्रम पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने PoK में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किए गए बल प्रयोग को बेहद चिंताजनक करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बेगुनाह नागरिकों को निशाना बनाना तुरंत प्रभाव से बंद होना चाहिए। उमर अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि हालात जल्द सामान्य होंगे और इलाके में शांति की बहाली होगी।
न्याय और शांतिपूर्ण विरोध का समर्थन
जम्मू-कश्मीर की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं का सामूहिक रूप से मानना है कि PoK के निवासी भी सम्मान, न्याय और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के हकदार हैं। सभी नेताओं ने एक स्वर में मांग की है कि पाकिस्तान सरकार दमनकारी नीतियों का सहारा लेकर लोगों की आवाज को दबाने की कोशिश न करे। इसके बजाय, पाकिस्तान को अपने नागरिकों की वाजिब शिकायतों को सुनना चाहिए और उनका समाधान निकालने का प्रयास करना चाहिए। इन नेताओं का जोर इस बात पर है कि हिंसा का रास्ता चुनना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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