बिहार की सियासत से एक अहम खबर सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी ने विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची जारी कर दी है। इस फेहरिस्त में सबसे चर्चित और चौंकाने वाला नाम भोजपुरी सिनेमा के पावर स्टार पवन सिंह का है, जिन्हें पार्टी ने पहली बार एमएलसी प्रत्याशी बनाया है।
बीजेपी की इस सूची में कई जाने-पहचाने और चर्चित चेहरे शामिल किए गए हैं। राजपूत समाज से ताल्लुक रखने वाले पवन सिंह को टिकट देकर पार्टी ने एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। माना जा रहा है कि इस फैसले से पूर्वांचल और भोजपुरी बेल्ट में पार्टी की पकड़ और मजबूत हो सकती है।
कब होगा मतदान
बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए 18 जून को वोट डाले जाएंगे। इनमें से 9 सीटों पर नियमित चुनाव होगा, जबकि एक सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा।
बीजेपी के उम्मीदवार कौन-कौन
पवन सिंह के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय मयूख को एक बार फिर मौका दिया गया है। उन्हें लगातार तीसरी बार प्रत्याशी बनाया गया है। कायस्थ समाज से आने वाले संजय मयूख की गिनती पार्टी के अनुभवी नेताओं में होती है, और उनके अनुभव तथा संगठनात्मक भूमिका को देखते हुए पार्टी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया है।
सूची के मुताबिक अनिल ठाकुर और शीला पंडित को भी टिकट दिया गया है। अनिल ठाकुर नाई (अति पिछड़ा वर्ग) समुदाय से आते हैं, जबकि शीला पंडित प्रजापति (कुम्हार) समाज से संबंध रखती हैं। इन दोनों नामों के जरिए पार्टी ने अति पिछड़ा वर्ग को साधने का प्रयास किया है।
किस वर्ग को कितनी हिस्सेदारी
बीजेपी ने इस सूची में दो सवर्ण और दो अति पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को जगह दी है। पार्टी की इस रणनीति को जातीय संतुलन की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी ने सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए सभी प्रमुख वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है।
दिलचस्प यह भी है कि जेडीयू की सूची में जहां एक महिला और कुम्हार समाज से उम्मीदवार शामिल हैं, वहीं बीजेपी ने भी एक महिला और कुम्हार समाज के प्रत्याशी को टिकट दिया है। इसे दोनों दलों की एक जैसी सामाजिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
दीपक प्रकाश दोनों सूचियों से बाहर
उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का नाम जेडीयू और बीजेपी, दोनों ही दलों की उम्मीदवार सूची में नहीं है। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
एनडीए की इस उम्मीदवार सूची से साफ है कि गठबंधन ने जातीय और सामाजिक संतुलन को आधार बनाकर टिकटों का बंटवारा किया है। पवन सिंह जैसे लोकप्रिय चेहरे को मैदान में उतारकर बीजेपी ने इस चुनावी मुकाबले को और रोचक बना दिया है। अब देखना यह होगा कि यह रणनीति आगामी एमएलसी चुनाव में कितना असर दिखा पाती है।
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