NEET विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और पत्रकारों पर बर्बर हमला, शुभेंदु अधिकारी ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

कोलकाता में नीट परीक्षा में धांधली के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों और मीडियाकर्मियों पर हुए हमले पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ गुंडा दमन कानून के तहत कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।

हिंसा के बाद अस्पतालों में घायलों से मिले मुख्यमंत्री

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कोलकाता में नीट परीक्षा के विरोध में आयोजित प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों और पत्रकारों पर हुए हिंसक हमले की कड़ी निंदा की है। मुख्यमंत्री ने घटना के तुरंत बाद एसएसकेएम (SSKM) अस्पताल पहुंचकर घायल लोगों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) के माध्यम से जानकारी देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि घायलों को सर्वोत्तम संभव उपचार मुहैया कराया जाए और उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही शुरू की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मीडियाकर्मियों पर हुआ हमला अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने कोलकाता पुलिस आयुक्त (CP) को आदेश दिए हैं कि हमले में शामिल लोगों को चिन्हित कर तत्काल प्रभाव से कानून सम्मत कार्रवाई की जाए। उन्होंने अस्पताल में भर्ती पत्रकारों को सांत्वना दी और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने जोर देकर कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और हमलावरों को कानून के दायरे में लाना उनकी प्राथमिकता है।

विपक्ष का कड़ा रुख और विरोध की योजना

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतव्रत बनर्जी ने भी एसएसकेएम अस्पताल का दौरा किया और घायलों से मिलकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने इस घटना को जघन्य बताते हुए कहा कि पत्रकारों पर इस तरह का हमला लोकतंत्र के लिए खतरा है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई की मांग की है। विधानसभा में विपक्ष की ओर से इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने के लिए एक कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है। विधायक विधानसभा परिसर में स्थित अंबेडकर प्रतिमा के सामने काले बैज लगाकर अपना विरोध जताएंगे और पत्रकारों पर हुए हमले के खिलाफ मुखर रहेंगे। शुभेंदु अधिकारी ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि विरोध प्रदर्शन के नाम पर बोतलें और पत्थर फेंकना बंगाल की संस्कृति नहीं है, तो जनता को यह भी समझना चाहिए कि यह किस तरह की राजनीति है।

गुंडा दमन कानून के तहत होगी कार्रवाई

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घटनाक्रम का ब्यौरा देते हुए कहा कि पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे तब तक बल का प्रयोग न करें जब तक स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर न हो जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी लोगों द्वारा इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में उपद्रव फैलाया गया। शुभेंदु अधिकारी के अनुसार, पुलिस रिकॉर्ड में 6 पत्रकारों के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि हुई है और अब तक 6 लोगों ने आधिकारिक तौर पर एफआईआर (FIR) दर्ज कराई है। शुरुआती पहचान प्रक्रिया में लगभग 70 उपद्रवियों की पहचान की जा चुकी है और प्रशासन अब इन सभी के खिलाफ सख्त 'गुंडा दमन' कानून के अंतर्गत कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने साफ कर दिया है कि किसी भी सूरत में अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

नीट प्रदर्शन और पुलिस की रणनीति

कोलकाता में यह प्रदर्शन मुख्य रूप से नीट पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा था। 'ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन' (AIDSO) के बैनर तले आयोजित इस रैली में छात्रों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और कई स्थानों पर बोतलें फेंकने जैसी घटनाएं भी देखी गईं। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (एडीशनल सीपी) डीपी सिंह ने स्थिति को संभालने के लिए मोर्चा संभाला। उन्होंने बताया कि पुलिस प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद था। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के नेताओं के साथ संवाद स्थापित करने का प्रयास किया ताकि डोरिना क्रॉसिंग जैसे व्यस्त इलाकों में भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके और आम जनता को असुविधा न हो। पुलिस ने उन्हें धर्मतल्ला तक जाने की अनुमति दी थी और शांतिपूर्ण प्रदर्शन बनाए रखने की अपील की थी।

अभिषेक बनर्जी के स्वास्थ्य शिविर पर विवाद

इस पूरे मामले के बीच, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अभिषेक बनर्जी के स्वास्थ्य शिविर 'सेवा श्रॉय' को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी विधायक दिलीप मंडल के गोदाम से बड़ी संख्या में एक्स-रे मशीनें, अल्ट्रासोनोग्राफी उपकरण और एमआरआई (MRI) मशीनें जब्त की गई हैं। मुख्यमंत्री ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उक्त शिविर में मरीज़ों को ऐसी दवाएं दी गईं जो 2021 में ही एक्सपायर हो चुकी थीं। उन्होंने इस मामले में एक डॉक्टर द्वारा दी गई लिखित शिकायत का हवाला देते हुए कहा कि गलत उपचार के लिए जिम्मेदार हर व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि किसी को भी कानून से ऊपर नहीं रहने दिया जाएगा और जो भी इस प्रकार के भ्रष्टाचार में संलिप्त है, उसे दंड मिलना तय है।

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