सरकार का सख्त रुख और प्रदर्शनकारियों को राहत
हालिया घटनाक्रमों के बाद सरकार ने इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार ने यह साफ कर दिया है कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। सरकार अब सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों को गंभीरता से ले रही है और उन पर संज्ञान लिया जा रहा है। जिन राज्यों से प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की खबरें आ रही थीं, केंद्र सरकार वहां से पूरी रिपोर्ट तलब कर रही है।
हालांकि, सरकार ने इसके साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि प्रदर्शन की आड़ में जो लोग हिंसा में लिप्त पाए जाएंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कानून अपना काम करेगा। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल का भरपूर समर्थन प्राप्त है। कपिल सिब्बल ने प्रदर्शनकारियों की कानूनी मदद के लिए एक करोड़ रुपये की सहायता राशि भी प्रदान की है। इसके अलावा, सीजेपी ने साक्षी नामक एक डिजिटल प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है, जिसका मुख्य उद्देश्य उन प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है जिन पर मामले दर्ज किए गए हैं।
20 जुलाई की हिंसा और उसके परिणाम
देश भर में चर्चा का विषय बने सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी। उस दिन दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़प हुई थी, जिसमें बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे। इस घटना के बाद विरोध प्रदर्शन की आग देश के अन्य हिस्सों में भी फैल गई, विशेषकर बिहार में हालात काफी हिंसक देखे गए थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए 25 जुलाई को सरकार ने सीजेपी की सभी प्रमुख मांगें मान ली थीं। इन मांगों में नीट पेपर लीक कांड में जान गंवाने वाले मेधावी छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना और विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज केस वापस लेना या कार्रवाई न करना शामिल था। अब जब देश के अलग-अलग कोनों से प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं, तो सरकार ने फिर से स्पष्ट किया है कि शांतिप्रिय लोगों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
प्रदर्शन की शुरुआत और प्रमुख घटनाएं
सीजेपी का यह आंदोलन 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग नीट पेपर लीक के मामले को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी। आंदोलन ने तब जोर पकड़ा जब सोनम वांगचुक ने इस मांग के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू कर दी, जिससे लोगों की भागीदारी तेजी से बढ़ी।
20 जुलाई को जब सीजेपी कार्यकर्ताओं ने संसद भवन की ओर मार्च करने की कोशिश की, तो पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस लाठीचार्ज के बाद आंदोलन और अधिक आक्रामक और व्यापक हो गया। भारी दबाव के बीच आखिरकार 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना पद छोड़ना पड़ा। मंत्री के इस्तीफे के बाद सीजेपी ने अपने धरने को आधिकारिक तौर पर समाप्त करने की घोषणा की थी।
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