गाजीपुर में सपा पर जमकर बरसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ: बोले- 'जब खुलेगा पापों का कच्चा चिट्ठा, तो कहीं मुंह दिखाने के लायक नहीं बचेंगे ये लोग'

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजीपुर में 692 करोड़ रुपये की 268 जन-कल्याणकारी परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और कहा कि विपक्षी दलों ने गाजीपुर के सामने पहचान का संकट खड़ा किया था।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाले गाजीपुर जिले में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने गाजीपुर दौरे के दौरान न केवल जिले के विकास के लिए बड़ी सौगातों की झड़ी लगा दी, बल्कि उन्होंने मंच से विपक्षी दलों पर अब तक का सबसे तीखा हमला भी बोला। मुख्यमंत्री ने यहाँ कुल 692 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार होने वाली और हो चुकी कुल 268 जन-कल्याणकारी परियोजनाओं का भव्य उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस बड़े कार्यक्रम में उमड़े जनसमूह को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पार्टी को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि इन दोनों राजनीतिक दलों ने अपने निहित स्वार्थों के कारण गाजीपुर जैसी पावन और वीर भूमि के सामने एक बहुत बड़ा पहचान का संकट खड़ा कर दिया था।

गाजीपुर की महान विरासत और गुमनामी के अंधेरे का कारण

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजीपुर के उस गौरवशाली इतिहास को बड़ी शिद्दत से याद किया जिसे समय के साथ राजनीतिक उपेक्षा के चलते भुला दिया गया था। उन्होंने जनता के सामने यह यक्ष प्रश्न उठाया कि आखिर क्यों इस पावन भूमि को गुमनामी के अंधेरे में धकेल दिया गया? सीएम योगी ने देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर शहीदों और साहित्य जगत के दिग्गजों का जिक्र करते हुए कहा कि हमें इतिहास के पन्नों को पलटना होगा। उन्होंने याद दिलाया कि साल 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अदम्य साहस और शौर्य का परिचय देने वाले वीर सपूत शहीद राम उग्र पांडे इसी पावन धरती के लाल थे। देश के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान और अद्वितीय पराक्रम को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत भारतीय सेना के अत्यंत प्रतिष्ठित और दूसरे सबसे बड़े सम्मान महावीर चक्र से विभूषित किया था।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में गाजीपुर के अद्वितीय योगदान की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य जगत के बेहद सम्मानित और प्रतिष्ठित ललित निबंधकार एवं महान विद्वान श्री कुबेरनाथ राय भी इसी मिट्टी की देन थे। उनके साथ ही उन्होंने गोपाल राय और गोपालराम गहमरी का स्मरण कराया, जिन्होंने अपने जीवनकाल में 200 से अधिक उपन्यासों की रचना करके हिंदी साहित्य को समृद्ध किया था। सीएम योगी ने भावुक होते हुए पूछा कि इतनी महान और दिव्य विभूतियों को जन्म देने वाला हमारा यह गाजीपुर जनपद आखिर क्यों दशकों तक गुमनाम होता चला गया? क्यों इस पावन धरती का नाम देश के नक्शे पर डूब गया था? एक समय ऐसा आ गया था जब लोग गाजीपुर का नाम सुनने मात्र से ही कांप उठते थे और यहाँ आने से कतराते थे। इस गौरवशाली भूमि के सामने पहचान का यह गहरा संकट किसने खड़ा किया? उन्होंने इसका जवाब खुद देते हुए कहा कि पहचान का यह संकट खड़ा करने वाले वही लोग हैं, जिन्होंने सत्ता में रहते हुए गाजीपुर के विकास के लिए तो कुछ नहीं किया, लेकिन इस जनपद के माथे पर बदनामी का कलंक जरूर लगा दिया।

