ग्वालियर में पकड़ा गया फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर, 10वीं-12वीं पास युवक अमेरिकन लहजे में कर रहे थे करोड़ों की ठगी

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पुलिस ने एक ऐसे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है, जहां कम पढ़े-लिखे युवक रात के समय अमेरिकी नागरिकों को अपना शिकार बनाते थे। आरोपी खुद को विदेशी बताकर रोजाना हजारों रुपये ऐंठ रहे थे, जिसकी जांच अब FBI तक पहुंच सकती है।

ग्वालियर में साइबर ठगी का बड़ा रैकेट बेनकाब

मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में पुलिस ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है। आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे पर स्थित होटल जैनपथ से यह फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने छापेमारी कर चार युवकों को गिरफ्तार किया है, जो रात के सन्नाटे में अमेरिका में बैठे लोगों को अपना निशाना बनाते थे। हैरानी की बात यह है कि ये युवक महज 10वीं और 12वीं कक्षा तक पढ़े हुए हैं, लेकिन अमेरिकन एक्सेंट में अंग्रेजी बोलने में इतने माहिर हैं कि किसी को भी आसानी से झांसे में ले लेते थे।

खुद को अमेरिकी नागरिक बताकर करते थे कॉल

जांच में पता चला कि ये आरोपी अपनी असली पहचान छुपाकर काम करते थे। ये खुद को फ्रैंक, लुईस, ब्रूस और माइकल जैसे नाम बताकर अमेरिकी नागरिकों से संपर्क साधते थे। पुलिस की छापेमारी के दौरान होटल के रूम नंबर 6 से 4 लैपटॉप, 7 मोबाइल, 4 हेडफोन और बड़ी मात्रा में स्क्रिप्ट व ग्राहकों की निजी जानकारी बरामद हुई है। जब्त किए गए उपकरणों और दस्तावेजों की कुल कीमत करीब 3 लाख 75 हजार रुपए आंकी गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने पिछले 5 महीनों में करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी को अंजाम दिया है।

डार्क वेब से जुटाते थे डेटा और स्क्रिप्ट

इस पूरे गोरखधंधे का मास्टरमाइंड प्रबल प्रताप सिंह परिहार बताया जा रहा है। वही इन युवकों को अमेरिकी नागरिकों का डेटा और बोलने के लिए विशेष स्क्रिप्ट उपलब्ध कराता था। दिलचस्प यह है कि इन युवकों ने अमेरिकन एक्सेंट में धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलना इंटरनेट पर ऑनलाइन सीखा था। गिरोह के सदस्य डार्क वेब से डेटा निकालते थे और लैपटॉप पर स्क्रिप्ट सामने रखकर फोन कॉल करते थे।

12 घंटे के अंतर का उठाते थे फायदा

भारत और अमेरिका के टाइम जोन में करीब 12 घंटे का अंतर होता है। इसी का फायदा उठाकर आरोपी दिनभर सोते थे और रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक अपना काम शुरू करते थे। हर रोज ये लोग करीब 400 से ज्यादा कॉल करते थे और औसतन 12 से 15 अमेरिकी नागरिक उनके जाल में फंस जाते थे। ये लोग गिफ्ट कार्ड और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठते थे। गिरोह रोजाना 50 से 70 हजार रुपए की ठगी करने में सफल रहता था। इन युवकों को काम के बदले हर महीने 15 से 20 हजार रुपए वेतन और ठगी की कुल रकम में से 5 प्रतिशत कमीशन के रूप में दिया जाता था।

FBI तक पहुंच सकती है मामले की आंच

मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्वालियर पुलिस अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच की तैयारी कर रही है। पुलिस इस पूरे गिरोह की जानकारी विदेश मंत्रालय के जरिए अमेरिका की जांच एजेंसी FBI को भेजने वाली है। ऐसी संभावना भी जताई जा रही है कि यदि मामले की जड़ें और गहरी निकलती हैं, तो FBI की एक टीम जांच के लिए ग्वालियर भी आ सकती है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन पांच महीनों में अमेरिका में कितने लोग इस गिरोह का शिकार बने हैं और किन-किन माध्यमों से पैसे ट्रांसफर करवाए गए थे।

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