बिहार में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई
बिहार के सरकारी महकमों में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा हाल ही में जारी हुई एक सूची से लगाया जा सकता है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत दागी पदाधिकारियों और कर्मियों की विस्तृत सूची तैयार की है। इस सूची में उन लोगों के नाम शामिल हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं और अदालत में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। राज्य भर में ऐसे कुल 5136 दागी कर्मचारी और अधिकारी चिह्नित किए गए हैं।
किस विभाग में कितने दागी
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, शिक्षा विभाग भ्रष्टाचार के मामलों में सबसे ऊपर है। विभागवार दर्ज मामलों की स्थिति इस प्रकार है:
- शिक्षा विभाग: सर्वाधिक 988 मामले।
- राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग: 545 कर्मचारी।
- पंचायती राज विभाग: 348 मामले।
- बिहार पुलिस: 288 कर्मचारी।
- सामान्य प्रशासन विभाग: 251 पदाधिकारी और कर्मचारी।
सूची के बाद क्या बदलाव होंगे
निगरानी विभाग ने आधिकारिक तौर पर सभी विभागीय प्रमुखों, प्रमंडलीय आयुक्तों और सभी 38 जिलों के जिलाधिकारियों को दागी पदाधिकारियों की यह सूची 30 जून 2026 तक उपलब्ध करा दी है। इस कदम के बाद से प्रशासनिक प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव आया है। अब बिहार सरकार के विभिन्न विभागों, प्रमंडलों और जिला कार्यालयों को अपने अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए हर बार निगरानी विभाग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। विभाग अब सीधे तौर पर इस सूची का उपयोग करके निर्णय ले सकेंगे।
निगरानी विभाग की प्रक्रिया
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो अपनी कार्यप्रणाली के तहत वर्ष में दो बार, यानी जनवरी और जुलाई के महीनों में संबंधित प्रशासी विभागों को दागी अधिकारियों की सूची सौंपता है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि विभाग को पता रहे कि उनके अधीन काम करने वाले किन कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। इसी सूची को आधार मानकर विभागों के स्तर पर संबंधित अधिकारी की निगरानी स्वच्छता का निर्धारण किया जाता है, जिससे भविष्य की नियुक्ति और प्रमोशन में पारदर्शिता बनी रहे।
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