अहमदाबाद में हुए दर्दनाक एयर इंडिया विमान हादसे की जांच रिपोर्ट को लेकर एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने जांच पूरी करने की समय-सीमा का खुलासा किया है। AAIB ने अदालत को आश्वस्त किया है कि विमान हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट इस साल अक्टूबर महीने तक पूरी तरह से तैयार कर ली जाएगी। इस नए घटनाक्रम के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर की तारीख तय की है।
जांच में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की भागीदारी
सुनवाई के दौरान AAIB ने इस बात को पूरी तरह स्पष्ट किया कि यह कोई साधारण या घरेलू इन-हाउस जांच नहीं है जो केवल डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के अधिकारियों तक ही सीमित हो। ब्यूरो ने अदालत को बताया कि जांच प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय विमानन प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत उन देशों के विमानन विशेषज्ञ और मान्यता प्राप्त प्रतिनिधि भी सक्रिय रूप से जांच में शामिल हैं, जिनके नागरिक इस दुखद विमान हादसे का शिकार हुए थे। उल्लेखनीय है कि इस भीषण हादसे में कुल 260 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जिसके कारण इसकी जांच अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप की जा रही है।
अदालत में याचिकाकर्ताओं के तर्क और सरकार का जवाब
सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई मृत पायलट कैप्टन सुमित सभरवाल के पिता और फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स द्वारा दायर की गई एक याचिका पर की जा रही थी। इस याचिका में मांग की गई है कि इस संवेदनशील हादसे की जांच अदालत की सीधी निगरानी में कराई जाए। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने जांच की गति और उसकी प्रकृति पर गंभीर सवाल उठाए। प्रशांत भूषण ने दलील दी कि इस महत्वपूर्ण मामले की जांच पूरी करने में पहले ही बहुत अधिक समय लग चुका है और उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया को केवल DGCA के चुनिंदा अधिकारी ही संभाल रहे हैं।
इन आरोपों का खंडन करते हुए सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ताओं के दावे पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने दलील दी कि यह जांच विमान (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जांच) नियमों और वैश्विक संधियों के प्रावधानों के तहत अत्यंत पारदर्शी तरीके से की जा रही है, जिसका भारत भी एक हस्ताक्षरकर्ता सदस्य है। SG तुषार मेहता ने पीठ को विश्वास दिलाया कि जांच दल की अंतिम रिपोर्ट को इस साल अक्टूबर तक एक सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर दिया जाएगा। इससे पहले हुई सुनवाई में AAIB ने अदालत को यह जानकारी दी थी कि इस विमान हादसे की जांच आगामी 6 हफ्तों के भीतर पूरी कर ली जाने की उम्मीद है।
हादसे की भयानक पृष्ठभूमि
यह भीषण विमान हादसा जून 2025 में हुआ था, जब एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 अहमदाबाद से लंदन के लिए रवाना हुई थी। उड़ान भरने के महज कुछ ही मिनटों बाद विमान अनियंत्रित हो गया और रनवे से थोड़ी दूरी पर स्थित एक स्थानीय मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल की इमारत से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विमान में सवार कुल 242 लोगों में से 241 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों (क्रू मेम्बर्स) की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके साथ ही, जिस मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से विमान टकराया था, वहां रहने वाले 19 अन्य लोगों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी थी, जिससे कुल मृतकों की संख्या 260 तक पहुंच गई थी।
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