विदेशी आक्रांताओं के महिमामंडन बनाम राष्ट्रनायकों का सम्मान

विपक्ष पर अपने प्रहार को और तेज करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और इतिहास के विकृतीकरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इन दलों का चरित्र हमेशा से राष्ट्रनायकों का अपमान करने और विदेशी आक्रांताओं को महिमामंडित करने का रहा है। उन्होंने कहा कि ये वही लोग हैं जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योषावर करने वाले वास्तविक नायकों को कभी वह सम्मान नहीं दिया जिसके वे हकदार थे, बल्कि इसके विपरीत उन्होंने भारत पर हमला करने वाले बाहरी आक्रांताओं की तारीफों के पुल बांधे।

मुख्यमंत्री ने इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि आज से लगभग 1000 वर्ष पहले भारत की पावन भूमि को रौंदने और यहाँ की संस्कृति को नष्ट करने के इरादे से विदेशी आक्रांता सालार मसूद आया था। लेकिन भारत माता के एक सच्चे सपूत और महान राष्ट्रीय नायक महाराज सुहेल देव ने बहराइच के चित्तौड़ा नामक ऐतिहासिक स्थान पर उसे धूल चटाई थी और उसे ऐसी कड़ी सजा दी थी जिसे इतिहास कभी नहीं भूल सकता। महाराज सुहेल देव के उस अदम्य पराक्रम के कारण यह देश लंबे समय तक बर्बर आक्रांताओं के अत्याचारों से सुरक्षित रहा था।

सीएम योगी ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने कभी भी महाराज सुहेल देव के सम्मान में कोई भी कार्यक्रम आयोजित नहीं होने दिया। इन दलों ने देश के रक्षक के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के बजाय हमेशा उनका अनादर किया। इसके विपरीत, ये लोग आक्रांता सालार मसूद गाजी की याद में बड़े-बड़े मेलों का आयोजन करवाते थे। हमारी सरकार ने सत्ता में आते ही इस तुष्टीकरण की राजनीति को पूरी तरह से समाप्त कर दिया। हमने स्पष्ट कर दिया कि इस पावन भूमि पर किसी आक्रांता सालार मसूद का मेला नहीं लगेगा, बल्कि अगर मेला लगेगा तो वह राष्ट्रनायक महाराज सुहेल देव की पवित्र स्मृति में लगेगा। आज बहराइच के उस ऐतिहासिक स्थल पर महाराज सुहेल देव की एक भव्य और विशाल प्रतिमा स्थापित की जा चुकी है और वहाँ एक बेहद सुंदर स्मारक का निर्माण किया गया है। अब वहाँ हर साल भव्य मेला लगता है जहाँ देश के कोने-कोने से नौजवान जाते हैं और राष्ट्रनायक को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इतना ही नहीं, हमारी सरकार ने महाराज सुहेल देव के सम्मान में बहराइच में एक अत्याधुनिक चिकित्सा महाविद्यालय का निर्माण कराया है और आजमगढ़ में उनके नाम पर एक भव्य विश्वविद्यालय की स्थापना भी की है।

महापुरुषों के अपमान और नाम बदलने की राजनीति पर तीखा प्रहार

अपने भाषण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दौरान महापुरुषों के नाम पर बनी संस्थाओं के नाम बदलने के फैसलों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती समाजवादी सरकार ने केवल UP की जनता को लूटा ही नहीं, बल्कि देश के महानतम महापुरुषों को भी अपमानित करने का महापाप किया है।

मुख्यमंत्री ने कई उदाहरण देते हुए कहा कि संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के नाम पर बने चिकित्सा महाविद्यालय का नाम समाजवादी पार्टी की सरकार ने सत्ता में आते ही बदल दिया था। इसी तरह कन्नौज के चिकित्सा महाविद्यालय का नाम भी उन्होंने राजनीतिक दुर्भावना के चलते बदल दिया। उन्होंने आगे कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर, जिन्होंने इस देश के अंदर बेहतरीन सुशासन की स्थापना की और भारत के सांस्कृतिक मान-बिंदुओं को पुनः प्रतिष्ठित करने का एक अत्यंत सराहनीय और ऐतिहासिक कार्य किया था, उनके नाम पर बने कॉलेज का नाम भी समाजवादी पार्टी ने बदलने का काम किया था।

