शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ में सरकारी शिक्षा प्रणाली के दावों की पोल एक चौंकाने वाली घटना ने खोल दी है। बस्तर जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले नन्हे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का मामला सामने आया है। यहां शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही के कारण 5वीं और 8वीं कक्षा के छात्रों को गलत मार्कशीट थमा दी गई। इस घटना के बाद से शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और अभिभावकों में भारी आक्रोश है। शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों की ओर से बरती गई इस गंभीर कोताही ने पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
क्या है पूरा मामला और कितने छात्र प्रभावित
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले के कुल 7 ब्लॉकों में शिक्षा विभाग ने मार्कशीट तैयार करने में भारी त्रुटियां कीं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 5वीं कक्षा के 1415 छात्र-छात्राओं और 8वीं कक्षा के 965 बच्चों की मार्कशीट पूरी तरह से गलत पाई गई हैं। इस गलती का पता चलने के बाद प्रशासन हरकत में आया है। प्रभावित छात्रों की संख्या को देखते हुए प्रशासन ने संबंधित बीईओ और एबीईओ को तलब किया है और उनसे जवाब मांगा गया है।
ब्लॉक-वार प्रभावित छात्रों का विवरण
गलत मार्कशीट का वितरण जिले के सात अलग-अलग ब्लॉकों में हुआ है, जिसका विवरण इस प्रकार है:
- बस्तर ब्लॉक: 5वीं के 330 और 8वीं के 175 छात्र।
- लोहण्डीगुड़ा ब्लॉक: 5वीं के 100 और 8वीं के 65 छात्र।
- जगदलपुर ब्लॉक: 5वीं के 350 और 8वीं के 170 छात्र।
- बास्तानार ब्लॉक: 5वीं के 195 और 8वीं के 120 छात्र।
- दरभा ब्लॉक: 5वीं के 185 और 8वीं के 105 छात्र।
- तोकापाल ब्लॉक: 5वीं के 185 और 8वीं के 110 छात्र।
- बकावंड ब्लॉक: 5वीं के 70 और 8वीं के 220 छात्र।
कलेक्टर ने दिए सुधार के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए बस्तर के कलेक्टर आकाश छिकारा ने शिक्षा विभाग के सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपनी जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी के साथ निभाएं। भविष्य में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर ने कहा कि बच्चों की मार्कशीट में जो त्रुटियां हुई हैं, उसके लिए जवाबदेही तय की जा रही है। उन्होंने सभी बीईओ को शो काज नोटिस जारी कर 3 दिन के भीतर जवाब मांगा है। साथ ही, यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि छात्रों को जल्द से जल्द त्रुटिरहित नई मार्कशीट उपलब्ध कराई जाए।
सिस्टम सुधारने की कवायद
बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा ने भरोसा दिलाया है कि इस पूरी प्रक्रिया को सुधारा जाएगा। उन्होंने कहा कि हम एक ऐसा मजबूत सिस्टम तैयार करने पर काम कर रहे हैं, जिससे भविष्य में अंकसूचियां बनाने या बांटने में इस तरह की गलतियां दोबारा न हों। फिलहाल, जिला प्रशासन की प्राथमिकता बच्चों को सही मार्कशीट देना है ताकि उनके आगे की पढ़ाई में कोई बाधा उत्पन्न न हो। अधिकारियों को यह भी चेताया गया है कि यदि आगे भी ऐसा मामला सामने आता है, तो संबंधित दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग की इस लापरवाही ने बच्चों के भविष्य को संकट में डाल दिया था, लेकिन अब सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
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