यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुए पेपर लीक की लिस्ट गिनाने लगे जितेंद्र सिंह, संसद में बोले- 'पूरी सूची बनाने लगा तो चर्चा ही नहीं कर पाऊंगा'

संसद में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यूपीए सरकार के दौरान हुए कई पेपर लीक घोटालों का ब्योरा दिया और सख्त कानूनी बदलावों की जानकारी दी।

देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता को बनाए रखने और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए संसद में एक बेहद महत्वपूर्ण विधायी कदम उठाया गया है। सोमवार को लोकसभा में पेश किए गए एंटी पेपर लीक बिल पर मंगलवार को सदन में गहन चर्चा आयोजित की गई। इस चर्चा की शुरुआत करते हुए केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ किया कि पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स एक्ट 2024 में संशोधन के लिए लाया गया यह नया विधेयक देश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की रक्षा करने वाला साबित होगा। चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने पिछली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के समय हुए कई बड़े पेपर लीक मामलों का जिक्र किया और कहा कि अगर वह उन सभी मामलों की सूची बनाने बैठेंगे, तो संसद में इस विधेयक पर चर्चा ही पूरी नहीं हो पाएगी।

यूपीए शासनकाल के दौरान हुए बड़े पेपर लीक की लंबी फेहरिस्त

सदन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पिछली यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई प्रशासनिक और परीक्षा प्रणाली की खामियों को उजागर किया। उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए पेपर लीक की एक लंबी सूची सदन के सामने रखी। उन्होंने निम्नलिखित महत्वपूर्ण मामलों का विशेष रूप से उल्लेख किया:

  • साल 2009: रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड की परीक्षा का पेपर लीक हुआ था।
  • साल 2009: वेस्ट बंगाल जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम में भी बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी।
  • साल 2010: उत्तर प्रदेश में बी.एड. एंट्रेंस एग्जामिनेशन का पेपर लीक हुआ था।
  • साल 2011: ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन का प्रतिष्ठित पेपर लीक हो गया था।
  • साल 2012: देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान, एम्स नई दिल्ली की प्रवेश परीक्षा का पेपर लीक हुआ था।
  • साल 2012: तमिलनाडु पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा में भी बड़ी धांधली हुई थी।
  • साल 2013: महाराष्ट्र सेकेंडरी सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन का पेपर लीक हो गया था।

इन मामलों का ब्योरा देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि यदि वह यूपीए के शासनकाल में हुए सभी पेपर लीक मामलों की सूची पूरी तरह से तैयार करने लगें, तो इस महत्वपूर्ण विधेयक पर बहस करने के लिए समय ही नहीं बचेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसी कारण से वर्तमान सरकार को एक अत्यंत सख्त और विशिष्ट कानून की आवश्यकता महसूस हुई ताकि इस प्रकार की अनियमितताओं को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सके।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के गठन पर पीएम मोदी की सराहना

केंद्रीय मंत्री ने देश में परीक्षाओं का आयोजन कराने वाली प्रमुख सरकारी संस्थाओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के तहत चार बड़ी रिक्रूटमेंट एजेंसियां कार्यरत हैं, जिनमें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC), रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (RRB) और इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल शामिल हैं। इसके साथ ही, उच्च शिक्षा में एडमिशन के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का गठन किया गया है।

जितेंद्र सिंह ने सदन को याद दिलाया कि NTA का गठन साल 2017 में इसी सरकार के कार्यकाल के दौरान किया गया था। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि साल 1992 में पहली बार कांग्रेस की अगुवाई वाली तत्कालीन भारत सरकार से एक कॉमन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी बनाने की सिफारिश की गई थी। इसके बाद साल 2010 में भी यूपीए शासन के दौरान एक कमेटी ने यही सुझाव दिया था। लेकिन, दशकों तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि निजी हितों या राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण इस निर्णय को लगातार टाला जाता रहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने इस अधूरे काम को पूरा किया, जिसके लिए सरकार और प्रधानमंत्री की सराहना की जानी चाहिए।

'भारत माता के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ मंजूर नहीं'

संसद में अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने नए विधेयक की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 वास्तव में पूर्व में पारित कानून का ही एक अधिक कठोर और प्रभावी रूप है जिसे इसी सरकार द्वारा लाया गया था। उन्होंने कहा कि यह विधेयक स्वतंत्र भारत के इतिहास में अपनी तरह का पहला और अनूठा कानून है, जो देश के करोड़ों छात्रों और नौजवानों के कल्याण की रक्षा के लिए हमारी सरकार की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि भारत माता के बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी माफिया या अनुचित तत्व को खिलवाड़ करने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी। उन्होंने इस संशोधन विधेयक को भारतीय संसद के इतिहास में एक मील का पत्थर बताया जो पूरी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करेगा।

संशोधित कानून में सजा और जुर्माने के प्रावधानों को किया गया बेहद सख्त

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन को विस्तार से समझाया कि नए संशोधन विधेयक के माध्यम से वर्ष 2024 के मूल कानून में क्या-क्या बदलाव किए जा रहे हैं और किस प्रकार अपराधियों के मन में कानून का डर पैदा किया जाएगा। उन्होंने प्रमुख कानूनी संशोधनों को इस प्रकार रेखांकित किया:

  • सामान्य अपराधियों के लिए सजा: मूल कानून की धारा 10 की उप-धारा 1 के तहत पेपर लीक या नकल में शामिल पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को 3-5 साल की सज़ा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता था। अब लाए जा रहे संशोधन के तहत सजा की इसी अवधि को बढ़ाकर कम से कम 5-10 साल कर दिया गया है और जुर्माने को भी बढ़ाकर 50 लाख रुपये तक कर दिया गया है।
  • सर्विस प्रोवाइडर (परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियां): साल 2024 के कानून में सर्विस प्रोवाइडर के लिए सज़ा के रूप में 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना तय था। अब इस संशोधन के माध्यम से जुर्माने की इस सीमा को बढ़ाकर सीधे 5 करोड़ रुपये किया जा रहा है। इसके अलावा, पहले दोषी सर्विस प्रोवाइडर को अगले 4 वर्षों तक कोई भी परीक्षा आयोजित करने से प्रतिबंधित करने का नियम था, जिसे अब बढ़ाकर पूरे 8 साल किया जा रहा है।
  • संगठित अपराध और पेपर माफिया के खिलाफ कार्रवाई: संगठित रूप से अपराध करने वाले माफिया गिरोहों के मामलों में पहले सजा की अवधि 5-10 साल निर्धारित थी। नए संशोधन में इसे बढ़ाकर 7-10 साल की जेल कर दिया गया है। इसके साथ ही, जुर्माने की राशि को 1 करोड़ रुपये से सीधे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है।
  • त्वरित न्याय और फास्ट-ट्रैक कोर्ट: परीक्षाओं में होने वाली धांधली से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। सरकार ने जांच प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने के लिए निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत किसी भी मामले की जांच 2 महीने की अवधि के भीतर अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी।

विधेयक के इन बेहद सख्त और गंभीर प्रावधानों को सदन के समक्ष रखते हुए केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि इस नए कानून से परीक्षाओं की विश्वसनीयता पूरी तरह से बहाल होगी और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह से नकेल कसी जा सकेगी।

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