इसके साथ ही उन्होंने संत शिरोमणि सद्गुरु रविदास जी महाराज का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी महाराज के नाम पर जिस भदोही जनपद का नामकरण किया गया था, उस जिले का नाम बदलने का घोर पाप भी समाजवादी पार्टी ने ही किया था। सीएम योगी ने कहा कि यह सारे पाप समाजवादी पार्टी के खाते में दर्ज हैं। इन्होंने केवल उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से ही नहीं लूटा, बल्कि इस प्रदेश के गौरवशाली इतिहास और इसके महापुरुषों की पहचान को भी मिटाने की हरसंभव कोशिश की थी।

बदलता उत्तर प्रदेश: पहचान के संकट से मुक्ति और विकास का नया दौर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले एक दशक में उत्तर प्रदेश में आए व्यापक बदलावों को प्रमुखता से रेखांकित किया। उन्होंने अतीत के दिनों को याद करते हुए कहा कि आज से करीब 10 वर्ष पहले की स्थिति बेहद खराब थी। अगर आप गाजीपुर या उत्तर प्रदेश के किसी अन्य जिले से बाहर देश के किसी दूसरे हिस्से में जाते थे, तो वहाँ लोग उत्तर प्रदेश या गाजीपुर का नाम सुनते ही आपसे दूरी बना लेते थे। भले ही कोई आपको कितना भी सम्मान देना चाहता हो, लेकिन जैसे ही उसे पता चलता था कि आप गाजीपुर से आए हैं, वह तुरंत 10 कदम पीछे हट जाता था। उस दौर में उत्तर प्रदेश के लोगों को देश के बड़े शहरों के होटलों में कमरे नहीं मिलते थे, धर्मशालाओं में कोई टिकने नहीं देता था और यहाँ तक कि कोई किराए पर मकान देने के लिए भी तैयार नहीं होता था।

लेकिन आज समय पूरी तरह से बदल चुका है। अब UP के नागरिकों के सामने किसी भी प्रकार की पहचान का कोई संकट नहीं है। आज यदि आप देश के किसी भी कोने में जाकर गर्व से कहते हैं कि आप गाजीपुर, काशी या उत्तर प्रदेश से आए हैं, तो सामने वाला व्यक्ति आपकी पहचान का सम्मान करते हुए 10 कदम आगे बढ़कर आपसे गले मिलने के लिए उतावला दिखाई देता है। यह बदलाव राज्य की छवि में आए अभूतपूर्व सुधार के कारण ही संभव हो पाया है।

सीएम योगी ने विपक्षी नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों ने राज्य के युवाओं के रोजगार पर खुलेआम डकैती डाली, जिन लोगों ने अन्नदाता किसानों के चेहरों से उनकी खुशहाली को छीनने का काम किया, जिन लोगों ने हमारी माताओं, बहनों और व्यापारियों के सामने सुरक्षा का एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया था, और जिन्होंने विकास कार्यों को अपने गुंडों और कार्यकर्ताओं के हवाले करके उसमें भारी लूट-खसोट मचाने की खुली छूट दे रखी थी, आज वे ही लोग हमें आईना दिखाने का दुस्साहस कर रहे हैं। उन्होंने गरजते हुए कहा कि अगर हमने समाजवादी पार्टी के पुराने पापों के घड़े से पर्दा उठाना शुरू कर दिया, तो ये लोग समाज में किसी भी कोने में अपना मुंह दिखाने के लायक नहीं बचेंगे।

