गोली चलाने का आदेश कौन देता है? जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के आरोपों का दिया कड़ा जवाब

लोकसभा में पेपर लीक विरोधी बिल पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी की टिप्पणी पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पलटवार किया और उनसे सार्वजनिक जीवन के नियमों की जानकारी रखने की नसीहत दी।

सदन में राहुल गांधी की टिप्पणी पर घमासान

लोकसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक को लेकर लगातार दूसरे दिन चर्चा जारी रही। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कई तीखे सवाल उठाए, जिसके बाद सदन का माहौल गर्म हो गया। राहुल गांधी ने अपने बयान में दावा किया कि दिल्ली में छात्रों पर गोली चलाने का आदेश गृह मंत्री अमित शाह ने दिया था। इस गंभीर आरोप के बाद सत्तापक्ष ने भारी हंगामा किया। इस हंगामे के बीच केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने मोर्चा संभाला और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी को परिपक्वता की कमी वाला नेता बताते हुए कहा कि उनके पास सार्वजनिक जीवन का अनुभव नहीं है और वे बिना तथ्यों के सदन में बातें करते हैं।

राहुल गांधी पर केंद्रीय मंत्री का पलटवार

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के लहजे और शब्दावली पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सदन में जिन शब्दों का प्रयोग किया गया है, वे असंसदीय हैं। उन्होंने राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि यदि वे खुद को या सदन के किसी सदस्य को इडियट कहते हैं, तो यह उनकी अपनी समझ है, लेकिन अगर यही शब्द उन्होंने छात्रों के लिए इस्तेमाल किए हैं, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी को संसदीय नियमों और व्यवस्थाओं की बुनियादी जानकारी तक नहीं है, जो एक नेता प्रतिपक्ष के लिए उचित नहीं है।

गोलीबारी के आरोपों की हकीकत

गोली चलाने के आदेश वाले राहुल गांधी के दावे को खारिज करते हुए जितेंद्र सिंह ने कानून की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि गोली चलाने का आदेश देने का अधिकार गृह मंत्री के पास नहीं होता, बल्कि यह निर्णय मजिस्ट्रेट, डीएम या एसडीएम जैसे स्थानीय अधिकारियों का होता है। मंत्री ने यह भी कहा कि वहां कोई गोली नहीं चली, बल्कि केवल टियर गैस का उपयोग किया गया था। उन्होंने राहुल गांधी के अमित शाह के 30 गाड़ियों के काफिले वाले दावे को भी झूठ करार दिया। जितेंद्र सिंह ने कटाक्ष करते हुए कहा कि राहुल गांधी को यह तक नहीं मालूम कि गृह मंत्री के साथ इतना बड़ा काफिला नहीं चलता और वे उस समय विदेश यात्रा पर भी नहीं गए थे। बिना किसी पुख्ता सबूत के ऐसी गैर-जिम्मेदाराना बातें करना एक जिम्मेदार नेता की पहचान नहीं है।

पीएम आवास और प्रदर्शन पर टिप्पणी

जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के हालिया प्रदर्शन का जिक्र करते हुए उन पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई को राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर बैठकर प्रदर्शन किया था। मंत्री ने आरोप लगाया कि चूंकि देश की जनता ने उन्हें प्रधानमंत्री नहीं बनाया और उनकी हसरत पूरी नहीं हुई, इसलिए वे हताशा में प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि पहले वे प्रदर्शन में शामिल नहीं थे, लेकिन बाद में जब उन्हें लगा कि वे किसी मौके से चूक रहे हैं, यानी FOMO का शिकार हुए, तो वे वहां पहुंच गए।

सदन में शब्दों का विवाद और विधेयक का पारित होना

राहुल गांधी ने अपने 50 मिनट के भाषण के दौरान अंधभक्त और इडियट जैसे शब्दों का उपयोग किया था, जिस पर बीजेपी सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी राहुल गांधी को 11 से ज्यादा बार टोका और मर्यादित भाषा का प्रयोग करने की सलाह दी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इन शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की थी। इन सभी हंगामों और चर्चाओं के बाद अंततः The Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 को लोकसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

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