छपरा के किसान अब घर पर बना रहे जैविक खाद और दवा, खेती की लागत में आई भारी कमी

बिहार के छपरा में कृषि वैज्ञानिकों की मदद से किसान खुद ही जैविक खाद और कीटनाशक तैयार कर रहे हैं, जिससे खेती का खर्च आधा हो गया है।

खेती की बढ़ती लागत पर लगा लगाम

बिहार के छपरा जिले के किसान अब कृषि के पारंपरिक और महंगे तौर तरीकों से हटकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। जिले में कृषि वैज्ञानिक स्थानीय किसानों को विशेष प्रशिक्षण दे रहे हैं, ताकि वे अपनी खाद और कीटनाशक दवाएं खुद तैयार करना सीख सकें। इस पहल का मुख्य उद्देश्य खेती पर होने वाले अनावश्यक खर्च को कम करना और जमीन की उर्वरक क्षमता को लंबे समय तक बनाए रखना है।

मात्र 100 रुपये में तैयार हो रही 200 लीटर दवा

इस अनूठी तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत है। वैज्ञानिक किसानों को सिखा रहे हैं कि कैसे घर पर मौजूद साधारण सामग्री का इस्तेमाल करके प्रभावी जैविक खाद और दवाएं बनाई जा सकती हैं। जानकारी के अनुसार, किसान अब मात्र 100 रुपये के निवेश से 200 लीटर तक जैविक दवा तैयार कर रहे हैं। इससे न केवल बाजार में मिलने वाले महंगे रसायनों पर निर्भरता खत्म हो रही है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी आधा हो गया है।

मिट्टी की सेहत में हो रहा सुधार

खुद से तैयार की गई इस जैविक खाद और कीटनाशक के इस्तेमाल से खेतों की मिट्टी में चमत्कारिक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसके फायदे निम्नलिखित हैं:

  • मिट्टी की उपजाऊ क्षमता और पोषक तत्वों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
  • फसल की गुणवत्ता में सुधार के साथ पैदावार भी बेहतर हो रही है।
  • बाजार में उपलब्ध हानिकारक रसायनों से होने वाले नुकसान से मिट्टी और फसल को बचाया जा रहा है।
  • घर की सामग्री का उपयोग होने के कारण किसी अतिरिक्त बाजारू सामग्री की आवश्यकता नहीं पड़ती।

छपरा के किसानों में बढ़ा उत्साह

छपरा के कई किसान अब बड़े स्तर पर इस जैविक विधि को अपना रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी जा रही ट्रेनिंग के बाद किसान खुद को खाद और दवा बनाने में सक्षम मान रहे हैं। यह बदलाव न सिर्फ किसानों की आय में बचत के रूप में दिख रहा है, बल्कि आने वाले समय में यह स्थानीय स्तर पर एक बड़े जैविक कृषि आंदोलन की शुरुआत भी बन सकता है।

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