उदाहरण के तौर पर मुख्यमंत्री ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के नाम पर समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान करीब 3000 करोड़ रुपये का भारी घोटाला और वारा-न्यारा किया गया था। जब हमारी सरकार सत्ता में आई, तो मैं यह सब देखकर अत्यंत चकित रह गया था। हमने तुरंत उस भ्रष्ट प्रक्रिया और टेंडर को रद्द किया। इसके बाद हमारी सरकार ने नए सिरे से जमीन का अधिग्रहण किया और पूरी पारदर्शिता के साथ इस शानदार एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा करवाया। पूर्ववर्ती सरकार में युवाओं की सरकारी नौकरियों की नियुक्तियों में भी भारी धांधली होती थी। जब भी कोई नौकरी निकलती थी, तो चाचा-भतीजे की प्रसिद्ध जोड़ी राज्यभर में अवैध वसूली के लिए निकल पड़ती थी और योग्य युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता था। लेकिन आज के UP में ऐसा होना बिल्कुल भी संभव नहीं है।

दंगा मुक्त उत्तर प्रदेश का नया नारा: "नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा"

कानून व्यवस्था के मुद्दे पर अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक समय था जब उत्तर प्रदेश में कोई भी त्योहार या पर्व शुरू होते ही उपद्रव और दंगे भड़क उठते थे। उपद्रव, दंगे और कर्फ्यू ही इस राज्य की मुख्य पहचान बन चुके थे। ऐसी अशांति के माहौल में राज्य में कोई भी उद्यमी निवेश करने को तैयार नहीं होता था जिससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पूरी तरह से समाप्त हो रहे थे।

लेकिन आज मुझे यह बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता और गर्व की अनुभूति हो रही है कि अब उत्तर प्रदेश में कोई कर्फ्यू नहीं लगता और कोई दंगा नहीं होता। आज पूरे प्रदेश में चारों तरफ शांति और उत्सव का माहौल है। आज का नया नारा बेहद स्पष्ट है - "नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा।"

सीएम योगी ने उपद्रवियों और अपराधियों को एक बार फिर बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि हमने पहले ही यह साफ कर दिया था कि जो कोई भी राज्य के शांतिपूर्ण उत्सवों में खलल डालेगा, जो कोई भी हमारी माताओं-बहनों और व्यापारियों की सुरक्षा में सेंध लगाने का प्रयास करेगा या हमारे होनहार युवाओं की नौकरी में भ्रष्टाचार करने की कोशिश करेगा, उसके लिए केवल दो ही जगहें तय होंगी - या तो वह जेल की सलाखों के पीछे सड़ेगा या फिर सीधा जहन्नुम जाएगा, इसके अलावा उसके लिए तीसरी कोई भी जगह इस धरती पर नहीं होगी।

उन्होंने जनता से अपील की कि वे उन लोगों को कभी भी सत्ता में आने का मौका न दें जिन्होंने हमेशा युवाओं के हक पर डकैती डाली, किसानों को खुदकुशी करने पर मजबूर किया और गरीबों के मुंह का राशन भी छीनकर खा गए। ये लोग पूरी तरह से गरीब विरोधी, किसान विरोधी और युवा विरोधी हैं। महिलाओं के प्रति तो इनका दृष्टिकोण और भी ज्यादा खतरनाक और अपमानजनक रहा है। पूर्ववर्ती शासनकाल में महिलाओं की सुरक्षा की बदतर स्थिति को बयां करते हुए एक प्रसिद्ध कहावत बन गई थी कि "देख सपाई, बिटिया घबराई।" ऐसे असामाजिक तत्वों से गाजीपुर की जनता को और विशेष रूप से महिलाओं को हमेशा सतर्क रहने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री जी ने स्पष्ट किया है कि हमारे लिए देश में केवल चार प्रमुख जातियां हैं - गरीब, अन्नदाता किसान, महिलाएं और युवा। इन चार जातियों के उत्थान के बिना देश की प्रगति की कल्पना नहीं की जा सकती। इसके विपरीत, विपक्ष के लोग समाज को बांटने और माफियाओं की कब्र पर जाकर फातिया पढ़ने का काम करते हैं।

