बिहार का भविष्य और सरकार की कार्ययोजना
बिहार की सत्ता में आने के बाद सरकार ने अपने 100 दिन का कार्यकाल पूरा कर लिया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक विशेष कार्यक्रम ‘डायमंड स्टेट्स समिट बिहार’ के दौरान राज्य के भविष्य के लिए अपना रोडमैप पेश किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनकी सरकार का मुख्य लक्ष्य साल 2036 तक बिहार को एक समृद्ध राज्य के रूप में स्थापित करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत बनाने के सपने के साथ कदम से कदम मिलाते हुए, राज्य सरकार अपनी नीतियों को क्रियान्वित कर रही है। मुख्यमंत्री ने विकास, शिक्षा, आधारभूत संरचना और सुशासन को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा है।
समृद्ध बिहार का संकल्प और विकास की रफ्तार
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बिहार पहले विकास की दौड़ में पिछड़ गया था, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। उन्होंने कहा कि आज राज्य के सुदूर गांवों तक बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं। उनका मानना है कि सरकार अब राज्य में विकास की गति को और अधिक तीव्र करने की दिशा में अग्रसर है। सरकार का दावा है कि ग्रामीण इलाकों में सड़क और बिजली की स्थिति अब कई अन्य राज्यों की तुलना में काफी बेहतर हो गई है।
प्रमुख 10 उपलब्धियां और नई पहल
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकार के शुरुआती 100 दिनों के कामकाज को रेखांकित करते हुए 10 महत्वपूर्ण उपलब्धियां और योजनाओं की जानकारी दी:
- 125 यूनिट मुफ्त बिजली: बिहार के सभी घरेलू उपभोक्ताओं को सरकार की तरफ से 125 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। इस योजना के लिए राज्य सरकार हर साल 23 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम सब्सिडी वहन कर रही है।
- सहयोग कार्यक्रम: आम जनता की शिकायतों का तुरंत समाधान करने के लिए ‘सहयोग कार्यक्रम’ का शुभारंभ किया गया है। इसके माध्यम से नागरिकों को अपनी समस्याओं को रखने का सीधा मंच दिया गया है।
- शिकायतों का समयबद्ध निपटारा: नियम के अनुसार, आवेदन प्राप्त होने के 10 दिन के भीतर कार्रवाई करना अनिवार्य है। यदि तय समय में कार्रवाई नहीं होती है, तो संबंधित अधिकारी को मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से स्वतः नोटिस जारी किया जाता है।
- अधिकारी निलंबन की सख्त नीति: जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। यदि कोई शिकायत 30 दिन के भीतर हल नहीं की जाती है, तो संबंधित अधिकारी को स्वतः निलंबित माना जाएगा। इसके लिए किसी अलग आदेश की प्रतीक्षा नहीं करनी होगी।
- शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार: राज्य के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों की ओर न देखना पड़े, इसके लिए बिहार में एक साथ 211 नए डिग्री कॉलेज खोले गए हैं। इसके अतिरिक्त निजी विश्वविद्यालयों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
- निवेश का महा-अभियान: मुख्यमंत्री ने बिहार के बाहर रह रहे लोगों से राज्य में वापस आकर निवेश करने की अपील की है। सरकार का लक्ष्य 20 नवंबर तक 5 लाख करोड़ रुपये का निजी निवेश राज्य में लाने का है।
- बुनियादी ढांचे का विकास: गंगा नदी के किनारे बने मरीन ड्राइव का और अधिक विस्तार किया जाएगा। इसके अलावा राज्य में नए एक्सप्रेसवे, पुलों का निर्माण और अत्याधुनिक टाउनशिप विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है।
- ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक पहचान: बिहार की गौरवशाली विरासत जैसे नालंदा और विक्रमशिला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की कोशिशें तेज की जाएंगी।
- पर्यटन को प्रोत्साहन: राज्य सरकार पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की तैयारी कर रही है।
- विकास का विजन: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 2036 तक बिहार को समृद्ध बनाने के लक्ष्य के साथ सरकार उद्योग, कृषि और रोजगार सृजन पर निरंतर ध्यान दे रही है।
सुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में प्रशासनिक जवाबदेही पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन जनता की समस्याओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और भ्रष्ट या सुस्त कार्यशैली के लिए कोई जगह नहीं है। शिकायतों के निस्तारण में देरी होने पर निलंबन की कड़ी कार्रवाई का प्रावधान प्रशासन में पारदर्शिता और तत्परता लाने के लिए उठाया गया एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री का मानना है कि अब समय आ गया है जब पूरी दुनिया को बिहार की वास्तविक ताकत और उसके विकास की नई गाथा देखनी चाहिए।
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