JPSC विवाद और पूर्व चेयरमैन की प्रतिक्रिया
झारखंड में लोक सेवा आयोग यानी JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर छिड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस पूरे प्रकरण के केंद्र में आए आरोपों के बीच आयोग के पूर्व चेयरमैन एल. ख्याते ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। एक विशेष बातचीत के दौरान उन्होंने परीक्षाओं में धांधली और भ्रष्टाचार के आरोपों को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर यह साबित होता है कि परीक्षाओं में सीटों की खरीद-फरोख्त हुई है, तो जांच एजेंसियों को बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर से कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
कार्यभार संभालने के बाद की चुनौतियां
एल. ख्याते ने बताया कि जब उन्होंने 6 मार्च 2025 को जेपीएससी के चेयरमैन पद की जिम्मेदारी संभाली थी, उस समय आयोग के सामने कई जटिल चुनौतियां थीं। उन्होंने कहा कि उनका प्राथमिक उद्देश्य लंबित पड़ी परीक्षाओं को पूरा करना, उनके परिणाम घोषित करना और आयोग की पूरी कार्यप्रणाली को व्यवस्थित तरीके से दोबारा पटरी पर लाना था। ख्याते के अनुसार, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बैकलॉग को खत्म करने की थी, क्योंकि कई परीक्षाओं के परिणाम लंबे समय से अटके हुए थे।
काम का लेखा-जोखा और सुधार की प्रक्रिया
अपने कार्यकाल का ब्योरा देते हुए पूर्व चेयरमैन ने कहा कि प्राथमिकता के आधार पर उन्होंने बैकलॉग खत्म करने की दिशा में तेजी से काम किया। उन्होंने दावा किया कि जनवरी-फरवरी तक अधिकांश लंबित मामलों का निपटारा कर दिया गया था। इसके अलावा, उन्होंने 600 से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति से जुड़े मामलों को भी निस्तारित किया। ख्याते का मानना है कि आयोग के भीतर प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक स्तर पर काफी सुधारों की गुंजाइश थी, जिसके लिए उन्होंने लगातार प्रयास किए ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।
सीटों की बिक्री के आरोपों पर स्पष्ट रुख
14वीं जेपीएससी परीक्षा में सीटों की कथित बिक्री और धांधली के गंभीर आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए एल. ख्याते ने दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें प्रशासन और आयोग की विश्वसनीयता के लिए नुकसानदेह हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, यदि जांच एजेंसियां आरोपों में सच्चाई पाती हैं, तो किसी भी अधिकारी, एजेंसी या व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उनका सीधा कहना था, यदि सीटों की खरीद-फरोख्त हुई है तो इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी हो, उसे कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए।
परिणामों पर केवल चेयरमैन के हस्ताक्षर का राज
जब पूर्व चेयरमैन से यह सवाल किया गया कि जेपीएससी द्वारा जारी परीक्षा परिणामों पर केवल उनके ही हस्ताक्षर क्यों थे और आयोग के अन्य सदस्यों के क्यों नहीं, तो उन्होंने इसे नियमों के दायरे में बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जेपीएससी की परीक्षा प्रक्रिया काफी गोपनीय होती है। वर्ष 2002 में बने नियमों के अनुसार, परीक्षा परिणाम जारी करने का अंतिम अधिकार चेयरमैन के पास होता है।
ख्याते के अनुसार, प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के परिणामों में सदस्यों की औपचारिक भूमिका नियत नहीं है। उत्तर पुस्तिकाओं की कोडिंग, डिकोडिंग, अंकों और रोल नंबरों की पूरी गोपनीयता बनी रहे, यह सुनिश्चित करना चेयरमैन की जिम्मेदारी होती है। अंतिम परिणामों के स्तर पर सदस्य चाहे तो स्क्रूटनी कर सकते हैं, लेकिन आधिकारिक रूप से परिणाम जारी करने की अंतिम स्वीकृति चेयरमैन ही देते हैं।
शिकायतों पर जवाब और तकनीकी बाधा
साक्षात्कार के अंतिम चरण में उनसे यह भी पूछा गया कि क्या छह महीने पहले किसी अभ्यर्थी ने उन्हें जेपीएससी में धांधली के सबूत दिए थे और उस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इस पर एल. ख्याते ने स्वीकार किया कि आयोग में लगातार विभिन्न तरह की शिकायतें प्राप्त होती रहती हैं। हालांकि, इस महत्वपूर्ण प्रश्न का उनका पूरा जवाब तकनीकी व्यवधान के कारण रिकॉर्ड नहीं हो सका। फिलहाल जेपीएससी की 14वीं परीक्षा से जुड़ा विवाद लगातार गहरा रहा है और जांच एजेंसियां मामले के हर पहलू की गंभीरता से पड़ताल कर रही हैं।
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