छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी गिरफ्तार, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी का बड़ा एक्शन

प्रवर्तन निदेशालय ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को पेपर लीक और भर्ती में गड़बड़ी के एक बड़े मामले में गिरफ्तार कर लिया है। उन पर रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने और रिश्वत लेने के गंभीर आरोप हैं।

गिरफ्तारी और कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में गिरफ्तार कर लिया है। यह पूरा प्रकरण राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित तौर पर पेपर लीक करने और चयन प्रक्रिया में बड़े स्तर पर हेरफेर से जुड़ा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार को लंबी पूछताछ के बाद एजेंसी ने उन्हें धनशोधन निवारण अधिनियम यानी PMLA के तहत अपनी हिरासत में लिया है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि पूछताछ के दौरान सोनवानी की ओर से दिए गए जवाब काफी टालमटोल भरे थे, जिसके बाद यह कठोर कदम उठाया गया।

सीबीआई की एफआईआर से शुरू हुई जांच

इस पूरी जांच की नींव सीबीआई द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के बाद पड़ी। गौरतलब है कि राज्य पुलिस द्वारा पहले से दर्ज की गई शिकायत के आधार पर CBI ने अपनी जांच शुरू की थी। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब नवंबर 2023 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार हटने के बाद भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए ED ने इसमें मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से जांच शुरू की। इससे पहले वर्ष 2024 में भी CBI ने टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार किया था, जो अब प्रवर्तन निदेशालय की इस नई कार्रवाई के साथ और जटिल हो गया है।

भर्ती प्रक्रिया में हेरफेर के आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार, टामन सिंह सोनवानी पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में पेपर लीक करवाकर अवैध रूप से आर्थिक लाभ कमाया। एजेंसी का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में उन्होंने अपने सगे-संबंधियों और रिश्वत देने वाले अभ्यर्थियों को अनैतिक रूप से फायदा पहुंचाया। एक गंभीर खुलासा यह भी हुआ है कि वर्ष 2021 में भर्ती नियमों में बदलाव करके परिवार की परिभाषा से 'भतीजा' या 'भांजा' जैसे शब्दों को हटा दिया गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह बदलाव विशेष रूप से सोनवानी के परिवार के सदस्यों को सरकारी पदों पर बैठाने के लिए ही किया गया था।

रिश्वत का खेल और सीएसआर का सहारा

ED की जांच में रिश्वतखोरी के चौकाने वाले तरीके सामने आए हैं। एजेंसी का दावा है कि घूस की रकम का एक हिस्सा नकद में लिया गया, जबकि बाकी पैसा एक समिति के जरिए सफेद किया गया। यह समिति सोनवानी के परिवार के नियंत्रण में थी, जिसका उपयोग एक ऐसे कॉलेज के नाम पर किया गया जो असल में अस्तित्व में ही नहीं था। इस कॉलेज को कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व यानी CSR फंड के नाम पर पैसा ट्रांसफर किया गया। एजेंसी का यह भी आरोप है कि दो डिप्टी कलेक्टरों को नौकरी दिलाने की एवज में एक निजी कंपनी से करीब 45 लाख रुपये इसी तरीके से हासिल किए गए थे। फिलहाल, पूर्व अध्यक्ष को रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया जा रहा है, जहां एजेंसी उनकी रिमांड की मांग करेगी।

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