सारनाथ की ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की हलचल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक महत्वपूर्ण पोस्ट साझा किया है। प्रधानमंत्री ने यूनेस्को के उस आधिकारिक पोस्ट को रीपोस्ट किया जिसमें उत्तर प्रदेश के सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने की जानकारी दी गई थी। प्रधानमंत्री ने इस घटनाक्रम को भारत के लिए गर्व का विषय बताया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि सारनाथ का भगवान बुद्ध से अत्यंत गहरा संबंध है और उनके द्वारा दिए गए ज्ञान, करुणा और शांति के संदेश पूरी दुनिया के लिए आज भी प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे अपनी बात रखते हुए कहा कि यूनेस्को द्वारा दी गई यह वैश्विक पहचान भारत की समृद्ध सभ्यता और आध्यात्मिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा सम्मान दिलाती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मान्यता के बाद दुनियाभर से अधिक संख्या में पर्यटक सारनाथ की यात्रा पर आएंगे और भगवान बुद्ध के उन शाश्वत आदर्शों को आत्मसात करेंगे, जो आज के समय में भी बेहद प्रासंगिक हैं।
भारत की 45वीं विश्व धरोहर के रूप में सारनाथ का उदय
सारनाथ को यूनेस्को की प्रतिष्ठित विश्व धरोहर सूची में स्थान मिलना भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह देश का 45वां विश्व धरोहर स्थल बन गया है। लगभग 28 वर्षों के लंबे और धैर्यपूर्ण इंतजार के बाद भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना स्थली सारनाथ को यह वैश्विक सम्मान प्राप्त हुआ है। दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र के दौरान शनिवार को इस फैसले की आधिकारिक घोषणा की गई। इस उपलब्धि ने न केवल बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में शुमार सारनाथ को वैश्विक मंच पर गौरव दिलाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को भी अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के मानचित्र पर नई ऊर्जा दी है।
गौरतलब है कि सारनाथ को 3 जुलाई 1998 को यूनेस्को की संभावित सूची में जगह मिली थी। लंबे समय के बाद मिली इस मान्यता का उत्तर प्रदेश के लिए खास महत्व है। अब तक राज्य में ताजमहल, आगरा का किला और फतेहपुर सीकरी जैसे तीन प्रमुख विश्व धरोहर स्थल थे जो मुख्य रूप से आगरा क्षेत्र तक सीमित थे। सारनाथ के जुड़ने से अब उत्तर प्रदेश की वैश्विक धरोहर की पहचान राज्य के पूर्वांचल क्षेत्र तक विस्तार पा गई है।
क्या-क्या शामिल है विश्व धरोहर संपत्ति में
यूनेस्को की ओर से मान्यता प्राप्त इस संपूर्ण धरोहर क्षेत्र में सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष और चौखंडी स्तूप को शामिल किया गया है। इन दोनों प्रमुख स्थलों के बीच की दूरी लगभग 626 मीटर है। चौखंडी स्तूप भगवान बुद्ध और उनके प्रारंभिक पांच शिष्यों के मिलन स्थल की याद दिलाता है। वहीं, पुरातात्विक परिसर के भीतर धामेक स्तूप, प्राचीन विहारों के ढांचे, धर्मराजिका स्तूप और ऐतिहासिक अशोक स्तंभ जैसे महत्वपूर्ण स्मारक विद्यमान हैं। ये सभी धरोहरें सारनाथ के उस क्रमिक विकास को दर्शाती हैं, जिसने इसे विश्व के प्रमुख बौद्ध ज्ञान और आस्था के केंद्र के रूप में स्थापित किया है।
भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना का केंद्र
सारनाथ को वह पवित्र भूमि माना जाता है, जहां ज्ञान प्राप्ति के उपरांत भगवान बुद्ध ने मानवता को अपना पहला उपदेश देकर 'धर्मचक्र प्रवर्तन' की ऐतिहासिक शुरुआत की थी। प्राचीन बौद्ध धर्मग्रंथों में इस स्थल को 'ऋषिपत्तन' के नाम से जाना जाता है। इसी स्थान पर भगवान बुद्ध ने अपने पहले पांच शिष्यों को करुणा, शांति और मध्यम मार्ग का उपदेश दिया था। लगभग 2600 वर्षों से सारनाथ बौद्ध आस्था, तीर्थ परंपरा, प्राचीन वास्तुकला और समृद्ध कलात्मक विरासत का जीवंत साक्षी रहा है।
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