कलावा बांधने के सही नियम: जानें महिलाओं और पुरुषों के लिए क्या हैं मान्यताएं

सनातन परंपरा में कलाई पर बांधा जाने वाला कलावा सिर्फ एक धागा नहीं बल्कि सुरक्षा कवच माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इसे बांधने के लिए स्त्री और पुरुष दोनों के लिए अलग-अलग नियम निर्धारित किए गए हैं।

कलावा का धार्मिक महत्व

पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान कलाई पर कलावा बांधने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसे केवल सामान्य धागा न मानकर ईश्वर की कृपा और रक्षा का प्रतीक माना जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार, कलावा पहनने से मनुष्य के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बनता है, जो नकारात्मक ऊर्जा और जीवन की बाधाओं को दूर रखने में सहायक है। इसके धागों को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ-साथ त्रिदेवियों यानी लक्ष्मी, सरस्वती और पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त माना जाता है। अंबाला के ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी के अनुसार, कलावा का उद्देश्य व्यक्ति को सीधे ईश्वर के साथ जोड़ना होता है।

स्त्री और पुरुषों के लिए कलावा के नियम

धार्मिक शास्त्रों में कलावा बांधने की विधि को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इनका पालन करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है:

  • विवाहित महिलाएं: शास्त्रों के अनुसार विवाहित महिलाओं के लिए अपने बाएं हाथ में कलावा बांधना शुभ और फलदायी माना गया है।
  • कुंवारी कन्याएं: कुंवारी लड़कियों को अपने दाहिने हाथ की कलाई पर कलावा बांधने का विधान बताया गया है।
  • पुरुष: पुरुषों के लिए हमेशा दाहिने हाथ की कलाई पर कलावा बंधवाना अनिवार्य और शुभ होता है।

कलावा बंधवाने का सही तरीका

कलावा बंधवाते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। सबसे पहले, कलावा बांधते समय अपना सिर किसी रुमाल, दुपट्टे या पल्लू से ढंकना चाहिए। इसके अतिरिक्त, इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कलावा बंधवाते समय आपकी मुट्ठी में कुछ चावल के दाने, एक फूल या कुछ दक्षिणा होनी चाहिए। माना जाता है कि इन चीजों को साथ रखकर कलावा बंधवाने से इसका शुभ प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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