बिजली की बढ़ती मांग और सोलर का बढ़ता चलन
भारत में बिजली की खपत इस कदर बढ़ चुकी है कि गांव हो या शहर, हर जगह चौबीसों घंटे आपूर्ति बनाए रखना आसान नहीं रह गया है। यही कारण है कि लोगों को आए दिन बिजली कटौती का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सरकार बिजली के नए विकल्पों को अपनाने पर खासा जोर दे रही है और लोगों को अपने घरों की छत पर सोलर पैनल लगवाने की सलाह दे रही है। इसके लिए मोटी सब्सिडी भी मुहैया कराई जा रही है।
लेकिन जब भी किसी को सोलर पैनल लगवाने का सुझाव दिया जाता है, तो उसके मन में कई सवाल उठते हैं। इससे आखिर फायदा क्या होगा? क्या सोलर पैनल से बिजली लेना सस्ता पड़ता है? क्या इससे मिलने वाली बिजली बेहतर होती है? और क्या सोलर पैनल से बनी बिजली पर घर के फ्रिज, कूलर, पंखे और टीवी ज्यादा लंबे समय तक चलते हैं?
क्या रूफटॉप सोलर और डिस्कॉम की बिजली की गुणवत्ता अलग होती है?
काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) की प्रोग्राम लीड भावना त्यागी के मुताबिक इन दोनों की गुणवत्ता में कोई फर्क नहीं होता।
सोलर से पैदा होने वाली बिजली और डिस्कॉम यानी विद्युत वितरण कंपनी से मिलने वाली बिजली की गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं होता। रूफटॉप सोलर सिस्टम में लगा इनवर्टर ग्रिड के वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी मानक से मिलान करके सोलर के डीसी (DC) आउटपुट को एसी (AC) बिजली में बदल देता है, जिससे इसे एसी बिजली पर चलने वाले सभी उपकरणों के लिए इस्तेमाल किया जा सके।
क्या सौर बिजली को स्टोर किया जा सकता है?
इस सवाल पर भावना त्यागी का जवाब हां में है। उनके अनुसार सौर ऊर्जा से बनने वाली बिजली को आसानी से जमा करके रखा जा सकता है।
सौर ऊर्जा से बनी बिजली को स्टोर किया जा सकता है और इसका सबसे आम तरीका बैटरी सिस्टम का इस्तेमाल है। ये बैटरियां दिन के समय बनने वाली अतिरिक्त बिजली को अपने अंदर जमा कर लेती हैं और तब आपूर्ति करती हैं जब धूप नहीं होती, जैसे रात के समय या बादल वाले मौसम में।
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