धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था: छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने आखिर ऐसा क्यों कहा?

नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर राजनीति तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इस कदम को अनुचित बताते हुए प्रधान से इस्तीफा वापस लेने का आग्रह किया है।

नीट पेपर लीक और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

नीट पेपर लीक मामले में मचे भारी बवाल और लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस इस्तीफे को लेकर देशभर में चर्चाओं का दौर गर्म है। पिछले 36 दिनों से जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में छात्र और कार्यकर्ता प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर धरना दे रहे थे। अब जब उन्होंने पद छोड़ दिया है, तो कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दिपके ने इसे छात्रों की बड़ी जीत करार दिया है। इस पूरे घटनाक्रम पर अब छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का बयान सामने आया है, जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

गजेंद्र यादव की प्रतिक्रिया और तर्क

छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इस मामले पर अपना स्पष्ट रुख रखते हुए कहा कि उनका व्यक्तिगत मानना है कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। यादव ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि शिक्षा विभाग एक बहुत बड़ा तंत्र है, जिसमें हजारों कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में किसी एक व्यक्ति की चूक या गलती की सजा पूरे विभाग या संबंधित मंत्री को मिलना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी मंत्री कभी नहीं चाहेगा कि उनके विभाग में किसी प्रकार की गड़बड़ी हो। गजेंद्र यादव ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कई बड़े और सख्त कदम उठाए हैं। उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन और संबंधित मामलों की जांच के लिए गठित समितियों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने पहले ही जवाबदेही तय करने की दिशा में कार्य शुरू कर दिया है।

इस्तीफा वापस लेने का आग्रह

मंत्री गजेंद्र यादव ने धर्मेंद्र प्रधान से अपना इस्तीफा वापस लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि देश के हित में यह जरूरी है कि प्रधान अपने पद पर बने रहें। यादव ने तर्क दिया कि धर्मेंद्र प्रधान नई शिक्षा नीति लेकर आए हैं, जो देश के शैक्षिक ढांचे को बदलने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि हम लंबे समय से मैकाले की शिक्षा पद्धति के प्रभाव में थे, जिसे बदलने का महत्वपूर्ण कार्य प्रधान के नेतृत्व में ही शुरू हुआ है। शिक्षा विभाग में हुए सुधारों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश को अभी उनके जैसे अनुभवी नेतृत्व की आवश्यकता है।

उपमुख्यमंत्री और विपक्ष का रुख

इस पूरे मामले पर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार नीट पेपर लीक मामले में शुरुआत से ही काफी गंभीर रही है और उसने हर कदम पर जिम्मेदारी के साथ कार्रवाई की है। साव ने जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ राज्य में भी परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने और गड़बड़ी रोकने के लिए सरकार ने विशेष कानून बनाया है। वहीं दूसरी ओर, विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। छत्तीसगढ़ के नेता प्रतिपक्ष महंत चरण दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह इस्तीफा अन्याय के खिलाफ न्याय की जीत है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि उन्हें देश के युवाओं से माफी मांगनी चाहिए। महंत चरण दास ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सरकार को पुख्ता इंतजाम करने होंगे और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।

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