ट्विशा शर्मा मौत मामला: आरोपी सास गिरिबाला सिंह को अदालत से बड़ा झटका, जमानत याचिका खारिज

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा हत्याकांड में मुख्य आरोपी और सास गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका को सेशन कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है। सीबीआई के कड़े विरोध और मामले की गंभीरता को देखते हुए अब उन्हें जेल में ही रहना होगा।

गिरिबाला सिंह की जमानत अर्जी पर कोर्ट का फैसला

भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में मुख्य आरोपी और ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह को अदालत से बड़ा कानूनी झटका लगा है। शनिवार को भोपाल स्थित सेशन कोर्ट ने सुनवाई पूरी करते हुए उनकी नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद आरोपी गिरिबाला सिंह को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। कोर्ट ने मामले के तथ्यों और सीबीआई की ओर से पेश की गई दलीलों को आधार बनाते हुए यह निर्णय लिया है।

सीबीआई का कड़ा विरोध और कोर्ट की दलील

सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह के पक्ष में वकीलों ने उनकी उम्र और उनके पूर्व पद का हवाला देते हुए जमानत देने की अपील की थी। उनका तर्क था कि वह एक महिला हैं और सेवानिवृत्त जज रह चुकी हैं, इसलिए उन्हें राहत मिलनी चाहिए। हालांकि, जांच एजेंसी सीबीआई ने इसका पुरजोर विरोध किया। सीबीआई के अधिवक्ताओं ने अदालत के सामने मामले से जुड़े कई ठोस साक्ष्य और तथ्य रखे। सीबीआई का कहना था कि केवल महिला होने या उम्र के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। एजेंसी ने आशंका जताई कि बाहर आने से केस की जांच प्रभावित हो सकती है और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। कोर्ट ने इन तर्कों को गंभीरता से लिया और याचिका को अस्वीकार कर दिया।

मामले का घटनाक्रम और कानूनी उलझनें

ट्विशा शर्मा की मृत्यु 12 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी, जिसने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी थी। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया में कई बड़े मोड़ आए:

  • 15 मई: निचली अदालत ने आरोपी गिरिबाला सिंह को राहत देते हुए अग्रिम जमानत मंजूर कर ली थी।
  • 27 मई: जबलपुर हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता का संज्ञान लेते हुए निचली अदालत के फैसले को पलट दिया और उनकी जमानत रद्द कर दी थी।
  • 20 जुलाई: उच्च न्यायालय के रुख के बाद गिरिबाला सिंह ने दोबारा जमानत के लिए आवेदन किया।

इस प्रक्रिया के दौरान मामले ने काफी सुर्खियां बटोरीं, क्योंकि दो महिला जजों ने व्यक्तिगत कारणों से खुद को इस सुनवाई से अलग कर लिया था। इसके पश्चात केस को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर किया गया, जहां के जज ने भी स्वयं को सुनवाई से हटा लिया था। अंततः चौथे जज के समक्ष यह सुनवाई पूरी हुई और शुक्रवार को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।

फैसले का आधार

न्यायालय ने इस मामले को अत्यंत संवेदनशील और गंभीर श्रेणी का माना है। अदालत द्वारा विस्तृत आदेश की प्रति का अभी इंतजार है, लेकिन प्राथमिक तौर पर यह स्पष्ट है कि आरोपी पर लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए ही जमानत देने से इनकार किया गया है। 25 जुलाई को हुई सुनवाई के बाद यह साफ हो गया कि कानून की नजर में सभी साक्ष्य और जांच की निष्पक्षता सबसे ऊपर है। अपनी जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब गिरिबाला सिंह की कानूनी मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं और उन्हें सलाखों के पीछे ही रहना पड़ेगा। मामले पर अब आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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