पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्दवान जिले के अंडाल शहर में कोयला खदान क्षेत्र में अचानक जमीन धंसने से हाहाकार मच गया है। इस आपदा के बाद प्रभावित इलाके में चारों तरफ तबाही के निशान साफ देखे जा सकते हैं। कहीं जमीन के बीचो-बीच गहरी और चौड़ी दरारें पड़ गई हैं, तो कहीं घरों के आंगन ढह गए हैं। कई इमारतों की दीवारें इस तरह झुक गई हैं कि वे कभी भी मलबे में तब्दील हो सकती हैं। स्थानीय प्रशासन और ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) की टीम ने पूरे प्रभावित क्षेत्र की घेराबंदी कर दी है। हालांकि, अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई, जरूरी दस्तावेज और घरेलू सामान को बचाने के लिए लोग अब भी अपनी जान जोखिम में डालकर घरों में घुसने का प्रयास कर रहे हैं, जिन्हें सुरक्षा बल वापस भेज रहे हैं। सबसे ज्यादा बुरा हाल स्कूली बच्चों और युवाओं का है, जिनका भविष्य अनिश्चितता के अंधकार में लटक गया है।
हादसे के बाद दहशत और लोगों में गहरा आक्रोश
स्थानीय निवासियों ने घटना के भयानक मंजर को याद करते हुए बताया कि सबसे पहले एक बेहद तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। इसके तुरंत बाद धरती फटने लगी और जमीन में एक लंबी एवं डरावनी दरार उभर आई। देखते ही देखते कई मकान ताश के पत्तों की तरह ढहने लगे। अपनी आंखों के सामने अपने सपनों के घरों को जमींदोज होते देख लोग अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर भागने लगे। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि यह कोई अचानक आई प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) की बरसों पुरानी लापरवाही का सीधा नतीजा है। बंद पड़ी कोयला खदानों के ऊपर बसे इस शहर में जब भी तेज बारिश होती है, तब-तब भू-धंसाव का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बार-बार शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी अधिकारियों ने इस दिशा में कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
विधायक और नेताओं ने प्रशासन व कोलियरी प्रबंधन को घेरा
घटना की सूचना मिलते ही रानीगंज के स्थानीय विधायक पार्थ घोष और पांडवेश्वर के पूर्व CPI(M) विधायक गौरांग चटर्जी स्थिति का जायजा लेने प्रभावित इलाके में पहुंचे। दोनों ही नेताओं ने इस विकट स्थिति के लिए सीधे तौर पर ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के बकोला क्षेत्र के कोलियरी प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया। विधायक पार्थ घोष ने आरोप लगाया कि बार-बार चेतावनी और सुरक्षा चिंताओं से अवगत कराए जाने के बावजूद कोलियरी अधिकारियों ने सुरक्षा मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज किया। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित परिवारों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर बसाया जाए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। पूर्व विधायक गौरांग चटर्जी ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि खदान क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने में ईसीएल प्रबंधन की विफलता के कारण ही आज सैकड़ों लोगों के सिर से छत छिन गई है और वे दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
खुले आसमान के नीचे बिताई रात, दस्तावेजों को लेकर बढ़ी चिंता
प्रभावित परिवारों के लिए मंगलवार की रात किसी खौफनाक सपने जैसी रही। अचानक बेघर हुए कई लोगों ने स्थानीय धर्मशालाओं और सामुदायिक भवनों में शरण ली, तो कई परिवारों को मजबूरी में पूरी रात खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ी। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने बुधवार सुबह से प्रभावित लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था शुरू कर दी है, लेकिन पीड़ितों का कहना है कि सिर्फ दो वक्त के भोजन से उनकी जिंदगी वापस पटरी पर नहीं आ सकती। लोगों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनके महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड और बैंक पासबुक अब भी उनके क्षतिग्रस्त घरों के भीतर फंसे हुए हैं। यदि इन्हें जल्द नहीं निकाला गया, तो आने वाले समय में उनके सामने पहचान और आर्थिक लेनदेन का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
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