रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और रूस के आर्थिक रिश्तों को लेकर गहरा भरोसा जताते हुए कहा है कि आने वाले बरसों में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। उनके मुताबिक ऊर्जा, परमाणु क्षेत्र, हाइड्रोकार्बन और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग निरंतर बढ़ रहा है और दोनों देशों के पास और अधिक बड़े लक्ष्य हासिल करने की पूरी क्षमता मौजूद है।
सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में पुतिन ने बताया कि इस समय भारत और रूस के बीच व्यापार करीब 58 से 60 अरब डॉलर के आसपास है, लेकिन इसे और आगे ले जाने की भरपूर गुंजाइश मौजूद है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में हमारा द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा। फिलहाल यह लगभग 58 से 60 अरब डॉलर के बीच है, मगर इसे और तेजी से बढ़ाने और बड़े लक्ष्यों को पाने के लिए हमारे पास मजबूत नींव मौजूद है।
ऊर्जा सहयोग को बताया रिश्तों की रीढ़
राष्ट्रपति पुतिन ने भारत और रूस के बीच बढ़ते ऊर्जा सहयोग को दोनों देशों के संबंधों का अहम आधार बताया। उन्होंने खासतौर पर तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना का जिक्र किया और इसे दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग का अहम उदाहरण करार दिया।
पुतिन ने कहा कि हम सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं की बात नहीं कर रहे, जिसमें परमाणु ऊर्जा भी शामिल है। कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र का निर्माण कार्य अभी जारी है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में दोनों देशों का सहयोग केवल परमाणु ऊर्जा तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हाइड्रोकार्बन के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं आकार लेंगी। उनके अनुसार तेल और गैस से जुड़े नए प्लेटफॉर्म सामने आएंगे और दोनों देश इस दिशा में मिलकर काम करते रहेंगे।
निवेश में भारत एक अहम साझेदार
रूसी राष्ट्रपति ने निवेश के मोर्चे पर भी भारत को एक अहम साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि भारत में रूस का एक बड़ा निवेश कार्यक्रम चल रहा है और दोनों देश आपसी निवेश को बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। पुतिन ने इसे भारतीय अर्थव्यवस्था में रूस की सबसे बड़ी विदेशी निवेश पहलों में से एक बताया।
भारत और रूस के बीच नागरिक परमाणु सहयोग लंबे अरसे से दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का अहम हिस्सा रहा है। इसी कड़ी में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।
कुडनकुलम परियोजना को मिली बड़ी मंजूरी
हाल ही में 2 मई को भारत के परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) ने कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना की यूनिट-5 और यूनिट-6 में प्रमुख उपकरणों की स्थापना की अनुमति दी थी। न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) ने इसे देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की दिशा में एक अहम उपलब्धि बताया था।
एनपीसीआईएल के मुताबिक कुडनकुलम की पांचवीं और छठी इकाई देश की सुरक्षित, स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा उत्पादन क्षमता को और मजबूती देंगी। इससे भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार को भी रफ्तार मिलेगी।
https://hindi.news18.com/world/europe-vladimir-putin-confident-for-india-russia-trade-target-of-100-billion-dollars-ws-l-10542645.html