पेपर लीक पर सरकार का सख्त रुख, संसद न चली तो अध्यादेश लाने की तैयारी

पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए सरकार एक कड़े कानून का मसौदा तैयार कर चुकी है, जिसमें दोषियों के लिए उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। रजत शर्मा ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि छात्रों के आंदोलन का असर दिख रहा है और शिक्षा तंत्र में व्यापक सुधार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

पेपर लीक रोकने के लिए कानून में बड़ा बदलाव

परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के मामलों को जड़ से खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने एक सख्त कानून के ड्राफ्ट को अपनी मंजूरी दे दी है। सोमवार को इस नए बिल को संसद के पटल पर पेश करने की तैयारी है। यह नया कानून वर्ष 2024 में लाए गए 'पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट' की जगह लेगा। पुराने कानून में पेपर लीक के अपराधियों के लिए तीन से पांच साल की सजा का प्रावधान था, जबकि संगठित रूप से पेपर लीक करने वाले गिरोहों के लिए अधिकतम सजा 10 साल तय थी।

नए प्रस्तावित कानून में इन सजाओं को काफी कड़ा किया गया है। अब सामान्य दोषियों को मिलने वाली तीन से पांच साल की सजा को बढ़ाकर 10 साल किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव संगठित अपराध करने वालों के लिए है, जिनके लिए अब उम्रकैद की सजा का प्रावधान रखा गया है। साथ ही, आर्थिक दंड के दायरे को भी काफी बड़ा किया गया है। वर्तमान में अधिकतम एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, जिसे बढ़ाकर अब दस करोड़ रुपये करने की योजना है।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल

सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में आमूलचूल सुधार लाने का निर्णय लिया है। इसी दिशा में कदम उठाते हुए हाल ही में एजेंसी के 47 अफसरों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। इन रिक्त पदों पर अब नए और सक्षम अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। जानकारों का कहना है कि NTA में सुधार की प्रक्रिया बहुत पहले शुरू हो जानी चाहिए थी। शिक्षा मंत्रालय में उच्च शिक्षा सचिव के पद पर रहे विनीत जोशी को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। गुरुवार की रात उन्हें उनके पद से हटा दिया गया।

आरोप है कि विनीत जोशी शिक्षा मंत्रालय में एक तरह से सर्वशक्तिमान बने हुए थे और पूरी व्यवस्था उनके नियंत्रण में थी। गौरतलब है कि NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाएं भी उन्हीं की देखरेख में आयोजित की गई थीं। जब पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं, तो NTA में सुधार की कोशिशें की गईं, लेकिन उच्च शिक्षा सचिव के प्रभाव के कारण इन सुधारों को सिरे नहीं चढ़ने दिया गया। विनीत जोशी NTA के पहले महानिदेशक थे और उन्होंने ही इस संस्था की नींव रखी थी। इससे पहले वे CBSE के अध्यक्ष भी रह चुके थे और गुरुवार रात तक वे UGC के अंतरिम चेयरमैन के रूप में भी कार्यरत थे। दिलचस्प यह है कि जिन जगहों पर विवाद हुए, वहां विनीत जोशी की सीधी भूमिका रही थी। उनके मंत्रालय से तबादले के साथ ही NTA में सुधारों का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही, प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए दिल्ली, नागपुर और औरंगाबाद में तीन फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जा चुके हैं।

कोचिंग माफिया और शिक्षा व्यवस्था का संकट

इस कड़े कानून की आवश्यकता क्यों पड़ी, इसके पीछे की पृष्ठभूमि समझना जरूरी है। जब NEET परीक्षाओं की शुरुआत हुई थी, तो इसके तीन मुख्य उद्देश्य थे। पहला, अलग-अलग राज्यों द्वारा ली जाने वाली प्रवेश परीक्षाओं के जंजाल को खत्म करना। दूसरा, निजी कॉलेजों द्वारा मनमाने ढंग से ली जाने वाली कैपिटेशन फीस पर रोक लगाना। तीसरा, मेडिकल कॉलेजों में सिर्फ मेरिट के आधार पर ही प्रवेश सुनिश्चित करना। हालांकि, इरादे तो नेक थे लेकिन यह प्रणाली अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाई। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण अरबों रुपये की कोचिंग इंडस्ट्री है। कोचिंग सेंटर्स केवल अपनी सफलता दर को दिखाने के लिए छात्रों को टॉपर बनाने की होड़ में लगे रहते हैं, ताकि वे माता-पिता को लुभाकर उनसे मोटी फीस वसूल सकें।

छात्रों का आंदोलन और डिजिटल प्रभाव

सरकार ने छात्रों के साथ संवाद करने में कोई संकोच नहीं दिखाया, जो कि एक सकारात्मक संकेत है। सरकार ने उन छात्रों से सीधे बात की और उनके सुझावों को गंभीरता से लिया, जो अब नए कानून और NTA के सुधारों में दिखाई दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया। यदि हम इस वीडियो के प्रभाव की बात करें, तो आंकड़ों के अनुसार इसे Instagram, X और Facebook पर कुल मिलाकर 35 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देखा है। इसे 80 लाख से अधिक लोगों ने पसंद किया है, जिनमें से अकेले Instagram पर 27 करोड़ व्यूज और लगभग 13 लाख लाइक्स दर्ज किए गए हैं। यही वजह है कि प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रियों को नई पीढ़ी के साथ जुड़ने के लिए सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने का निर्देश दिया है।

सोनम वांगचुक और आंदोलन की दिशा

सोनम वांगचुक के अनशन और विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी राजनीति गर्म है। ऐसा प्रतीत होता है कि जो विपक्षी नेता पहले वांगचुक से अनशन समाप्त करने की मांग कर रहे थे, वे वास्तव में चाहते थे कि आंदोलन जारी रहे। CJP के आंदोलन को भी वांगचुक के जुड़ने से एक अलग स्तर की विश्वसनीयता मिली है। वांगचुक की छवि एक अनुभवी एक्टिविस्ट और शिक्षा सुधारक की रही है, इसलिए उन पर किसी भी तरह के आरोप या उन्हें विदेशी एजेंट करार देने की कोशिशें बेअसर रही हैं। उन्होंने बड़ी चतुराई से छात्रों के हितों को सर्वोपरि रखा और शिक्षा सुधारों की मांग पर अपनी व्यावहारिक सोच रखी।

निष्कर्ष

सरकार की गंभीरता से स्पष्ट है कि अब परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। कड़े कानूनों का डर माफियाओं के मन में खौफ पैदा करेगा। इस सुधार प्रक्रिया की सफलता का पूरा श्रेय उन छात्र-छात्राओं के संघर्ष और आंदोलन को जाता है, जिन्होंने व्यवस्था पर दबाव बनाकर सरकार को एक्शन मोड में आने के लिए मजबूर किया। अब उम्मीद है कि आने वाले समय में युवा पीढ़ी को एक स्वच्छ और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली मिलेगी।

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