ऑपरेशन म्यूल हंटर: अजमेर में 70 बैंक खातों के जरिए करोड़ों की साइबर ठगी का भंडाफोड़, 7 गिरफ्तार

अजमेर पुलिस ने एक बड़े साइबर अपराधी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनके तार कंबोडिया और थाईलैंड तक फैले हुए हैं। यह गिरोह पिछले कुछ वर्षों से संदिग्ध बैंक खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दे रहा था।

साइबर जालसाजों पर अजमेर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

अजमेर पुलिस ने साइबर अपराधियों के एक बड़े नेटवर्क का खात्मा करने के लिए चलाए गए विशेष अभियान ऑपरेशन म्यूल हंटर के तहत बड़ी सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई में गिरोह के सरगना समेत कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि इन लोगों ने पिछले दो से तीन वर्षों में करीब 70 संदिग्ध बैंक खाते खुलवाए थे, जिनका उपयोग साइबर ठगी की अवैध रकम के लेन-देन के लिए किया जाता था। बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से साफ है कि यह गिरोह काफी समय से सक्रिय था और लोगों को आर्थिक लालच देकर ठगी का जरिया बना रहा था।

छापेमारी में जब्त सामग्री और गिरफ्तारी

पुलिस की इस संयुक्त कार्रवाई में आरोपियों के पास से आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है। इसमें आठ एटीएम कार्ड, आठ मोबाइल फोन और सिम कार्ड, दो बैंक पासबुक, दो खाली चेकबुक के साथ आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। यह कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक अजमेर रेंज डॉ. रवि (आईपीएस) और पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला (आईपीएस) के कड़े निर्देशों के बाद अंजाम दी गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु जांगिड़ और पुलिस उप अधीक्षक मनीष बड़गुर्जर की निगरानी में रामगंज थाना प्रभारी हरिपाल सिंह की टीम ने इस गिरोह को पकड़ा।

कैसे चलता था ठगी का पूरा खेल

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि 28 जुलाई 2026 को रेलवे अस्पताल के पास हजारी बाग रोड इलाके से इन सात संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया गया था। पूछताछ में इनकी पहचान प्रवीण भाटी, ध्रुव सुखारिया, शबरे आलम, मनीष, प्रिन्स यादव, राजेन्द्र और सुनील कुमार के रूप में हुई। गिरोह का सरगना शबरे आलम आम लोगों को 10 से 25 हजार रुपये का प्रलोभन देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। खाता खुलने के तुरंत बाद वह पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड अपने कब्जे में ले लेता था। गिरोह में शामिल प्रवीण भाटी बीटेक डिग्रीधारी है, जिसने बैंकिंग नियमों की जानकारी का गलत इस्तेमाल कर इन खातों का संचालन करने में मदद की।

कंबोडिया और थाईलैंड से जुड़ते हैं तार

इस साइबर ठगी के तार केवल भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैले हुए हैं। आरोपी टेलीग्राम ऐप के जरिए विदेशों में बैठे साइबर अपराधियों के साथ संपर्क में रहते थे। ठगी की गई रकम को एटीएम के माध्यम से निकालकर उसका एक निश्चित हिस्सा कमीशन के रूप में अपने पास रखा जाता था। बाकी बची हुई मोटी रकम को गिरोह के अन्य सदस्य लोकेश और माही उर्फ महावीर को सौंपा जाता था। इसके बाद इस राशि को USDT यानी क्रिप्टोकरेंसी के रूप में बदलकर कंबोडिया और थाईलैंड में बैठे मुख्य संचालकों तक पहुंचा दिया जाता था।

आगे की जांच और पोर्टल पर शिकायतें

पुलिस को अब तक नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर इन खातों से जुड़ी कई शिकायतों की पुष्टि हुई है। आरोपियों के बैंक खातों की गहन जांच में लाखों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। फिलहाल पुलिस सभी गिरफ्तार व्यक्तियों से उनके नेटवर्क के अन्य सहयोगियों और वित्तीय संबंधों के बारे में विस्तार से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में आगे और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं, जिससे अन्य ठगी के मामलों की परतें भी खुल सकती हैं।

https://hindi.news18.com/news/rajasthan/ajmer-cyber-fraud-worth-crores-involving-70-bank-accounts-opened-in-ajmer-10703474.html