ऋषि-मुनियों की पावन भूमि और माफिया राज का समूल नाश

मुख्यमंत्री ने गाजीपुर के धार्मिक और पौराणिक महत्व को याद करते हुए कहा कि यह जनपद भगवान परशुराम और महर्षि जमदग्नि जैसे महान तपस्वियों और ऋषियों का एक अत्यंत पवित्र केंद्र रहा है। ऐसी पावन और धार्मिक भूमि पर माफियाओं और अपराधियों का पनपना बेहद शर्मनाक था और यह इस धरती को बिल्कुल भी शोभा नहीं देता था। उन्होंने कहा कि तात्कालिक लाभ के लिए कुछ लोगों ने माफियाओं को बढ़ावा दिया होगा, लेकिन यह एक बेहद खतरनाक प्रवृत्ति थी। माफिया कभी भी समाज या किसी व्यक्ति के सगे नहीं होते हैं। वे केवल आम जनता का खून चूसते हैं, गरीबों का शोषण करते हैं, व्यापारियों के मन में खौफ पैदा करते हैं और हमारी बेटियों की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बनते हैं।

इसीलिए हमारी सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले ही दिन से अपराध और अपराधियों के साथ-साथ माफियाओं और उनको राजनीतिक संरक्षण देने वाले संरक्षकों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का दृढ़ संकल्प लिया था। मुख्यमंत्री ने दहाड़ते हुए कहा, "जब हमारी सरकार ने कहा थी माफिया को मिट्टी में मिलाएंगे, तो आज आप देख सकते हैं कि वे सभी माफिया वाकई मिट्टी में मिल चुके हैं।" अब राज्य का कोई भी अपराधी किसी रामलीला के मंच पर हथियार लहराने का दुस्साहस नहीं कर सकता, क्योंकि उसे अच्छी तरह मालूम है कि अगर उसने कानून तोड़ा या किसी पवित्र मंच को अपवित्र किया, तो उसे भी मिट्टी में दफन होने के लिए तैयार रहना पड़ेगा।

सीएम योगी ने इतिहास के काले पन्नों को याद करते हुए पूर्व विधायक श्री कृष्णानंद राय का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कृष्णानंद राय इसी गाजीपुर की धरती पर रहकर माफियाओं के आतंक के खिलाफ डटकर लड़े थे। लेकिन तत्कालीन सत्ता के संरक्षण में पल रहे क्रूर माफियाओं ने बेहद निर्ममता और बर्बरता के साथ कृष्णानंद राय समेत सात निर्दोष युवाओं की गोलियों से भूनकर निर्मम हत्या कर दी थी। उस समय पर्याप्त सबूत और गवाह होने के बावजूद सत्ता में बैठे लोग उन खूंखार माफियाओं को खुली छूट और संरक्षण प्रदान करते रहे। लेकिन आज का माहौल अलग है, आज राज्य में किसी भी अपराधी या माफिया को कोई राजनीतिक संरक्षण नहीं मिल सकता और अगर कोई ऐसा करने का दुस्साहस करेगा, तो उसकी दुर्गति होना पूरी तरह से तय है।

अंत में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजीपुर की जनता से एक बेहतरीन और विकसित भविष्य के लिए सही प्रतिनिधियों का चुनाव करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब आप संसद और विधानसभा में अच्छे पैरोकारों, अच्छे सांसदों (MP) और अच्छे विधायकों (MLA) को चुनकर भेजते हैं, तभी विकास की ऐसी बड़ी परियोजनाएं धरातल पर उतर पाती हैं। जहाँ के जनप्रतिनिधि केवल अवैध हथियारों के लाइसेंस बनवाने में व्यस्त रहते हों और जिन्हें विकास कार्यों के लिए फुर्सत ही न हो, वहाँ की जनता का भला केवल भगवान भरोसे ही हो सकता है। आज गाजीपुर को दी जा रही 692 करोड़ रुपये की ये विकास योजनाएं तो केवल एक छोटी सी शुरुआत हैं। आने वाले समय में इससे भी कई गुना बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं इस जनपद के विकास की रफ्तार को और तेज करेंगी, जिससे यह जिला समृद्धि और खुशहाली के पथ पर आगे बढ़ेगा।

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