है जवानी तो इश्क होना है रिव्यू: वरुण धवन की फिल्म उलझनों और ठहाकों का जबरदस्त मेल

डायरेक्टर डेविड धवन की 'है जवानी तो इश्क होना है' मॉडर्न यूथ अंदाज और पुराने जमाने की कॉमेडी का अनोखा संगम है, जो दर्शकों को तीन घंटे तक बेफिक्र हंसी देती है।

मसाला और सिचुएशनल कॉमेडी की दुनिया के सबसे माहिर फिल्मकारों में गिने जाने वाले डेविड धवन अपनी नई फिल्म 'है जवानी तो इश्क होना है' के साथ बड़े पर्दे पर दमदार और ब्लॉकबस्टर अंदाज में लौट रहे हैं। यह फिल्म आज के नौजवानों के स्वैग और ट्रेंडी लाइफस्टाइल को पुराने दौर के कॉमिक मसाले के साथ इस तरह मिलाती है कि एक बिल्कुल नया स्वाद तैयार होता है।

हंसी से गूंजता थिएटर

फिल्म दर्शकों को पूरे तीन घंटे तक बेफिक्र होकर हंसने का मौका देती है। वरुण धवन का फ्रंट-फुट मास-एंटरटेनर वाला अंदाज इसमें खूब जमता है, वहीं मनीष पॉल की कॉमिक टाइमिंग कहानी में जान फूंक देती है। दोनों की जोड़ी हर सीन में हंसी का बवंडर खड़ा कर देती है।

म्यूजिक और माहौल

शानदार ढंग से दोबारा तैयार किया गया संगीत फिल्म की रौनक और बढ़ा देता है। गानों और बैकग्राउंड स्कोर का असर ऐसा है कि पूरा थिएटर ठहाकों से गूंज उठता है।

किसके लिए है यह फिल्म

अगर आप इस वीकेंड पूरे परिवार के साथ तनाव से दूर, पूरी तरह देसी और हल्की-फुल्की मनोरंजक फिल्म देखना चाहते हैं, तो 'है जवानी तो इश्क होना है' एकदम सही चुनाव साबित होती है।

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