संघर्ष से सफलता तक का सफर
पूर्वी चंपारण जिले के पहाड़पुर प्रखंड स्थित परसौनी गांव के रहने वाले अंबिका शाह की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। एक समय था जब वे बेहद तंगहाली में जीवन व्यतीत कर रहे थे, लेकिन अपनी मेहनत और पक्के इरादों के दम पर उन्होंने कामयाबी की नई इबारत लिखी है। आज अंबिका शाह न केवल खुद का व्यवसाय चला रहे हैं, बल्कि अपने क्षेत्र के दर्जनों लोगों के लिए आजीविका का जरिया भी बने हुए हैं।
800 रुपये से शुरू हुई थी कहानी
अंबिका शाह के जीवन का संघर्ष भरा दौर वर्ष 1992 में शुरू हुआ, जब वे काम की तलाश में पंजाब के लिए रवाना हुए। एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखने के कारण उनके पास अवसरों की कमी थी। वहां कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें एक आइसक्रीम फैक्ट्री में मजदूर के तौर पर काम मिला। उस समय उन्हें वेतन के रूप में केवल 800 रुपये मिलते थे। वे बताते हैं कि उन दिनों में से 500 रुपये वे अपने परिवार के भरण पोषण के लिए घर भेज दिया करते थे और शेष 300 रुपये में ही वे अपना पूरा महीना गुजारते थे।
तीन दशक का अनुभव और अपनी फैक्ट्री
अंबिका शाह ने आइसक्रीम बनाने के काम में करीब 30 साल बिताए। लंबे समय तक दूसरों के लिए काम करने के बाद उनके मन में अपने गांव में ही कुछ नया करने का विचार आया। उन्होंने धैर्य के साथ पैसे जमा किए और इसके साथ ही उन्हें सरकार की ओर से भी बड़ी मदद मिली। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत उन्होंने 9 लाख रुपये की राशि प्राप्त की, जिससे उन्होंने अपने गांव परसौनी में ही आइसक्रीम बनाने की अपनी फैक्ट्री स्थापित की।
मुनाफा और रोजगार
आज अंबिका शाह का यह छोटा सा उद्यम काफी सफल साबित हो रहा है। वे अपनी फैक्ट्री के माध्यम से प्रतिमाह 50 हजार रुपये तक की कमाई बड़ी आसानी से कर लेते हैं। उनकी इस उपलब्धि का सबसे सुखद पहलू यह है कि उन्होंने क्षेत्र के 25 लोगों को नियमित रोजगार उपलब्ध कराया है। उनकी फैक्ट्री में वर्तमान में 12 अलग-अलग तरह की आइसक्रीम तैयार की जाती हैं। स्थानीय स्तर पर इन आइसक्रीम की काफी मांग है और गांव के बच्चों के साथ-साथ शादी-विवाह जैसे विशेष आयोजनों में भी उन्हें बड़े ऑर्डर मिलते हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा
अपनी सफलता की राह से अंबिका शाह आज के युवाओं को एक अहम संदेश देते हैं। उनका मानना है कि यदि युवा जीवन में तेजी से प्रगति करना चाहते हैं, तो उन्हें केवल नौकरी की तलाश में सीमित नहीं रहना चाहिए। वे स्वरोजगार और व्यापार के क्षेत्र में कदम रखने की सलाह देते हैं, क्योंकि यही वह रास्ता है जो व्यक्ति को न केवल आत्मनिर्भर बनाता है, बल्कि दूसरों को भी आगे बढ़ने का अवसर देता है। उनकी यह कहानी साबित करती है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया काम भी सही दिशा और मेहनत से बड़ी सफलता में बदल सकता है।
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