श्रीनगर में फंसे हिमाचल के 35 पर्यटकों की सुरक्षित वापसी, जयराम ठाकुर और प्रशासन के सहयोग का जताया आभार

जम्मू-कश्मीर में प्राकृतिक आपदा और सुरक्षा कारणों से बीते पांच दिनों से फंसे हिमाचल प्रदेश के 35 पर्यटकों को सेना और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षित जम्मू पहुंचा दिया है।

जम्मू-कश्मीर से सुरक्षित लौटे हिमाचल के पर्यटक

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में भूस्खलन और सुरक्षा चुनौतियों के बीच फंसे हिमाचल प्रदेश के 35 पर्यटकों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। प्रशासन, भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियों के साझा प्रयासों के चलते इन सभी पर्यटकों को सकुशल जम्मू पहुंचा दिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी हिमाचल प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के पूर्व मीडिया को-ऑर्डिनेटर पुरुषोत्तम शर्मा ने दी। पुरुषोत्तम शर्मा स्वयं भी अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ इस दल का हिस्सा थे और वे सभी अब सुरक्षित हैं।

सीआरपीएफ कैंप में मिली सुरक्षा

पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि श्रीनगर-कन्याकुमारी राष्ट्रीय राजमार्ग पर राजबन क्षेत्र में भीषण भूस्खलन के कारण रास्ता बीते पांच दिनों से पूरी तरह बंद था। इसी बीच अनंतनाग में एक आतंकी घटना सामने आई, जिसके बाद एहतियात के तौर पर पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें सीआरपीएफ कैंप-163 में ठहराया गया। सर्च ऑपरेशन के पूर्ण होने और स्थिति सामान्य होने के बाद शुक्रवार की देर शाम सेना और पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच इन पर्यटकों के काफिले को काजीगुंड से जम्मू के लिए रवाना किया गया। सभी पर्यटक बिना किसी परेशानी के जम्मू पहुंचने में सफल रहे।

35 लोगों का दल और हमीरपुर का कनेक्शन

इस संकट की घड़ी में फंसे कुल 35 पर्यटकों को एक साथ सुरक्षित बाहर निकाला गया। पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि उनके अपने समूह में पांच वाहनों के जरिए 25 लोग यात्रा कर रहे थे। इसके साथ ही हिमाचल के हमीरपुर जिला स्थित नादौन से आए 10 अन्य पर्यटक भी पांच वाहनों में सवार थे। ये सभी लोग उसी सीआरपीएफ कैंप में साथ रुके हुए थे और प्रशासन ने इन सभी 35 यात्रियों को एक साथ सुरक्षित स्थान तक पहुँचाने की व्यवस्था की।

राज्यपाल और जयराम ठाकुर की सीधी निगरानी

इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान उच्च स्तर पर समन्वय देखा गया। पुरुषोत्तम शर्मा ने साझा किया कि जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता और हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर लगातार उनके संपर्क में बने रहे। दोनों दिग्गजों ने फोन के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से इन पर्यटकों का हालचाल जाना और स्थिति पर नजर रखी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक निर्देश दिए, जिससे पर्यटकों को बाहर निकालने की प्रक्रिया आसान हो गई।

सहयोग देने वालों का जताया आभार

सुरक्षित वापसी के बाद सभी पर्यटकों ने उन सभी संस्थाओं और व्यक्तियों का धन्यवाद किया जिन्होंने इस संकट में मदद की। इसमें कश्मीर के आईजी विरधी, कुलगाम के एसएसपी, राजबन के एसएसपी ट्रैफिक, सीआरपीएफ कैंप-163 की पूरी टीम, श्री अमरनाथ यात्रा लंगर समिति मथुरा और श्रीनगर में तैनात बालीचौकी निवासी मीने राम खत्री का विशेष उल्लेख किया गया। इसके अलावा, दारचा में नाश्ते की व्यवस्था के लिए सोनू शर्मा का भी आभार व्यक्त किया गया।

1900 किलोमीटर लंबी यात्रा का यादगार अनुभव

पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि उनकी यह यात्रा 18 जुलाई को शुरू हुई थी और करीब 1900 किलोमीटर का सफर उनके लिए एक यादगार अनुभव रहा। लेह से लेकर श्रीनगर तक की इस यात्रा के दौरान उन्होंने बारालाचा ला, तंगलंग ला, सर्चू, पांग, चांगला, पैंगोंग झील, लेह, कारगिल, द्रास, जोजिला दर्रा, सोनमर्ग, डल झील, श्रीनगर और ऐतिहासिक लाल चौक जैसे कई प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि परिवार के साथ यह यात्रा जीवन भर याद रहेगी। काजीगुंड में रुकने के दौरान उन्हें नादौन और कांगड़ा के साथियों के साथ बाबा अमरनाथ यात्रा शिविर में सेवा करने और लंगर ग्रहण करने का अवसर भी मिला, जिसे वे अपना सौभाग्य मानते हैं।

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