पारंपरिक फसलों के मुकाबले अब किसान बागवानी फसलों की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। फूलों की खेती इसी दिशा में एक बेहद मुनाफे वाला सौदा साबित हो रही है। देश में त्योहारों, शादियों और विभिन्न आयोजनों के दौरान फूलों की मांग हमेशा बहुत ऊंची बनी रहती है। किसानों को इसी मांग का फायदा उठाने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। इस योजना का नाम है राष्ट्रीय बागवानी मिशन। इसके अंतर्गत फूलों की खेती शुरू करने वाले किसानों को भारी-भरकम सब्सिडी दी जा रही है ताकि वे शुरुआती निवेश की चिंता किए बिना इस क्षेत्र में कदम रख सकें।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन के जरिए मिलेगा 50% तक का अनुदान
इस विशेष सरकारी योजना के तहत किसानों को फूलों की खेती पर आने वाली कुल लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान यानी सब्सिडी दी जाएगी। यह वित्तीय सहायता किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें आधुनिक बागवानी तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए दी जा रही है। योजना में मुख्य रूप से दो श्रेणियों के फूलों को शामिल किया गया है:
- कट फ्लावर (Cut Flower): ऐसे फूल जिन्हें डंठल के साथ काटा जाता है और सजावट या गुलदस्ते के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जैसे गुलाब, जरबेरा, और कारनेशन।
- लूज फ्लावर (Loose Flower): ऐसे फूल जिन्हें बिना डंठल के तोड़ा जाता है, जैसे गेंदा, मोगरा, और चमेली, जिनका इस्तेमाल मुख्य रूप से माला बनाने या पूजा-अर्चना में होता है।
इस अनुदान के मिलने से किसानों पर वित्तीय बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा और वे बड़े पैमाने पर व्यावसायिक तरीके से फूलों की खेती कर सकेंगे।
गेंदे की खेती करने वालों को मिलेगा विशेष लाभ
भारतीय बाजारों में गेंदे के फूल की मांग साल भर बनी रहती है, खासकर त्योहारों के सीजन में। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने गेंदे की खेती करने वाले किसानों के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। उद्यान विभाग की तरफ से सीधे किसानों को गेंदे के पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे।
इसके अलावा, यदि कोई किसान विभागीय स्तर पर पौधे नहीं ले पाता है और अपनी पसंद के उच्च गुणवत्ता वाले पौधे बाहर से खरीदकर गेंदे की खेती शुरू करता है, तो भी उसे निराश होने की जरूरत नहीं है। नियमों के अनुसार, ऐसे किसानों को भी बाहर से खरीदे गए पौधों पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी का पूरा लाभ दिया जाएगा। इससे किसानों को अपनी पसंद की उन्नत किस्मों के चुनाव की पूरी आजादी मिलती है।
आवेदन के लिए इन दस्तावेजों की होगी जरूरत
अगर आप भी इस सरकारी सहायता योजना का लाभ उठाकर फूलों की खेती शुरू करना चाहते हैं, तो आपको कुछ जरूरी दस्तावेज तैयार रखने होंगे। विभाग द्वारा इन दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद ही सब्सिडी की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाएगी। आवेदन के लिए निम्नलिखित दस्तावेज अनिवार्य हैं:
- बी-1 फॉर्म: जमीन के मालिकाना हक को प्रमाणित करने वाला दस्तावेज।
- खसरा नंबर: कृषि भूमि की पहचान और क्षेत्र की जानकारी के लिए।
- आधार कार्ड: किसान की व्यक्तिगत पहचान के सत्यापन के लिए।
- बैंक खाते का विवरण: बैंक पासबुक की प्रति, ताकि अनुदान की राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जा सके।
उद्यान विभाग के अधिकारियों की किसानों से अपील
इस कल्याणकारी योजना के क्रियान्वयन को लेकर बिलासपुर स्थित उद्यान विभाग के उपसंचालक कमलेश दीवान ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन के माध्यम से फूलों की खेती करने वाले किसानों को लागत का आधा हिस्सा अनुदान के रूप में वापस मिल जाता है।
कमलेश दीवान ने क्षेत्र के सभी इच्छुक और प्रगतिशील किसानों से अपील की है कि वे इस सुनहरे मौके का पूरा फायदा उठाएं। उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी जमीन से संबंधित सभी जरूरी कागजात लेकर जल्द से जल्द अपने नजदीकी उद्यान विभाग के कार्यालय में संपर्क करना चाहिए, ताकि समय रहते विभागीय प्रक्रिया पूरी की जा सके और योजना का लाभ सीधे उन तक पहुंच सके।
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