झुंझुनूं में रोंगटे खड़े करने वाला प्रदर्शन: 20 लाख का डिब्बा लिखकर क्रेन से लटकाई स्कॉर्पियो, एयरबैग न खुलने पर फूटा गुस्सा

झुंझुनूं में एक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले युवक के परिजनों ने महिंद्रा शोरूम के बाहर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने स्कॉर्पियो को क्रेन से 20 फीट की ऊंचाई पर लटकाकर कंपनी पर सुरक्षा दावों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए।

झुंझुनूं में अनूठा विरोध: मौत के बाद परिजनों का आक्रोश

राजस्थान के झुंझुनूं में बुधवार को एक सड़क दुर्घटना ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। घटना के विरोध में मृतक के परिजनों और दोस्तों ने जो प्रदर्शन किया, वह हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचने वाला था। दुर्घटना का शिकार हुई स्कॉर्पियो गाड़ी को एक क्रेन की मदद से महिंद्रा कंपनी के शोरूम के बाहर करीब 20 फीट की ऊंचाई पर हवा में लटका दिया गया। इस गाड़ी को प्रतीकात्मक रूप से फांसी दी गई थी। गाड़ी पर लाल रंग से बड़े अक्षरों में 20 लाख का डिब्बा, मौत का सामान और खतरा जैसी बातें लिखी गई थीं। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी की कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका साफ कहना है कि उन्हें न तो पैसे का लालच है और न ही नई गाड़ी चाहिए, उन्हें तो केवल इस हादसे का जिम्मेदार कौन है और सुरक्षा में सेंध क्यों लगी, इसका जवाब और न्याय चाहिए।

सीट बेल्ट के बाद भी एयरबैग बने जानलेवा

इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए मृतक के दोस्त धीरज जाट ने बताया कि 21 वर्षीय तरुण नायक रेंटल गाड़ियों के व्यवसाय से जुड़ा था। 20 जुलाई को वह अपने चार अन्य साथियों के साथ सीकर से झुंझुनूं वापस लौट रहा था। तभी डूंडलोद बाइपास पर उनकी स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगे बिजली के खंभे से टकरा गई और पलट गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद तरुण को तुरंत नवलगढ़ के जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। गाड़ी में सवार अन्य लोगों को मामूली चोटें आईं। परिजनों का आरोप है कि तरुण ने सीट बेल्ट पहन रखी थी, फिर भी दुर्घटना के समय सुरक्षा के लिए लगे एयरबैग नहीं खुले, जो उसकी मौत का कारण बने।

मुआवजे से बड़ी है न्याय की मांग

कंपनी की तरफ से बार-बार संपर्क करने के बावजूद जब कोई ठोस जवाब नहीं मिला, तब परिजन गुस्से में आकर दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी को क्रेन पर लादकर गहलोत मोटर्स शोरूम पहुंच गए। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने चिल्लाते हुए कहा कि उन्हें कोई मुआवजा नहीं, बल्कि अपना बेटा, भाई और साथी वापस चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि कंपनी अपनी गाड़ियों को पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा करती है, तो निर्माता खुद अपने परिवार को इन गाड़ियों में बैठाकर सुरक्षा की जांच करें।

आर्थिक तंगी और भविष्य का डर

हवा में लटकी हुई स्कॉर्पियो लोगों के लिए चर्चा का विषय बनी रही। परिजनों ने दुख जताते हुए बताया कि तरुण अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था, जिसकी मौत ने परिवार को गहरे आर्थिक संकट में डाल दिया है। उन्होंने शोरूम के बाहर चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे एजेंसी पर ताला लगाने जैसा उग्र आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने शोरूम के अधिकारियों को बाहर आकर जनता के सामने जवाब देने की चुनौती दी।

शोरूम प्रबंधन का पक्ष

इस पूरे मामले पर गहलोत मोटर्स के मैनेजर रवि शर्मा ने कहा कि युवक की असामयिक मृत्यु अत्यंत दुखद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उक्त स्कॉर्पियो मार्च के अंत में हुई दुर्घटना के बाद मरम्मत के लिए उनके पास आई थी। गाड़ी मूल रूप से चूरू के बीकानेर मोटर्स से खरीदी गई थी। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर कंपनी प्रबंधन के साथ लगातार बातचीत जारी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि बीमा कंपनी के माध्यम से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिलाने की पूरी कोशिश की जा रही है और महिंद्रा कंपनी की ओर से जो भी संभव सहायता हो सकेगी, वह उपलब्ध करवाई जाएगी। इस बीच, राजस्थान के टोंक जिले के मालपुरा से भी एक और दुखद खबर सामने आई है, जहां बारिश के पानी में फैले बिजली के करंट की चपेट में आने से एक युवक की जान चली गई है, जिसने पूरे राज्य में सुरक्षा मानकों पर बहस छेड़ दी है।

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